<?xml version='1.0' encoding='UTF-8'?><?xml-stylesheet href="http://www.blogger.com/styles/atom.css" type="text/css"?><feed xmlns='http://www.w3.org/2005/Atom' xmlns:openSearch='http://a9.com/-/spec/opensearchrss/1.0/' xmlns:georss='http://www.georss.org/georss' xmlns:gd='http://schemas.google.com/g/2005' xmlns:thr='http://purl.org/syndication/thread/1.0'><id>tag:blogger.com,1999:blog-2369261783286222853</id><updated>2011-11-02T16:27:14.973-07:00</updated><title type='text'>एक युद्ध</title><subtitle type='html'></subtitle><link rel='http://schemas.google.com/g/2005#feed' type='application/atom+xml' href='http://yugkipukar.blogspot.com/feeds/posts/default'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2369261783286222853/posts/default?max-results=100'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://yugkipukar.blogspot.com/'/><link rel='hub' href='http://pubsubhubbub.appspot.com/'/><author><name>Gopal Kumar Azad</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17026889315614855803</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='22' src='http://bp1.blogger.com/_htfHEBB3KMM/R1OnPgC2oEI/AAAAAAAAAJ8/47Cqwt9SLzI/S220/15flag.jpg'/></author><generator version='7.00' uri='http://www.blogger.com'>Blogger</generator><openSearch:totalResults>30</openSearch:totalResults><openSearch:startIndex>1</openSearch:startIndex><openSearch:itemsPerPage>100</openSearch:itemsPerPage><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2369261783286222853.post-8492861346842772503</id><published>2010-06-30T22:23:00.000-07:00</published><updated>2010-07-02T01:15:51.381-07:00</updated><title type='text'>हमला या साजिश</title><content type='html'>&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_htfHEBB3KMM/TCxDXZ4UsXI/AAAAAAAAASg/-IKktPN5XX8/s1600/pilgrims-going-to-amarnath-yatra.jpg"&gt;&lt;img style="MARGIN: 0px 10px 10px 0px; WIDTH: 300px; FLOAT: left; HEIGHT: 224px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5488836115220967794" border="0" alt="" src="http://4.bp.blogspot.com/_htfHEBB3KMM/TCxDXZ4UsXI/AAAAAAAAASg/-IKktPN5XX8/s320/pilgrims-going-to-amarnath-yatra.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#3333ff;"&gt;&lt;span style="font-size:0;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#3333ff;"&gt;&lt;span style="font-size:0;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#cc0000;"&gt;&lt;strong&gt;अमरनाथ दर्शन के लिए &lt;span&gt;घाटी पहुचे &lt;/span&gt;जयपूर के &lt;span&gt;श्रधालुओ&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size:0;"&gt;&lt;span style="font-size:0;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size:0;"&gt;&lt;/span&gt;पर मंगलवार को उपद्रवियों ने हमला किया&lt;span style="font-size:0;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;span&gt;&lt;span&gt;हमला श्रीनगर से अनंतनाग के बीच दो बार वहां के लोगो द्वारा किया गया जिसमे&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size:0;"&gt;&lt;span style="font-size:0;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;१&lt;strong&gt; दर्जन बसों के शीशे टूट गए और कई यात्री घायल &lt;span style="font-size:0;"&gt;हुए, &lt;/span&gt;जयपुर से १७५१ यात्री गए हुए थे जिन्हें अब रस्ते में रोका गया है जिससे उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पर रहा &lt;span style="font-size:0;"&gt;है, &lt;/span&gt;घायल यात्रियों अस्पताल में भर्ती करवाया गया है , यात्रियों ने समाचारपत्रों को फ़ोन पर बताया की उन्हें अभी तक कोई संतोषजनक जबाब नहीं मिला है , प्रशासन की तरफ से किसी प्रकार की व्यवस्था नहीं की गयी है यात्रियों &lt;span&gt;को&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size:0;"&gt; &lt;/span&gt;आई&lt;span&gt;जी&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style="color:#cc0000;"&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:0;"&gt;, &lt;/span&gt;डीआई&lt;span&gt;जी&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:0;"&gt; &lt;/span&gt;या अन्य अधिकारियो से मिलने नहीं दिया गया&lt;/strong&gt; &lt;/span&gt;&lt;span&gt;&lt;span&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#cc0000;"&gt;है।