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Showing posts from 2007

धर्मान्तरण कैसे कैसे !

1. मानविहिर की शातू बेन गुलाब भाई पवार बतातीं है कि असका पति गुलाब भाई बिमार रहता था। दवाई आदि कराई पर कोई लाभ नहीं हुआ। गांव के पास्टर के कहने पर कि ख्रिस्ती बनने पर ठीक हो जायेगा, गुलाब भाई ने अपना धर्म बदल लिया। असके बावजूद भी उसका स्वास्थ ठीक नहीं हुआ तो पास्टर ने कहा कि शीतू बेन अभी भी भूत, बंदरों की पूजा करती है, वह भी ईसाई हो जायेगी तो ठीक हो जाओगे। शीतू बेन और बाद में उसका पूरा परिवार ईसाई हो गया परन्तु गुलाब भाई ठिक होने की बजाए मर गया । अब शीतू बेन और उसका पूरा परिवार वास्तविकता को समझ गया है और उनई माता के कुंड में स्नान कर पुन: हिन्दू हो गया है । 2. जामनविहिर की ही अरूणा चंदू पवार आज से दो वर्ष पूर्व जब 7 साल की थी तो आने गांव में बपतिस्मा क्या होता है - यह तमाशा देखने गयी थी । पादरी ने इस नाबालिग लड़की को भी बपतिस्मा का पानी दे दिया । यह ध्यान रहे कि नाबालिग व्यक्ति का धर्म बदलना कानूनन अपराध है । 3. धांगड़ी फादर पाड़ा के सुरेश ने बताया कि उसके पेट में हर समय दर्द रहता था। चर्च वाले पास्टर ने कहा कि तुन ख्रिस्ती बन जाओगे तो मैं तुम्हारे लिये प्रार्थना करूंगा और उसने धर्म बदल

हिंदू छात्राओं को जबरन मुसलिम बनाने की कोशिशें

हिंदू छात्राओं को जबरन मुसलिम बनाने की कोशिशें लंदन। ब्रिटेन के विश्वविद्यालय परिसरों में हिंदू छात्राओं को डरा-धमका कर मुसलिम बनाने की कोशिशें की जा रही हैं। इससे यहां रह रहे हिंदुओं में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। वहीं, ब्रिटिश पुलिस इस मामले में मुसलिम कट्टंरपंथी समूहों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करेगी। इसके साथ ही हिंदुओं की सुरक्षा के लिए हिंदू सेफ्टी फोरम भी गठित किया जाएगा। ब्रिटिश मेट्रोपोलिटन पुलिस के आयुक्त सर इयान ब्लेयर ने बुधवार को यहां हिंदू फोरम आफ ब्रिटेन तथा नेशनल हिंदू स्टूडेंट्स फोरम द्वारा आयोजित एक सम्मेलन में मुसलिम कट्टंरपंथियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने और हिंदू सेफ्टी फोरम गठित करने की घोषणा की। सर ब्लेयर ने कहा कि हिंदू समुदाय में ऐसी भावना है कि हमने उन पर अन्य समुदायों की तुलना में अधिक ध्यान नहीं दिया है। उन्होंने आश्वासन दिया कि वे दोषी कट्टरपंथी मुसलिम संगठनों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे। मेट्रोपोलिटन पुलिस हिंदू एसोसिएशन के सहयोग से आयोजित इस सम्मेलन में आपराधिक न्याय प्रणाली से जुडे़ युवा, सामुदायिक नेता एवं अन्य प्रतिष्ठित लोग शामिल हुए। सम्मेलन में पुलिस द्वा

