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अलगावबाद की आवाज

जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी नेता मुफ्ती मोहम्मद सईद तथा संसद पर हमले के षड्यंत्र के दोषी एसआर गिलानी का भारत विरोधी रवैया क्या रेखांकित करता है? विडंबना यह है कि इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति के बावजूद तथाकथित सेकुलर खेमा ऐसी अलगाववादी मानसिकता का समर्थन करता है। क्यों? पिछले दिनों जम्मू के रियासी जिले के महोर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए मुफ्ती मोहम्मद सईद ने जम्मू-कश्मीर में भारतीय और पाकिस्तानी मुद्राओं का चलन मान्य कर देने की सिफारिश की। इससे पूर्व पिछले साल जम्मू-कश्मीर सरकार के वित्तमंत्री तारीक हमीद कर्रा (पीडीपी नेता) ने प्रदेश के लिए अलग मुद्रा बनाने की बात उठाई थी। सईद का तर्क है कि जिस तरह यूरोपीय संघ के देशों में व्यापार आदि के लिए एक ही मुद्रा का चलन है उसी तरह घाटी में भी पाकिस्तानी मुद्रा का चलन हो ताकि दोनों देशों के बीच व्यापार के साथ आपसी रिश्ते भी बढ़ें। मुफ्ती मोहम्मद सईद के कुतर्को को आगे बढ़ाते हुए पीडीपी के महासचिव निजामुद्दीन भट्ट ने कहा है कि कश्मीर के स्थाई निदान के लिए पीडीपी का जो स्व-शासन का फार्मूला है, दो मुद्राओं के चलन की बात उसी फार्मूले का आर्थिक पहलू है। यूरोपीय संघ का उदाहरण देते हुए सईद यह भूल गए कि संघ के सभी सदस्य देशों में एक-दूसरे की मुद्रा आपसी रजामंदी से चलती है और यह व्यवस्था किसी एक राज्य या देश के लिए नहीं है। कश्मीर में पाकिस्तानी मुद्रा का चलना जम्मू-कश्मीर पर भारत के दावे को कमजोर करेगा। मुफ्ती का पाकिस्तान प्रेम छिपा नहीं है। कुछ समय पूर्व उनकी पुत्री और पीडीपी अध्यक्षा महबूबा मुफ्ती ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकवादी प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं को भारत आने की छूट देने की मांग की थी। स्वयं मुफ्ती मोहम्मद सईद समय-समय पर घाटी से भारतीय फौज हटाने की मांग भी करते रहे हैं-अर्थात घाटी में आतंकवादियों का स्वागत और सेना का विरोध। कभी सेना हटाने तो कभी सीमाओं को खोल देने की वकालत करने वाले सईद पिछले साठ सालों से पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर को भारत में मिलाने की मांग क्यों नहीं करते? पाक अधिकृत कश्मीर में चल रहे आतंकवादी शिविरों को बंद करने की बात क्यों नहीं उठाते? क्या पीडीपी कश्मीर को भारत का अंग नहीं मानती? क्या दो मुद्राओं के चलन की बात 'दो प्रधान, दो विधान, दो निशान' की अलगाववादी मानसिकता का अंग नहीं है?
यदि मुफ्ती मोहम्मद सईद अपने बयान को अलगाववादी मानसिकता का पोषक नहीं मानते तो उनकी भारतीयता संदिग्ध है। देश का एक बड़ा जनमानस मुफ्ती मोहम्मद सईद को कश्मीरी आतंकवाद का जन्मदाता मानता है। केंद्रीय गृहमंत्री रहते हुए मुफ्ती मोहम्मद सईद की पुत्री रूबिया का अपहरण और रिहाई के बदले बर्बर आतंकवादियों को छोड़ा जाना इस आशंका के पुख्ता आधार है। संसद पर हमले के आरोप में जब गिलानी को गिरफ्तार किया गया था तब सेकुलर बुद्धिजीवियों का एक बड़ा वर्ग उनके समर्थन में आ खड़ा हुआ था। जांच एजेंसियों और न्यायपालिका पर कीचड़ उछाला गया और गिलानी की राष्ट्रभक्ति के कसीदे काढ़े गए, किंतु पिछले दिनों बरेली की एक संस्था 'पैगामे अमन' द्वारा आयोजित एक सेमिनार में गिलानी ने जो कहा उससे प्रत्येक राष्ट्रभक्त मुसलमान को भी पीड़ा हुई होगी और इसलिए आयोजकों को गिलानी के विचारों से अंतत: असहमति व्यक्त करनी पड़ी। गिलानी ने कहा था, ''मैं भारतीय