&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size:0;"&gt;&lt;span style="color:#cc0000;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size:0;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#cc0000;"&gt;&lt;strong&gt;अमरनाथ यात्रियों पर आज ये कोई पहला हमला नहीं है इससे पहले भी हमले होते रहे है&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;हमलो का &lt;span style="font-size:0;"&gt;एक&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size:0;"&gt; &lt;/span&gt;संक्षिप्त व्योरा यहाँ दिया जा रहा है :- &lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;ul&gt;&lt;li&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#cc0000;"&gt;वर्ष २००८ में अमरनाथ श्राइन &lt;span style="font-size:0;"&gt;बोर्ड &lt;/span&gt;को आवंटित की जाने वाली भूमि के मसले पर जगह जगह हमले हुए थे जिसमे कई पर्यटक तथा यात्री घायल हुए थेऔर कई लोगो की मृत्यु हुयी थी । &lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/li&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;li&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#cc0000;"&gt;२५/०७/२००८ &lt;span style="font-size:0;"&gt;को &lt;/span&gt;अमरनाथ यात्रियों और पर्यटकों पर हथगोलों से हमला हुआ जिसमे ५ लोगो की मौत तथा कई लोग घायल हो गये थे । &lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/li&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;li&gt;&lt;span&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#cc0000;"&gt;२१/०७/२००८ अमरनाथ तीर्थ यात्रियों पर ग्रेनेड से हमला जिसमे १० घायल, घायलों में अधिकांश साधू थे यह इस हपते में यात्रियों पर दूसरा हमला था। &lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size:0;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#cc0000;"&gt;२२/७/२००७ अमरनाथ यात्रियों पर हथगोलों से हमला ८ साधुओ समेत १५ लोग जख्मी हो गये । &lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/li&gt;&lt;br /&gt;&lt;li&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#cc0000;"&gt;३०/७/२००२ अमरनाथ जा रहे तीर्थयात्रियो पर हमला किया गया जीमे दो की मृत्यु हो गयी तथा अन्य कई लोग घायल हो गये । &lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/li&gt;&lt;br /&gt;&lt;li&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#cc0000;"&gt;&lt;span style="font-size:0;"&gt;&lt;span style="font-size:0;"&gt;0&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;६/०८/२००२ अमरनाथ यात्रियों और इसाई स्कुलो पर किये जा रहे हमलो की अमेरिका और ब्रिटेन ने निंदा किया । &lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#cc0000;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#cc0000;"&gt;और भी कई हमले जो की हर साल अमरनाथ यात्रियों पर होते रहे हैं । &lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;span style="color:#cc0000;"&gt;&lt;strong&gt;इसके अलावा अमरनाथ यात्रियों और लंगर समितियों से जजिया टैक्स बसूला जा रहा है हर &lt;span style="font-size:0;"&gt;बस&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:0;"&gt;, &lt;/span&gt;ट्रक से &lt;span style="font-size:0;"&gt;२८००/- &lt;/span&gt;प्रतिदिन और हलके वाहनों से &lt;span style="font-size:0;"&gt;२३००/- &lt;/span&gt;प्रतिदिन के हिसाब से लिया जा रहा है । तथा हर लंगर समिति से २५०००/- रुपये लिया जा रहा है जबकि उनके लंगर लगाने वाले जगह को कम कर दिया गया है । इसके अलावा घाटी में घुसने पर अलग अलग स्थानों पर एंट्री फीस अलग से देना परता है ।