
अमरनाथ दर्शन के लिए घाटी पहुचे जयपूर के श्रधालुओ पर मंगलवार को उपद्रवियों ने हमला किया हमला श्रीनगर से अनंतनाग के बीच दो बार वहां के लोगो द्वारा किया गया जिसमे १ दर्जन बसों के शीशे टूट गए और कई यात्री घायल हुए, जयपुर से १७५१ यात्री गए हुए थे जिन्हें अब रस्ते में रोका गया है जिससे उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पर रहा है, घायल यात्रियों अस्पताल में भर्ती करवाया गया है , यात्रियों ने समाचारपत्रों को फ़ोन पर बताया की उन्हें अभी तक कोई संतोषजनक जबाब नहीं मिला है , प्रशासन की तरफ से किसी प्रकार की व्यवस्था नहीं की गयी है यात्रियों को आईजी, डीआईजी या अन्य अधिकारियो से मिलने नहीं दिया गया है।
अमरनाथ यात्रियों पर आज ये कोई पहला हमला नहीं है इससे पहले भी हमले होते रहे है
हमलो का एक संक्षिप्त व्योरा यहाँ दिया जा रहा है :-
- वर्ष २००८ में अमरनाथ श्राइन बोर्ड को आवंटित की जाने वाली भूमि के मसले पर जगह जगह हमले हुए थे जिसमे कई पर्यटक तथा यात्री घायल हुए थेऔर कई लोगो की मृत्यु हुयी थी ।
- २५/०७/२००८ को अमरनाथ यात्रियों और पर्यटकों पर हथगोलों से हमला हुआ जिसमे ५ लोगो की मौत तथा कई लोग घायल हो गये थे ।
- २१/०७/२००८ अमरनाथ तीर्थ यात्रियों पर ग्रेनेड से हमला जिसमे १० घायल, घायलों में अधिकांश साधू थे यह इस हपते में यात्रियों पर दूसरा हमला था।
२२/७/२००७ अमरनाथ यात्रियों पर हथगोलों से हमला ८ साधुओ समेत १५ लोग जख्मी हो गये । - ३०/७/२००२ अमरनाथ जा रहे तीर्थयात्रियो पर हमला किया गया जीमे दो की मृत्यु हो गयी तथा अन्य कई लोग घायल हो गये ।
- 0६/०८/२००२ अमरनाथ यात्रियों और इसाई स्कुलो पर किये जा रहे हमलो की अमेरिका और ब्रिटेन ने निंदा किया ।
और भी कई हमले जो की हर साल अमरनाथ यात्रियों पर होते रहे हैं ।
इसके अलावा अमरनाथ यात्रियों और लंगर समितियों से जजिया टैक्स बसूला जा रहा है हर बस, ट्रक से २८००/- प्रतिदिन और हलके वाहनों से २३००/- प्रतिदिन के हिसाब से लिया जा रहा है । तथा हर लंगर समिति से २५०००/- रुपये लिया जा रहा है जबकि उनके लंगर लगाने वाले जगह को कम कर दिया गया है । इसके अलावा घाटी में घुसने पर अलग अलग स्थानों पर एंट्री फीस अलग से देना परता है ।
इधर भारत सरकार हजारो लाख रुपये हज यात्रियों को सब्सिडी देती रही है ।
आखिर यह सब क्या है ? क्यों बनाया जा रहा है हर वर्ष अमरनाथ यात्रियों को निशाना ? जबकि इसी हिन्दुस्थान में येही हिन्दू हज यात्रियों को अपने दिए गये टैक्स में से दी जा रही सब्सिडी के खिलाफ कोई आवाज नहीं उठाती बल्कि मुस्लिम हज यात्रियों का स्वागत करके विदा करती है । तो फिर क्यों नहीं कोई मुस्लमान अमरनाथ यात्रियों पर हमला करने वाले अपने मुस्लमान भाइयो को रोकता है ? कही से कोई आवाज़ नहीं उठती है आखिर क्यों ? क्या साम्प्रदायिक सद्भाव सिर्फ हिन्दुओ को ही चाहिए ?
मुस्लमान हिन्दू से हर कार्य को उल्टा करते हैं जैसे अगर हिन्दू दक्षिण को अपवित्र मानते हैं तो मुस्लिम उसे पवित्र मानते हैं। हिन्दू सीधे हाथ धोते हैं तो मुस्लिम उल्टा हाथ धोते हैं । हिन्दू गौ को अपनी माँ के सामान पूजते हैं तो मुस्लिम गौकशी करते हैं। हिन्दू अगर अपनी मातृभूमि की जय वन्देमातरम बोलते हैं तो मुस्लिमो को वन्देमातरम से परहेज है और वो इसके खिलाफ फतवा जरी करते हैं । हिन्दू तो मुहर्रम और ईद में सम्मिलित होते हैं लेकिन कोई मुस्लिम उनके त्यौहार नवरात्री या दीपावली में सम्मिलित नहीं होता बल्कि ऐसे त्योहारों ब्लास्ट कर देते हैं, हिन्दुओ (काफिरों) के खिलाफ जेहाद का आवाहन करते हैं इससे क्या साबित होता है ?
आखिर क्यों हम एकतरफा ताली बजाते रहे अगर भाईचारा चाहिए तो क्या इसके लिए हिर्फ़ हिन्दू ही हमेशा अपनी स्वाभिमान को ताक पर रख कर हाथ बढ़ाये क्या मुस्लिमो का कोई फ़र्ज़ नहीं बनता ?
अमरनाथ यात्रियों पर हमले, हिन्दू मंदिरों में हमले, हिन्दुओ के तीज त्योहारों में हमले, गौकशी के द्वारा हिन्दुओ के अस्मिता पर हमला क्या यह साबित नहीं करता की हिन्दुओ के खिलाफ उनके अपने ही देश में उनके अपने ही तथाकथित भाइयो के द्वारा साजिश किया जा रहा है, यह साजिश नहीं तो और क्या है ?
वन्देमातरम
Comments