Skip to main content

बिहार में हो रहे बलात्कार पर मीडिया क्यों चुप है ?

अनगिनत बलात्कार की घटनाओं का साक्षी रहा है सुशासन का बिगुल फ़ूँकता हुआ बिहार l बिहार में रोज तीन-चार बलात्कार की घटनाएँ (रिपोर्टेड) होती हैं l कुछ घटनाएँ सामने आती हैं तो ज्यादातर घटनाओं की ओर ना तो सरकार का ही ध्यान जाता है ना ही तथाकथित इलेक्ट्रॉनिक जागरूक मीडिया और जनमानस का l ज्यादातर घटनाएँ तो सतह पर अनेकों कारणों से आ ही नहीं पाती हैं और अनेकों घटनाओं पर पुलिस-प्रशासन पर्दा डालने का काम कर देता है l हासिल कुछ नहीं होता अपराधी जटिल कानूनी प्रकिया और जुगाड़-तंत्र के सहारे बेखौफ़ व बेलगाम हो कर नित्य नयी घटनाओं को अँजाम दे रहे हैं l
पिछले वर्ष दिल्ली की शर्मसार करने वाली घटना पर तो मुख्य-मंत्री श्री नीतिश कुमार जी का बयान तो आया था , बुद्धिजीवियों और सामाजिक संगठनों के द्वारा संवेदनाएँ व्यक्त की गयीं थी, विरोध-प्रदर्शनों का दौर जारी था लेकिन अपने घर (प्रदेश) में घटित हो रही जघन्य-कुकर्मों के प्रति इन सबों की उदासीनता समझ से परे है ?
बिहार में पिछले कुछ सालों में बलात्कार , सामूहिक बलात्कार , बच्चों के साथ जबरन दुष्कर्म की घटनाओं में जबर्दस्त इजाफ़ा हुआ है जो बेहद ही चिंतनीय है l लेकिन ज्यादातर मामलों की ओर ना तो मीडिया का ध्यान जाता है ना समाज के स्वयंभु ठीकेदारों का l मीडिया भी महानगरों में घटित होने वाली घटनाओं को ही प्राथमिकता देती है , शायद महानगरों की घटनाएँ ज्यादा बिकाऊ होती होंगी ? समाचार पत्रों में किसी कोने में एक छोटी सी जगह दे कर या समाचार चैनलों के “ स्क्रॉल – बार ” पर डालकर अपने दायित्व से पल्ला झाड़ लिया जाता है l हाल के दिनों में बलात्कार और यौन हिंसा के सबसे ज्यादा मामले बिहार से ही सामने आये हैं।
अनेकों घटनाएँ , जैसे परसा ,समस्तीपुर एवं दनियाँवा सामूहिक बलात्कार काँड , इस का ज्वलन्त उदाहरण हैं l अगर यही घटनाएँ किसी बड़े शहर में घटी होतीं तो कोहराम मच जाता , ब्रेकिंग – न्यूज का सब से बिकाऊ मसाला होता लेकिन अफ़सोस इस बात का है कि हमारा समाज और उसकी संस्थाएँ दोहरे मापदण्डों के साथ सीना तान कर चल रही हैं l नारी की अस्मिता के भी भिन्न-भिन्न मापदण्ड हैं शायद ? दनियाँवा और दिल्ली में फ़र्क तो है ही !!! लेकिन दोनों जगहों पर एक चीज जो कॉमन है वो है ” संवेदनहीन और संकीर्ण दृष्टिकोण ” वाली सरकार और कठपुतली की तरह चलने वाला शासन-तंत्र l दिल्ली की घटना के बाद किसी नेत्री ने कहा था कि दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा के विशेष प्रबंध होने चाहिए l लेकिन केवल दिल्ली में ही भारत नहीं बसता ,सुरक्षा – प्रबंध सर्वत्र होने चाहिए l