नहीं हूं। न ही भारत से मेरा कोई ताल्लुक है। मैं कश्मीरी हूं और कश्मीर भारत का हिस्सा नहीं है। कश्मीर में जो लोग लड़ रहे है वे आतंकवादी नहीं है। कश्मीर के लोगों की नजर में वे जननायक है।'' गिलानी ने आतंकवादियों की तुलना भगत सिंह से कर डाली। आगे उन्होंने भारत की न्याय व्यवस्था को कोसते हुए आरोप लगाया कि अफजल गुरू के खिलाफ कोई प्रमाण नहीं होने के बावजूद न्यायपालिका केवल जनभावनाओं को ध्यान में रखकर उसे फांसी पर लटकाना चाहती है। उच्चतम न्यायालय ने जब संसद पर हमले के मुख्य आरोपी अफजल गुरू को फांसी दिए जाने का आदेश दिया था तो तमाम 'सेकुलरवादी दलों' का राष्ट्रविरोधी चेहरा भी सामने आ गया था। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद सहित पीडीपी की नेता महबूबा मुफ्ती उसके बचाव में आ खड़ी हुई थीं। आजाद ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर फांसी की सजा नहीं दिए जाने की अपील की थी। अलगाववादी संगठनों के नेतृत्व में घाटी में व्यापक विरोध प्रदर्शन किया गया। इन सबका ही परिणाम है कि आज भी अफजल सरकारी मेहमान बना हुआ है और सेकुलर संप्रग सरकार फांसी की सजा माफ करने की जुगत में लगी है। संसद पर हमला करने आए आतंकवादियों की कार में लगे गृह मंत्रालय के जाली स्टीकर पर यह वाक्यांश लिखा मिला थे-''भारत बहुत बुरा देश है और हम भारत से घृणा करते है। हम भारत को नष्ट करना चाहते है और अल्लाह के फजल से हम ऐसा करेगे। अल्लाह हमारे साथ है और हम अपनी ओर से पूरी कोशिश करेगे।'' गिलानी के ताजा बयान के बाद भी यदि सेकुलर खेमा गिलानी और अफजल जैसे देशद्रोहियों की वकालत करता है तो उनकी राष्ट्र निष्ठा पर संदेह स्वाभाविक है। गिलानी दिल्ली विश्वविद्यालय में अरबी और फारसी पढ़ाता है। उसके नियुक्ति पत्रों की जांच होनी चाहिए और यदि उसने अपनी नागरिकता भारतीय बताई है तो उसे अविलंब बर्खास्त कर देना चाहिए। ऐसे देश द्रोही बतौर अध्यापक नवयुवकों को नफरत और अलगाववाद के सिवा और क्या शिक्षा दे पाएंगे? जम्मू-कश्मीर में कांग्रेस और पीडीपी की गठबंधन वाली सरकार है। विधानसभा चुनाव निकट आते देख पीडीपी का पाकिस्तान प्रेम और अलगाववादी ताकतों को समर्थन देना आश्चर्यजनक नहीं है। अब यह पूरी तरह स्पष्ट है कि मुफ्ती मोहम्मद सईद के बयान की निंदा करने से कतराती कांग्रेस भी वस्तुत: चुनाव को देखते हुए अलगाववादी ताकतों को नाराज नहीं करना चाहती। आखिरकार धारा 370 कांग्रेस की ही तो देन है। पीडीपी का उद्देश्य वस्तुत: 'स्थायी निवासी विधेयक' जैसे कानूनों से धारा 370 की और अधिक किलेबंदी कर जम्मू-कश्मीर को शेष भारत से हमेशा के लिए अलग कर देना है। जम्मू-कश्मीर की वृहत्त स्वायत्तता की मांग इसी दृष्टिकोण को रेखांकित करती है। 'यदि कश्मीर की जनता भारत के साथ नहीं रहना चाहती है तो हम उन्हे उनकी इच्छा के विरुद्ध मजबूर नहीं करेगे,' मार्च 1948 के अपने भाषण में पंडित नेहरू ने श्रीनगर में जो बात कही थी उसका अक्षरक्ष: पालन यदि पीडीपी या कांग्रेस कर रही है तो इसमें आश्चर्य की बात क्या है? 'माई फ्रोजन टरबुलेंस इन कश्मीर' नामक पुस्तक में लेखक जगमोहन ने लिखा है, ''द्वि-राष्ट्र सिद्धांत से जन्मा पाकिस्तान अपने संसाधनों पर जीवित है, किंतु यहां कश्मीर में धारा 370 और स्वायत्तता का मुद्दा इस तरह घालमेल कर बनाया गया है कि भारतीय धन से ही एक सल्तनत या छोटा पाकिस्तान पोषित किया जा रहा है।'' पं. नेहरू की अदूरदर्शिता से जन्मा कश्मीर संकट यदि आज नासूर बना है तो इसके लिए सेकुलर जमात ही प्रमुख कारण है, जो राष्ट्रीय हितों को भी वोट बैंक के पलड़े में तौलता है।