&lt;/strong&gt; &lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#cc0000;"&gt;इधर भारत सरकार हजारो लाख रुपये हज यात्रियों को सब्सिडी देती रही है । &lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#cc0000;"&gt;आखिर यह सब क्या है ? क्यों बनाया जा रहा है हर वर्ष अमरनाथ यात्रियों को निशाना ? जबकि इसी हिन्दुस्थान में येही हिन्दू हज यात्रियों को अपने दिए गये टैक्स में &lt;span style="font-size:0;"&gt;से &lt;/span&gt;दी जा रही सब्सिडी के खिलाफ कोई आवाज नहीं उठाती बल्कि मुस्लिम हज यात्रियों का स्वागत करके विदा करती है । तो फिर क्यों नहीं कोई मुस्लमान अमरनाथ यात्रियों पर हमला करने वाले अपने मुस्लमान भाइयो को रोकता है ? कही से कोई आवाज़ नहीं उठती है आखिर क्यों ? क्या साम्प्रदायिक सद्भाव सिर्फ हिन्दुओ को ही चाहिए ?&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;span&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#cc0000;"&gt;मुस्लमान हिन्दू से हर कार्य को उल्टा करते हैं जैसे अगर हिन्दू दक्षिण को अपवित्र मानते हैं तो मुस्लिम उसे पवित्र मानते हैं। हिन्दू सीधे हाथ धोते हैं तो मुस्लिम उल्टा हाथ धोते हैं । हिन्दू गौ को अपनी माँ के सामान पूजते हैं तो मुस्लिम गौकशी करते हैं। हिन्दू अगर अपनी मातृभूमि की जय वन्देमातरम बोलते हैं तो मुस्लिमो को वन्देमातरम से परहेज है और वो इसके खिलाफ फतवा जरी करते हैं । हिन्दू तो मुहर्रम और ईद में सम्मिलित होते हैं लेकिन कोई मुस्लिम उनके त्यौहार नवरात्री या दीपावली में सम्मिलित नहीं होता बल्कि ऐसे त्योहारों ब्लास्ट कर देते हैं, हिन्दुओ (काफिरों) के खिलाफ जेहाद का आवाहन करते हैं इससे क्या साबित होता है ?&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;आखिर क्यों हम एकतरफा ताली बजाते रहे अगर भाईचारा चाहिए तो क्या इसके लिए हिर्फ़ हिन्दू ही हमेशा अपनी स्वाभिमान को ताक पर रख कर हाथ बढ़ाये क्या मुस्लिमो का कोई फ़र्ज़ नहीं बनता ?&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अमरनाथ यात्रियों पर हमले, हिन्दू मंदिरों में हमले, हिन्दुओ के तीज त्योहारों में हमले, गौकशी के द्वारा हिन्दुओ के अस्मिता पर हमला क्या यह साबित नहीं करता की हिन्दुओ के खिलाफ उनके अपने ही देश में उनके अपने ही तथाकथित भाइयो के द्वारा साजिश किया जा रहा है, यह साजिश नहीं तो और क्या है ?&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size:0;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#cc0000;"&gt;वन्देमातरम &lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#3333ff;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2369261783286222853-8492861346842772503?l=yugkipukar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://yugkipukar.blogspot.com/feeds/8492861346842772503/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2369261783286222853&amp;postID=8492861346842772503' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2369261783286222853/posts/default/8492861346842772503'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2369261783286222853/posts/default/8492861346842772503'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://yugkipukar.blogspot.com/2010/06/blog-post.html' title='हमला या साजिश'/><author><name>Gopal Kumar Azad</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17026889315614855803</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='22' src='http://bp1.blogger.com/_htfHEBB3KMM/R1OnPgC2oEI/AAAAAAAAAJ8/47Cqwt9SLzI/S220/15flag.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/_htfHEBB3KMM/TCxDXZ4UsXI/AAAAAAAAASg/-IKktPN5XX8/s72-c/pilgrims-going-to-amarnath-yatra.