चित्र में दिए गए आंकड़ों से स्पष्ट है कि बिहार में बलात्कार को लेकर स्थिति कितनी भयानक है और बिहार सरकार महिलाओं के प्रति बढ़ते हुए जघन्य अपराधों में लिप्त लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने में गंभीर नहीं है। बिहार में हो रहे बलात्कार के मामलों और पुलिस-प्रशासन की भूमिका पर बिहार के मुख्यमंत्री की चुप्पी सच में हैरान करने वाली है l अनगिनत बलात्कार की घटनाओं का साक्षी रहा है सुशासन का बिगुल फ़ूँकता हुआ बिहार l बिहार में रोज तीन-चार बलात्कार की घटनाएँ (रिपोर्टेड) होती हैं l कुछ घटनाएँ सामने आती हैं तो ज्यादातर घटनाओं की ओर ना तो सरकार का ही ध्यान जाता है ना ही तथाकथित इलेक्ट्रॉनिक जागरूक मीडिया और जनमानस का l ज्यादातर घटनाएँ तो सतह पर अनेकों कारणों से आ ही नहीं पाती हैं और अनेकों घटनाओं पर पुलिस-प्रशासन पर्दा डालने का काम कर देता है l हासिल कुछ नहीं होता अपराधी जटिल कानूनी प्रकिया और जुगाड़-तंत्र के सहारे बेखौफ़ व बेलगाम हो कर नित्य नयी घटनाओं को अँजाम दे रहे हैं l
पिछले वर्ष दिल्ली की शर्मसार करने वाली घटना पर तो मुख्य-मंत्री श्री नीतिश कुमार जी का बयान तो आया था , बुद्धिजीवियों और सामाजिक संगठनों के द्वारा संवेदनाएँ व्यक्त की गयीं थी, विरोध-प्रदर्शनों का दौर जारी था लेकिन अपने घर (प्रदेश) में घटित हो रही जघन्य-कुकर्मों के प्रति इन सबों की उदासीनता समझ से परे है ?
बिहार में पिछले कुछ सालों में बलात्कार , सामूहिक बलात्कार , बच्चों के साथ जबरन दुष्कर्म की घटनाओं में जबर्दस्त इजाफ़ा हुआ है जो बेहद ही चिंतनीय है l लेकिन ज्यादातर मामलों की ओर ना तो मीडिया का ध्यान जाता है ना समाज के स्वयंभु ठीकेदारों का l मीडिया भी महानगरों में घटित होने वाली घटनाओं को ही प्राथमिकता देती है , शायद महानगरों की घटनाएँ ज्यादा बिकाऊ होती होंगी ? समाचार पत्रों में किसी कोने में एक छोटी सी जगह दे कर या समाचार चैनलों के “ स्क्रॉल – बार ” पर डालकर अपने दायित्व से पल्ला झाड़ लिया जाता है l हाल के दिनों में बलात्कार और यौन हिंसा के सबसे ज्यादा मामले बिहार से ही सामने आये हैं।
अनेकों घटनाएँ , जैसे परसा ,समस्तीपुर एवं दनियाँवा सामूहिक बलात्कार काँड , इस का ज्वलन्त उदाहरण हैं l अगर यही घटनाएँ किसी बड़े शहर में घटी होतीं तो कोहराम मच जाता , ब्रेकिंग – न्यूज का सब से बिकाऊ मसाला होता लेकिन अफ़सोस इस बात का है कि हमारा समाज और उसकी संस्थाएँ दोहरे मापदण्डों के साथ सीना तान कर चल रही हैं l नारी की अस्मिता के भी भिन्न-भिन्न मापदण्ड हैं शायद ? दनियाँवा और दिल्ली में फ़र्क तो है ही !!! लेकिन दोनों जगहों पर एक चीज जो कॉमन है वो है ” संवेदनहीन और संकीर्ण दृष्टिकोण ” वाली सरकार और कठपुतली की तरह चलने वाला शासन-तंत्र l दिल्ली की घटना के बाद किसी नेत्री ने कहा था कि दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा के विशेष प्रबंध होने चाहिए l लेकिन केवल दिल्ली में ही भारत नहीं बसता ,सुरक्षा – प्रबंध सर्वत्र होने चाहिए l
चित्र में दिए गए आंकड़ों से स्पष्ट है कि बिहार में बलात्कार को लेकर स्थिति कितनी भयानक है और बिहार सरकार महिलाओं के प्रति बढ़ते हुए जघन्य अपराधों में लिप्त लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने में गंभीर नहीं है। बिहार में हो रहे बलात्कार के मामलों और पुलिस-प्रशासन की भूमिका पर बिहार के मुख्यमंत्री की चुप्पी सच में हैरान करने वाली है l