हाथो मे चूडिया पहन रखी है क्या हिन्दूओ ने

वैसे तो पिछले डेढ़ वर्ष से केन्द्र में सत्तारूढ़ होने के बाद से संयुक्त प्रगतिशील गठबन्धन ने एक के बाद एक मुस्लिम तुष्टीकरण के ऐसे कदम उठाये हैं जो पिछले सारे रिकार्ड धवस्त करते हैं. पिछले वर्ष दो निजी टेलीविजन के साथ साक्षात्कार में कांग्रेस अध्यक्षा श्रीमती सोनिया गाँधी ने स्वीकार किया था कि मुसलमान कांग्रेस के स्वाभाविक मित्र हैं और उन्हें अपने पाले में वापस लाने का पूरा प्रयास किया जायेगा. यह इस बात का संकेत था कि मुसलमानों को कुछ और विशेषाधिकार दिये जायेंगे.इसी बीच केन्द्र सरकार ने सेवा निवृत्त न्यायाधीश राजेन्द्र सच्चर की अध्यक्षता में एक आयोग बनाकर समाज के प्रत्येक क्षेत्र में मुसलमानों की सामाजिक व आर्थिक स्थिति का आकलन करने का निर्णय लिया. सेना में मुसलमानों की गिनती सम्बन्धी आदेश को लेकर उठे विवाद के बाद उस निर्णय को तो टाल दिया गया परन्तु न्यायपालिका, कार्यपालिका और विधायिका में मुस्लिम भागीदारी का सर्वेक्षण अवश्य किया गया.राजेन्द्र सच्चर आयोग ने अब अपनी विस्तृत रिपोर्ट प्रधानमन्त्री को सौंप दी है. इस रिपोर्ट के सार्वजनिक होने से पूर्व ही जिस प्रकार प्रधानमन्त्री डा. मनमोहन

मुसलमानों की सोच का सर्वेक्षण

मुसलमानों की सोच का सर्वेक्षण द्वारा डैनियल पाइप्सन्यूयार्क सन्27 जून, 2006 मौलिक अंग्रेजी सामग्री: [Pew Poll on] How Muslims Think हिन्दी अनुवाद - अमिताभ त्रिपाठी विश्व भर के मुसलमान कैसा सोचते हैं ? यह जानने के लिये पिउ रिसर्च सेन्टर फॉर द पीपुल एण्ड प्रेस ने बसन्त ऋतु में उनके व्यवहार के सम्बन्ध में व्यापक सर्वेक्षण किया. " The Great Divide: How Westerners and Muslims View Each Other ," शीर्षक से किये गये इस सर्वेक्षण में दो बैच में देशों को लिया गया. इनमें से छह देश वे थे जिनमें बड़ी मात्रा में मुस्लिम जनसंख्या है (मिस्र, इण्डोनेशिया, जार्डन , नाइजीरिया, पाकिस्तान और तुर्की) और चार पश्चिमी यूरोप के नई मुस्लिम अल्पसंख्यक जनसंख्या वाले देश (फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन और स्पेन) सर्वेक्षण में मुसलमानों के पश्चिम सम्बन्धी विचारों को देखते हुये जो परिणाम आये हैं वे पीड़ादायक तो हैं परन्तु आश्चर्यजनक कतई नहीं हैं. सर्वेक्षण के सारतत्व को तीन शीर्षकों में विभाजित किया जा सकता है. षड़यन्त्रकारी सिद्धान्त की ओर झुकाव- सर्वेक्षण में सम्मिलित मुस्लिम जनसंख्या में कहीं भी बहुमत में मुसल

इसलाम, फतवा और मुस्लिम औरत

हिजाब न पहनने पर बेटी की हत्या, टोरंटो (आई ए एन एस) पाकिस्तानी मूल की एक कनाडाई लरकी द्वारा हिजाब पहनने से इंकार करने पर उसके पिता ने उसकी हत्या कर दी.दक्षिण एशियाई नागरिको के उपनगर मिस्सिसुआगा में रहने वाली 16 वर्षीय अक्सा को उसके पिता मुह्हमद परवेज ने गला घोट कर मार डाला अक्सा के सहपाठियों के अनुसार उसके और उसके परिवार वालों के वीच हिजाब को लेकर कुछ समय से तनाव चल रहा था वाह घर से निकलते समय हिजाब पहनती थी और स्चूल पहुचकर आधुनिक कपरे पहन लेती थी,मुस्लिम समुदाय में मूर्ख तो मूर्ख पढे लिखे और आधुनिक लोग भी कट्टरता को भूल नहीं पा रहे हैं ये अपने कट्टरपंथी इसलाम और कुरान में लिखे फालतू बकबासों का पालन करने के लिए अपने बच्चो तक को नहीं छोर रहे तो किसी और को क्या छोरेंगे करनी मामा की और सजा मिली मासूम भांजी को मुजफ्फरनगर में मुस्लिम जातीय पंचायत ने मानवता की सारी हदों को पर करते हुए एक पंचायत में एक 14 वर्ष की मासूम नवालिग़ बालिका को अपने से दुगने उम्र के लरके से निकाह करने का फरमान सुनाया, लरकी रुबीना के मामा के किये गए पाप की सजा इस नवलिग़ को मिली, रुबीना के मामा ने एक नवालिग़ लर