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2369261783286222853.post-7466403274611024137</id><published>2010-04-10T04:04:00.001-07:00</published><updated>2010-04-10T04:04:53.848-07:00</updated><title type='text'>पाकिस्तान में हिन्दू होना अभिशाप हो गया</title><content type='html'>खबर है कि पाकिस्तान के दक्षिण तटीय शहर कराची के एक निजी अस्पताल में काम करने वाली युवा नर्स बानो पिछले महीने से लापता है। नर्स के परिजनों ने घटना के पीछे धर्मातरण की आशंका जताई है। उनका आरोप है कि कई बार शिकायत के बावजूद पुलिस ने नर्स का पता लगाने की जहमत नहीं उठाई। घटना से नाराज हिंदू माहेश्वरी समुदाय के दर्जनों लोगों ने कराची प्रेस क्लब के बाहर प्रदर्शन किया और उन्होंने केंद्रीय व प्रांतीय सरकार और सुरक्षा एजेंसियों से बानो की सुरक्षित वापसी के लिए गुहार लगाई, लेकिन पाकिस्तान सरकार के कानों पर जूँ तक नहीं रेंगी है।  कराची प्रेस क्लब के सामने हाथों में नारे लिखी तख्तियां लिए प्रदर्शनकारी तीन सप्ताह से लापता बानो की तुरंत बरामदगी की मांग कर रहे थे। बानो एक निजी अस्पताल में काम करती थी। बानो की अस्पताल में मालिक के साथ अनबन थी। उन्होंने बताया कि हालांकि पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर ली है लेकिन अब तक उसने कोई कार्रवाई नहीं की है।&lt;br /&gt;पाकिस्तानी अखबार 'डेली टाइम्स' ने खबर दी है कि बानो तीन सप्ताह से लापता है। बानो के परिजनों को डर है कि हमें डर है कि कहीं उसकी हत्या न कर दी गई हो या जबरन धर्म परिवर्तन कराकर किसी मुस्लिम युवक से उसकी शादी न कर दी गई हो। सिंध प्रांत में अल्पसंख्यक हिन्दू समुदाय की महिलाओं और लड़कियों का अपहरण और बलात धर्मान्तरण करा कर जबरदस्ती विवाह कराना एक आम बात हो चुकी है और विगत कई सालों से ये कुत्सित खेल चल रहा है।&lt;br /&gt;ऐसी ही कुछ घटनाएँ हैं जो ये सोचने पर मजबूर करती है कि जो भारतीय मीडिया पाकिस्तान की गुलामी में रात-दिन कसीदे पढ़ता रहता है उनके कानों में पाकिस्तान में रह रहे हिन्दुओं की चीखें क्यों नहीं पहुँचती। एक हिन्दू लड़की रबीना के साथ जो हुआ वह बात तो सामने आ गई मगर ऐसी घटनाएँ पाकिस्तान में रह रहे हर तीसरे हिन्दू परिवार केसाथ हो रही है।  रबीना पाकिस्तान के सकूर में रहती थी और डॉक्टर बनना चाहती थी। इन्टरमीडिएट की परीक्षा में अच्छे अंक लेकर वह शहर के मेडिकल कॉलेज में प्रवेश के लिए गई। उसका नाम और पिता का नाम बताते ही भर्ती करने वाले अधिकारी ने बताया कि उसे बिलोचिस्तान का डोमिसाइल सर्टिफिकेट (स्थानीय निवासी प्रमाण पत्र) लाना होगा। रबीना के पिता क्वेटा गए और कई दफ्तरों के चक्कर काटने के बाद उनको कहा गया कि कि रबीना का परिवार अब सकूर में रह रहा है अत: वह सिंध से ही ये डोमिसाइल सर्टिफिकेट प्राप्त करें।&lt;br /&gt;रबीना ने काफी भागदौड़ की पर उसे निराशा ही हाथ लगी। अब उसने डॉक्टर बनने का सपना छोड़ दिया है, क्योंकि सभी मेडिकल कॉलेजों ने धर्म की आड़ में उसे एडमिशन देने से इंकार कर दिया है। आज वह घर में बैठी हुई है। कुछ दिन पहले  धारकी कस्बे से एक हिन्दू विवाहित महिला  का अपहरण करके उसका जबरन धर्म परिवर्तन किया गया। बाद में उसे एक स्थानीय अदालत में पेश करवाकर उससे जबरन बयान दिलवाया गया कि उसने मुस्लिम लड़के से निकाह कर लिया है। बाद में उस इस हिन्दू महिला ने किसी तरह अपने माता-पिता से सम्पर्क करके बताया कि किस तरह उसका अपहरण कर स इसके बाद हिन्दू जाति का एक लडका अजीत इस संबंध में आगे आया। वह उच्चाधिकारियों के समक्ष यह रहस्य खोलता उसके पहले ही उसे बुरे परिणाम भोगने की धमकी दी गई। यह धमकी बारचुंडी के मुल्ला ने अजीत को दी कि वह इस मामले में चुप्पी साधे रखे। उधर, हिन्दू लड़की को भी धमकी दी गई यदि उसने पुन: हिन्दू परिवार में शामिल होने की कोशिश की तो उसके घरवालों  को मार दिया जाएगा। बाद में अपहरण की गई उस महिला को गाँव में भीड़ में लेजाकर उससे कहलवाया गया कि इस्लाम धर्म उसने अपनी मर्जी से कुबूल किया