Comments

Popular posts from this blog

हमला या साजिश

अमरनाथ दर्शन के लिए घाटी पहुचे जयपूर के श्रधालुओ पर मंगलवार को उपद्रवियों ने हमला किया हमला श्रीनगर से अनंतनाग के बीच दो बार वहां के लोगो द्वारा किया गया जिसमे १ दर्जन बसों के शीशे टूट गए और कई यात्री घायल हुए, जयपुर से १७५१ यात्री गए हुए थे जिन्हें अब रस्ते में रोका गया है जिससे उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पर रहा है, घायल यात्रियों अस्पताल में भर्ती करवाया गया है , यात्रियों ने समाचारपत्रों को फ़ोन पर बताया की उन्हें अभी तक कोई संतोषजनक जबाब नहीं मिला है , प्रशासन की तरफ से किसी प्रकार की व्यवस्था नहीं की गयी है यात्रियों को आई जी , डीआई जी या अन्य अधिकारियो से मिलने नहीं दिया गया है। अमरनाथ यात्रियों पर आज ये कोई पहला हमला नहीं है इससे पहले भी हमले होते रहे है हमलो का एक संक्षिप्त व्योरा यहाँ दिया जा रहा है :- वर्ष २००८ में अमरनाथ श्राइन बोर्ड को आवंटित की जाने वाली भूमि के मसले पर जगह जगह हमले हुए थे जिसमे कई पर्यटक तथा यात्री घायल हुए थेऔर कई लोगो की मृत्यु हुयी थी । २५/०७/२००८ को अमरनाथ यात्रियों और पर्यटकों पर हथगोलों से हमला हुआ जिसमे ५ लोगो की मौत तथा कई लोग घायल ...

ऐतिहासिक परिपेक्ष्य में जिहाद

द्वारा डैनियल पाइप्सन्यूयार्क सन31 मई, 2005 राइस विश्वविद्यालय के डेविड कुक ने “अन्डर-स्टेंडिंग जिहाद” नाम से एक बहुत अच्छी और बोधगम्य पुस्तक लिखी है .युनिवर्सिटी औफ कैलीफोर्निया प्रेस द्वारा प्रकाशित इस पुस्तक का विमोचन अभी शीघ्र ही हुआ है ...इस पुस्तक में डेविड कुक ने 11 सितम्बर के पश्चात जिहाद पर आरंभ हुई निचले स्तर की बहस के स्वरुप को निरस्त किया है कि क्या यह एक आक्रामक युद्द पद्धति है या फिर व्यक्ति के नैतिक विकास का प्रकार है... कुरान मुसलमानों को स्वर्ग के बदले अपनी जान देने को आमंत्रित करता है ..हदीथ , जो कि मोहम्मद के क्रियाकलापों और व्यक्तिगत बयानों का लेखा जोखा है ,कुरान के सिद्दांतो की और अधिक व्याख्या करता है .इसमें संधियों, धन का वितरण , युद्द में प्राप्त सामग्री य़ा पुरस्कार , बंदियों, विभिन्न नीतियों का उल्लेख है ..मुसलिम विधिशास्त्र ने कालांतर में इन व्यावहारिक विषयों को सूत्रबद्ध कर इसे एक कानून का स्वरुप दे दिया .... पैगंबर ने अपने शासनकाल के दौरान औसतन प्रतिवर्ष नौ सैन्य अभियानों में हिस्सा लिया ...अर्थात प्रत्येक पाँच या छ सप्ताह में एक सैन्य अभियान , इस प्रकार अत्...

इसलाम और कुरान पर महापुरुषों के द्वारा दिए वीचार

महर्षि दयानंद सरस्वती : इस मजहब में अल्लाह और रसूल के वास्ते संसार को लुटवाना और लुट के माल में खुदा को हिस्सेदार बनाना लुटेरों का काम है, जो मुस्लमान नहीं बनते उन लोगो को मरना और बदले में बहिश्त को पाना आदि पक्षपात की बाते इश्वर की नहीं हो सकती, श्रेष्ठ ग़ैर मुसलमानो से शत्रुता और दुस्त मुसलमानो से मित्रता जन्नत में अनेक लौंडे होना आदि निन्दित उपदेश कुएं में डालने योग्य हैं, अनेक स्त्रियों को रखने वाले मुहम्मद साहेब निर्दयी, राक्षस व विषयासक्त मनुष्य थे, और इसलाम से अधिक अशांति फ़ैलाने वाला दुस्त मत और दुसरा कोई नहीं, इसलाम मत की मुख्य पुस्तक कुरान पर हमारा यह लेख हठ, दुराग्रह, इर्ष्या-द्वेष, वाद विवाद और विरोध घटने के लिए लिखा गया, न की इनको बढ़ने के लिए सब सज्जनो के सामने रखने का उद्देश्य अच्छाई को ग्रहन करना और बुरे को त्यागना है. गुरू राम दास जी :- छत्रपति शिवाजी महाराज के गुरू अपने "ग्रंथ-दास बोध" में लिखते हैं की मुस्लमान शासको द्वारा कुरान के अनुसार काफ़िर हिंदु नारियों से बलात्कार किये गए जिससे दुःखी होकर अनेकों ने आत्महत्या कर ली, मुस्लमान न बनने पर अनेक क़त्ल किये ...