आतंक के शिक्षा केन्द्र

अभी इस वर्ष के आरम्भ तक भारत में चल रहे इस्लामी आतंकवाद को उसके वैश्विक और विचारधारागत स्वभाव से जोड़कर देखने पर देश के नेताओं, लेखकों, समीक्षकों और रणनीतिकारों को गहरी आपत्ति थी. यहाँ तक कि भारत के मुसलमानों को इस आतंकी नेटवर्क या विचार से परे सिद्ध करने के लिये तर्क दिये जाते थे कि भारत का कोई भी मुसलमान अफगानिस्तान और ईराक में तालिबान या अल-कायदा की ओर से लड़ने नहीं गया. परन्तु सम्भवत: ये समीक्षक भारत में स्थित उन इस्लामी संस्थानों को लेकर चिन्तित नहीं थे जो इस धरती से पूरे विश्व के मुसलमानों को कट्टरता और आतंक की शिक्षा दे रहे हैं. जी हाँ ये चौंकने का विषय नहीं है भारत की धरती पर स्थित दो इस्लामी संस्थान समस्त विश्व में विध्वंस की मानसिकता रखने वाले आतंकियों के प्रेरणास्रोत हैं. लन्दन में अनेक विमानों को उड़ाने के षड़यन्त्र की पूछताछ में ब्रिटेन की पुलिस को पता चला है कि इस षड़यन्त्र में सम्मिलित कुल 23 लोगों में अनेक तबलीगी जमात के कट्टर समर्थक हैं. इस संगठन का ब्रिटेन की अधिकांश मस्जिदों पर नियन्त्रण है. तबलीगी जमात की स्थापना 1927 में भारत में मोहम्मद इलयास नामक मुस्ल

वन्देमातरम् पर आपत्ति

एक बार फिर वन्देमातरम् विवादों में है. कारण वही पुरानी इस्लामी जिद कि हमारे लिये देश से बढ़कर धर्म है. हालिया विवाद का आरम्भ उस समय हुआ जब मानव संसाधन मन्त्रालय की ओर से एक शासनादेश जारी कर वन्देमातरम् की रचना के शताब्दी समारोहों को समस्त देश में मनाने के उद्देश्य से समस्त विद्यालयों को आदेशित किया गया कि 7 सितम्बर को उनके यहाँ वन्देमातरम् के दो प्रारम्भिक चरण अनिवार्य रूप से गवाये जायें. इस शासनादेश के जारी होते ही मुस्लिम संगठनों और उलेमाओं ने वन्देमातरम् को इस्लाम के विरूद्ध बताते हुये कहा कि इसे गाते समय उन्हें भारतमाता की आराधना करनी होगी जबकि उनका धर्म अल्लाह और रसूल के अतिरिक्त किसी अन्य की प्रशंसा या आराधना की अनुमति नहीं देता. वन्देमातरम् के अनिवार्य गायन पर आपत्ति करने वालों में मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य जफरयाब जिलानी प्रमुख थे फिर उनका अनुसरण किया दिल्ली के शाही इमाम अहमद बुखारी ने. आल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड मुसलमानों का प्रतिनिधि संगठन है इसलिये उसके प्रतिनिधि द्वारा वन्देमातरम् न गाने की बात करने से यह स्पष्ट होता है कि आम मुसलमान इसी विचार का है. मुसलमानों

एक और फतवा

अभी जब गणेश जी सहित देश के अनेक मन्दिरों में विभिन्न देवप्रतिमाओं ने दुग्ध पान किया तो सामान्य तौर पर हिन्दुओं ने इसे श्रद्धा के तौर पर नकारा भले न हो परन्तु धर्मगुरू और अन्य लोगों ने इसे अन्धविश्वास ही अधिक माना. इससे हिन्दू धर्म की तार्किकता प्रमाणित होती है. परन्तु इसी देश में ऐसे धर्म के अनुयायी भी रहते हैं जो न केवल धर्म पालन में वरन् दिन प्रतिदिन के नियम पालन में भी धार्मिक कानून से ही संचालित होते हैं. अभी वन्देमातरम् पर फतवे की गूँज कम भी नहीं हुई थी कि सहारनपुर स्थित सुन्नी मुसलमानों के सबसे बड़े संस्थान दारूल उलूम देवबन्द ने लखनऊ के सलीम चिश्ती के प्रश्न के उत्तर में फतवा जारी किया है कि बैंक से ब्याज लेना या जीवन बीमा कराना इस्लामी कानून या शरियत के विरूद्ध है. दारूल उलूम के दो मुफ्तियों के साथ परामर्श कर मोहम्मद जफीरूद्दीन ने यह फतवा जारी किया . आल इण्डिया पर्सनल लॉ बोर्ड के अनेक सदस्यों ने इसे उचित ठहराया है. उनके अनुसार जीवन बीमा कराने का अर्थ है अल्लाह की सर्वोच्चता को चुनौती देना. यह नवीनतम उदाहरण मुसलमानों की स्थिति पर फिर से विचार करने के लिये पर्याप्त है.