है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2369261783286222853-7466403274611024137?l=yugkipukar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://yugkipukar.blogspot.com/feeds/7466403274611024137/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2369261783286222853&amp;postID=7466403274611024137' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2369261783286222853/posts/default/7466403274611024137'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2369261783286222853/posts/default/7466403274611024137'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://yugkipukar.blogspot.com/2010/04/blog-post.html' title='पाकिस्तान में हिन्दू होना अभिशाप हो गया'/><author><name>Gopal Kumar Azad</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17026889315614855803</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='22' src='http://bp1.blogger.com/_htfHEBB3KMM/R1OnPgC2oEI/AAAAAAAAAJ8/47Cqwt9SLzI/S220/15flag.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2369261783286222853.post-5687854451372623332</id><published>2008-09-06T02:36:00.000-07:00</published><updated>2008-09-06T02:37:23.206-07:00</updated><title type='text'>कश्मीर में उठ रहे आज़ादी की मांग,</title><content type='html'>&lt;p&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;कश्मीर भारत में उठ रहे आज़ादी की मांग, या पाकिस्तान परस्त रास्त्र्द्रोही इस्लामिक जेहाद ?&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;कश्मीर जिसे धरती का स्वर्ग और भारत का मुकुट कहा जाता था आज भारत के लिए एक नासूर बन चूका है कारन सिर्फ मुस्लिम जेहाद के तहत कश्मीर को इस्लामिक राज्य बना कर पाकिस्तान के साथ मिलाने की योजना ही है, और आज रस्त्रद्रोही अल्गाव्बदियो ने अपनी आवाज इतनी बुलंद कर ली है की कश्मीर अब भारत के लिए कुछ दिनों का मेहमान ही साबित होने वाला है और यह सब सिर्फ कश्मीर में धारा ३७० लागु कर केंद्र की भूमिका को कमजोर करने और इसके साथ साथ केंद्र सरकार का मुस्लिम प्रेम वोट बैंक की राजनीती और सरकार की नपुंसकता को साबित करने के लिए काफी है यह बात कश्मीर के इतिहास से साबित हो जाता है जब सरदार बल्लव भाई के नेतृतव में भारतीय सेना ने कश्मीर को अपने कब्जे में ले लिया था परन्तु नेहरु ने जनमत संग्रह का फालतू प्रस्ताव लाकर विजयी भारतीय सेना के कदम को रोक दिया जिसका नतीजा पाकिस्तान ने कबाइली और अपनी छद्म सेना से कश्मीर में आक्रमण करवाया और क़ाफ़ी हिस्सा हथिया लिया । और कश्मीर भारत के लिए एक सदा रहने वाली समस्या बन कर रह गयी और पाकिस्तान कश्मीर को हथियाने के लिए नित्य नयी चालें चलने लगा नतीजा भारत की आज़ादी के समय कश्मीर की वादी में लगभग 15 % हिन्दू थे और बाकी मुसल्मान । आतंकवाद शुरु होने के बाद आज कश्मीर में सिर्फ़ 4 % हिन्दू बाकी रह गये हैं, यानि कि वादी में 96 % मुस्लिम बहुमत है । वादी में कश्मीरी पंडितों की पाकिस्तान समर्थित इन्ही रस्त्रद्रोही अलगाव वादियों द्वारा खुले आम हत्याएं की जा रही थी और सरकार मौन रही थी इन हत्याओं और सरकार की नपुंसकता का एक उदाहरण यहाँ दे रहा हूँ सन् १९८९ से १९९० यानि एक वर्ष में ३१९ कश्मीरी पंडितों की हत्या की गयी और इसके बाद के वर्षो में यह एक सिलसिला ही बन गया था और सरकार का रूप तब स्पष्ट हो जाता है जब जम्मू-कश्मीर के वंधामा में दस साल पहले हुए कश्मीरी पंडितों के नरसंहार के बारे में गृह मंत्रालय को जानकारी नहीं है। मंत्रालय ने कहा है कि विभाग को ऐसी किसी घटना की जानकारी नहीं है, जिसमें बच्चों समेत 24 कश्मीरी पंडितों का नरसंहार किया गया था। यह घटना जग विदित है मगर सरकार को इसके बारे में मालूम नहीं, सरकार के इसी निक्कम्मा पण के वजह से आज इन रास्त्रद्रोही अलगाववादियों का हिम्मत इतना बढ़ गया है की अब ये कश्मीर को पूर्ण इस्लामिक राज्य मानकर कश्मीर को पाकिस्तान के साथ मिलाने के लिए अब कश्मीर में बहरी राज्यों से आये हिन्दू मजदूरों को बहार निकल रहे हैं स्वतंत्रता दिवस के पवन अवसर पर हिंदुस्तान के रास्त्रघ्व्ज