लिया गया : दैनिक जागरण संपादकीय २९/०४/२००८

Comments

manju said…
Bhagat singh.......23 saal ka ek naujavan phaasi par chad jaata hai...kyon ??are....apne desh ki aazadi ke liye.....uski shahadat ko 50 saal se upar ho gaye....azadi bhi mil gayi....par kya kisine socha hai...ki uss naujavan ne azad bharat kyo chaha tha......humare anekon shaheedon ne azad bharat ki kaisi kalpna ki thi....."azad bharat yane ek aisa bharat jahan har insaan azadi se jiye......"jahan bhai-bhai ka khoon nahi bahata ho.....aur jahan hindu-muslim ek ho....par aaj jahan hum 21 century mein pahunch gaye...tarakki to bahut ki humare desh ne....par dukh ki baat ye hain ki aaj bhi humare desh mein jaat- paat ko lekar jhagda hota...humesha hindu-muslim ladayon ki khabar milti hai.......jo hindu..... muslims ko dosh dete hai yaa, jo muslim.... hindu ko dosh dete hain...woh ye jaaan le....ki bharat ki azadi mein un dono ki shahadat barabar roop se shamil hai......ek aur jahan bhagat singh,sukhdev aur rajaguru the wahi dusri taraf humare muslim sher Azimullah khan,Bahadur shah zafar,Maulana abul kalam azad bhi the......agar hum sach much apne desh ko azad banana chahte hain to humein jaati dharam ko bhool kar apne desh ki tarakki aur bulandi ki aur dhyan dena chahiye...tabhi shaheedo ki shahadat ka koi matlab hoga.....

Jai Hind,
Ek bharitya
AZAD said…
dear manju ji aap kisi baaten kar rahi hain veer bhagat singh ji ne jis bharat ka sapna dekha tha usme sirf aur sirf indian the na hindu na muslim lekin jab koi aapko uksa uksa kar yaad dilaye ki wo muslim hai isliye use vishesh darja chahiye uska is desh ke vikas me koi hath nahi fir bhi use vishesh subidhayen chahiye atank ka sabse bara kendra wahi hai aur is baat ko wo garv se kahta hai ki wo jehadi hai jiski juban apne aapko bhartiya mante huye bhi ghabrati hai jo bharat me pakistani mudra chalane ki baat karke apne muslim hone ka sabut de raha ho aur jiska samarthan puri muslim kaum kar rahi ho aise logo ko to kab ke bhagat singh ji maar kar gira chuke hote ye hamara durbhagya hai ki aaj koi unke nakshe kadam par chalne wala nahi warna aise deshdrohi hamare desh ke neta nahi hote aur na hi aisi desh drohi kaum hindustan me hoti

vandematram yah nara bhi veer bhagat singh ji ka hi hai aur yahi unke muh se akhri samay ka nikla hua shabd hai jise muslim bolna nahi chahte aur jispar muslim hangama kar rahe hain
ab aap hi soco ki kaun desh ka apman kar raha hain

jai hind
vndematram

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