पाकिस्तान में हिन्दू

भारत और पाकिस्तान आज़ादी के साठ साल पूरे होने पर तरह-तरह के समारोह गये लेकिन कराची के हिंदू के लिए इन समारोहों का कोई मतलब नहीं . बल्कि उनके सामने ज़िंदगी और मौत का सवाल खड़ा है.कराची की एक ऐसी बस्ती में रहते हैं जो चारों तरफ़ से मुसलमानों से घिरी हुई है और उनके लिए हर दिन यह ख़तरा लेकर आता है कि आज जाने क्या होगा. उनका दिन जब सही सलामत गुज़र जाता है तो बड़ी राहत की साँस लेते हैं.बुजुर्ग कहते हैं, “हमने तो जैसे-तैसे वक़्त गुज़ार लिया लेकिन हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए पाकिस्तान में हालात अच्छे नहीं हैं. हम बहुत डर में ज़िंदगी गुज़ार रहे हैं. हमारे बुज़ुर्गों ने पाकिस्तान में रहने का फ़ैसला करके बहुत बड़ा ख़तरा मोल लिया था.”पाकिस्तान में रहने वाले 25 लाख हिंदुओं हैं जिन्हें संविधान में तो बराबरी का दर्जा हासिल है लेकिन हक़ीक़त कुछ और ही है.बहुत सारे हिंदुओं का यह भी कहना है कि आम ज़िंदगी में उन्हें कोई ख़ास परेशानी नहीं है लेकिन बहुत सारे ऐसे मुद्दे भी हैं जिनमें उन्हें अहसास होता है कि वे एक मुसलिम देश में रहते हैं जहाँ कभी-कभी कट्टरपंथियों का दबदबा उन्हें यह सोचने को मजबूर कर देता ह

वंदे मातरम् पर बहिष्कार की धमकी

भारत के पूर्वी राज्य झारखंड के कुछ मुसलमान नेताओं ने कहा है कि वे सात सितंबर को वंदे मातरम् गाना अनिवार्य किए जाने के विरोध में अपने बच्चों के उस दिन स्कूल ही नहीं भेजेंगे.इस संबंध में झारखंड के मुस्लिम नेता मौलाना कुतुबुद्दीन रिज़वी का कहना है, "यदि भाजपा शासित राज्य सरकार हम पर वंदे मातरम् को थोपेगी तो हम इसका बहिष्कार करेंगे. हम इसके विरोध में अपने बच्चों को स्कूल ही नहीं भेजेंगे." मौलाना रिज़वी के रुख़ का अन्य मुस्लिम संगठनों ने भी समर्थन किया है.इससे आप क्या निष्कर्ष निकलते हैं ? क्या अब मुस्लिम रास्त्र विरोधी नहीं हो गये हैं ?जो वंदेमातरम नहीं बोलेगा उसे हिंदुस्तान जैसे पावन देश में रहने का कोई मतलब नहीं वंदेमातरमजय हिंद जय भारत हर हर महादेव

