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इसलाम और कुरान पर महापुरुषों के द्वारा दिए वीचार

महर्षि दयानंद सरस्वती : इस मजहब में अल्लाह और रसूल के वास्ते संसार को लुटवाना और लुट के माल में खुदा को हिस्सेदार बनाना लुटेरों का काम है, जो मुस्लमान नहीं बनते उन लोगो को मरना और बदले में बहिश्त को पाना आदि पक्षपात की बाते इश्वर की नहीं हो सकती, श्रेष्ठ ग़ैर मुसलमानो से शत्रुता और दुस्त मुसलमानो से मित्रता जन्नत में अनेक लौंडे होना आदि निन्दित उपदेश कुएं में डालने योग्य हैं, अनेक स्त्रियों को रखने वाले मुहम्मद साहेब निर्दयी, राक्षस व विषयासक्त मनुष्य थे, और इसलाम से अधिक अशांति फ़ैलाने वाला दुस्त मत और दुसरा कोई नहीं, इसलाम मत की मुख्य पुस्तक कुरान पर हमारा यह लेख हठ, दुराग्रह, इर्ष्या-द्वेष, वाद विवाद और विरोध घटने के लिए लिखा गया, न की इनको बढ़ने के लिए सब सज्जनो के सामने रखने का उद्देश्य अच्छाई को ग्रहन करना और बुरे को त्यागना है. गुरू राम दास जी :- छत्रपति शिवाजी महाराज के गुरू अपने "ग्रंथ-दास बोध" में लिखते हैं की मुस्लमान शासको द्वारा कुरान के अनुसार काफ़िर हिंदु नारियों से बलात्कार किये गए जिससे दुःखी होकर अनेकों ने आत्महत्या कर ली, मुस्लमान न बनने पर अनेक क़त्ल किये ...

एक युद्ध जो आदि काल से चला आ रहा है

यह एक ऐसा युद्ध है जो हजारों वर्षो से निरंतर चला आ रहा है जो की ख़तम होने का नाम ही नहीं लेता है, कारण सिर्फ इतना है की हम हिन्दू कुछ ज्यादा ही शांत प्रवृति के होते हैं हम किसी को जल्द अपना दुश्मन नहीं मानते और सिर्फ अपने मै मस्त रहते हैं जिसके कारण हमने कभी आज़ादी की सांस ली ही नहीं कभी अफगानी लुटेरों के शिकार होते रहे और उनके मुग़ल साम्राज्य को स्थापित होने दिया परिणाम स्वरुप हमें हजारों साल तक युद्ध करते रहे और अनेको महान वीरों गुरु तेग बहादुर, गुरु गोबिंद सिंह, महाराणा प्रताप, महाराज रंजीत सिंह, वीर शिवाजी जैसे अशंख्य वीरों की कुर्वानी के बाद हम मुग़लों का तख्ता पलट करने में कामयाब हो सके और हमें मुगलों के जुल्म से आज़ादी मिली लेकिन हम अपनी आज़ादी को चंद दिन भी कायम नहीं रख सके और अंग्रेजों की गुलामी को स्वीकार कर लिया फिर एक लम्बा संघर्ष अंग्रेजो से छीर गया सन् १८५७ के ग़दर से लेकर १९४७ तक के आज़ादी संग्राम में फिर से हमने अपने लाखों वीरों को खोया, अभी हम ठीक से आज़ादी मिलने की ख़ुशी भी नहीं मना पाए थे की फिर कुछ लोगो के दिल में हिन्दुस्तान की आज़ादी खटक गयी और उन्होने एक अलग से मुस्लिम...

कश्मीर में उठ रहे आज़ादी की मांग,

कश्मीर भारत में उठ रहे आज़ादी की मांग, या पाकिस्तान परस्त रास्त्र्द्रोही इस्लामिक जेहाद ? कश्मीर जिसे धरती का स्वर्ग और भारत का मुकुट कहा जाता था आज भारत के लिए एक नासूर बन चूका है कारन सिर्फ मुस्लिम जेहाद के तहत कश्मीर को इस्लामिक राज्य बना कर पाकिस्तान के साथ मिलाने की योजना ही है, और आज रस्त्रद्रोही अल्गाव्बदियो ने अपनी आवाज इतनी बुलंद कर ली है की कश्मीर अब भारत के लिए कुछ दिनों का मेहमान ही साबित होने वाला है और यह सब सिर्फ कश्मीर में धारा ३७० लागु कर केंद्र की भूमिका को कमजोर करने और इसके साथ साथ केंद्र सरकार का मुस्लिम प्रेम वोट बैंक की राजनीती और सरकार की नपुंसकता को साबित करने के लिए काफी है यह बात कश्मीर के इतिहास से साबित हो जाता है जब सरदार बल्लव भाई के नेतृतव में भारतीय सेना ने कश्मीर को अपने कब्जे में ले लिया था परन्तु नेहरु ने जनमत संग्रह का फालतू प्रस्ताव लाकर विजयी भारतीय सेना के कदम को रोक दिया जिसका नतीजा पाकिस्तान ने कबाइली और अपनी छद्म सेना से कश्मीर में आक्रमण करवाया और क़ाफ़ी हिस्सा हथिया लिया । और कश्मीर भारत के लिए एक सदा रहने वाली समस्या बन कर रह गयी और पाकिस्ता...