मुसलमानों का तालिबानी संस्कृति और हिन्दुस्तान

जहां कहीं भी मुसलमान अल्पसंख्या में होते है तो साधारणतया वे पंथनिरपेक्षता का समर्थन करते है, किंतु जैसे ही उनकी संख्या एक सीमा से बढ़ जाती है तो लोकतंत्र और पंथनिरपेक्षता जैसे मूल्य 'कुफ्र' हो जाते है। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद ने गांधी जयंती के अवसर पर एक सभा को संबोधित करते हुए कहा, ''..गांधी दर्शन ही प्रगति का मार्ग है।'' यह बात वहां के मुसलमानों को रास नहीं आई। कश्मीर के मुफ्ती बशीरुद्दीन ने इसकी कड़ी आलोचना करते हुए कहा, ''गांधी अपने समुदाय के लिए प्रासंगिक हो सकते है, किंतु मुसलमानों के लिए केवल पैगंबर साहब ही अनुकरणीय है।'' मुफ्ती ने आजाद से 'इस्लाम विरोधी' टिप्पणी के लिए प्रायश्चित करने को कहा है। गांधी जी ने मुस्लिमों की हर उचित-अनुचित मांगों का समर्थन किया। कठमुल्लों से प्रभावित मुस्लिम समाज को संतुष्ट करने के लिए खिलाफत आंदोलन में कांग्रेस को भी घसीट ले गए, किंतु वह जीवनपर्यत मुसलमानों का विश्वास नहीं जीत पाए। स्वतंत्रता संग्राम में मुसलमानों की भागीदारी नाम मात्र की थी। पाकिस्तान के निर्माण तक अधिकांश मुसलमानों

इसलाम और कुरान पर महापुरुषों के द्वारा दिए वीचार

महर्षि दयानंद सरस्वती : इस मजहब में अल्लाह और रसूल के वास्ते संसार को लुटवाना और लुट के माल में खुदा को हिस्सेदार बनाना लुटेरों का काम है, जो मुस्लमान नहीं बनते उन लोगो को मरना और बदले में बहिश्त को पाना आदि पक्षपात की बाते इश्वर की नहीं हो सकती, श्रेष्ठ ग़ैर मुसलमानो से शत्रुता और दुस्त मुसलमानो से मित्रता जन्नत में अनेक लौंडे होना आदि निन्दित उपदेश कुएं में डालने योग्य हैं, अनेक स्त्रियों को रखने वाले मुहम्मद साहेब निर्दयी, राक्षस व विषयासक्त मनुष्य थे, और इसलाम से अधिक अशांति फ़ैलाने वाला दुस्त मत और दुसरा कोई नहीं, इसलाम मत की मुख्य पुस्तक कुरान पर हमारा यह लेख हठ, दुराग्रह, इर्ष्या-द्वेष, वाद विवाद और विरोध घटने के लिए लिखा गया, न की इनको बढ़ने के लिए सब सज्जनो के सामने रखने का उद्देश्य अच्छाई को ग्रहन करना और बुरे को त्यागना है. गुरू राम दास जी :- छत्रपति शिवाजी महाराज के गुरू अपने "ग्रंथ-दास बोध" में लिखते हैं की मुस्लमान शासको द्वारा कुरान के अनुसार काफ़िर हिंदु नारियों से बलात्कार किये गए जिससे दुःखी होकर अनेकों ने आत्महत्या कर ली, मुस्लमान न बनने पर अनेक क़त्ल किये

एक युद्ध जो आदि काल से चला आ रहा है

यह एक ऐसा युद्ध है जो हजारों वर्षो से निरंतर चला आ रहा है जो की ख़तम होने का नाम ही नहीं लेता है, कारण सिर्फ इतना है की हम हिन्दू कुछ ज्यादा ही शांत प्रवृति के होते हैं हम किसी को जल्द अपना दुश्मन नहीं मानते और सिर्फ अपने मै मस्त रहते हैं जिसके कारण हमने कभी आज़ादी की सांस ली ही नहीं कभी अफगानी लुटेरों के शिकार होते रहे और उनके मुग़ल साम्राज्य को स्थापित होने दिया परिणाम स्वरुप हमें हजारों साल तक युद्ध करते रहे और अनेको महान वीरों गुरु तेग बहादुर, गुरु गोबिंद सिंह, महाराणा प्रताप, महाराज रंजीत सिंह, वीर शिवाजी जैसे अशंख्य वीरों की कुर्वानी के बाद हम मुग़लों का तख्ता पलट करने में कामयाब हो सके और हमें मुगलों के जुल्म से आज़ादी मिली लेकिन हम अपनी आज़ादी को चंद दिन भी कायम नहीं रख सके और अंग्रेजों की गुलामी को स्वीकार कर लिया फिर एक लम्बा संघर्ष अंग्रेजो से छीर गया सन् १८५७ के ग़दर से लेकर १९४७ तक के आज़ादी संग्राम में फिर से हमने अपने लाखों वीरों को खोया, अभी हम ठीक से आज़ादी मिलने की ख़ुशी भी नहीं मना पाए थे की फिर कुछ लोगो के दिल में हिन्दुस्तान की आज़ादी खटक गयी और उन्होने एक अलग से मुस्लिम