को जलाया गया हिंदुस्तान मुर्दाबाद का नारा लगाया जा रहा है और सरकार मुस्लिम वोट बैंक को खुश करने के लिए चुप बैठी है कश्मीर में आर्मी के कैंप पर हमला करके उनको जलाया जा रहा है फिर हम कैसे कह सकते हैं की कश्मीर हमारे अन्दर में है अगर कश्मीर का मुस्लिम हमारे साथ है तो क्यों वह देशद्रोही अलगाववादियों का साथ दे रही है? अगर केंद्र सरकार कश्मीर समस्या का समाधान चाहती है तो क्यों नहीं वह वहां के अलगाववादी आतंकवादियों को के खिलाफ एक्शन ले रही है ? क्यों नहीं सरकार विस्थापित कश्मीरी पंडितों को फिर से उनके जमीन को वापस दिला रही है क्यों कश्मीरी पंडितो के हक़ का दमन कर रही है ? क्यों नहीं आज तक हुए कश्मीर में कश्मीरी पंडितो के हत्याकांडो की जाँच करवा रही है ? कश्मीरी भाइयो का साथ देने वाले साम्प्रदायिक और अलगाववादी देशद्रोही सरकार के नज़र में क्यों आज़ादी का नेता बना हुआ है ? अगर इस सवाल का जवाब सरकार के पास नहीं है तो सरकार देश की जनता को धोखा देना छोर दे की कश्मीर हमारा है और अगर सरकार सच में कश्मीर समस्या का समाधान चाहती है तो कश्मीरी पंडितो को इंसाफ दिलाये और अलगाववादी आतंकवादियों को सजा देकर कश्मीर को इन देशद्रोहियों से मुक्त कराये, अंत में एक सवाल सरकार और आपलोगों से क्या हिंदुस्तान जिंदाबाद का नारा लगाने वाले अपने रास्त्रध्व्ज तिरंगे को सीने से लगाये मरने वाले साम्प्रदायिक हैं ?क्या हिंदुस्तान मुर्दाबाद का नारा लगा कर अपने रास्त्र ध्वज तिरंगे को जलाने वाला देशद्रोही नहीं और अगर देश द्रोही है तो इसके खिलाफ कोई एक्शन क्यों नहीं ?&lt;br /&gt;इस आंख की अंधी सरकार से इंसाफ की क्या उम्मीद&lt;br /&gt;इसलिए अपने दर्द का मरहम ढूंढने आपके पास आये हैं हम&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;वन्देमातरम&lt;br /&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2369261783286222853-5687854451372623332?l=yugkipukar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://yugkipukar.blogspot.com/feeds/5687854451372623332/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2369261783286222853&amp;postID=5687854451372623332' title='8 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2369261783286222853/posts/default/5687854451372623332'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2369261783286222853/posts/default/5687854451372623332'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://yugkipukar.blogspot.com/2008/09/blog-post.html' title='कश्मीर में उठ रहे आज़ादी की मांग,'/><author><name>Gopal Kumar Azad</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17026889315614855803</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='22' src='http://bp1.blogger.com/_htfHEBB3KMM/R1OnPgC2oEI/AAAAAAAAAJ8/47Cqwt9SLzI/S220/15flag.jpg'/></author><thr:total>8</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2369261783286222853.post-8920050761346687109</id><published>2008-04-29T03:41:00.000-07:00</published><updated>2008-04-29T03:54:00.170-07:00</updated><title type='text'>अलगावबाद की आवाज</title><content type='html'>जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी नेता मुफ्ती मोहम्मद सईद तथा संसद पर हमले के षड्यंत्र के दोषी एसआर गिलानी का भारत विरोधी रवैया क्या रेखांकित करता है?&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt; विडंबना यह है कि इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति के बावजूद तथाकथित सेकुलर खेमा ऐसी अलगाववादी मानसिकता का समर्थन करता है। क्यों? पिछले दिनों जम्मू के रियासी जिले के महोर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए मुफ्ती मोहम्मद सईद ने जम्मू-कश्मीर में भारतीय और पाकिस्तानी मुद्राओं का चलन मान्य कर देने की सिफारिश की।&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt; इससे पूर्व पिछले साल जम्मू-कश्मीर सरकार के वित्तमंत्री तारीक हमीद कर्रा (पीडीपी नेता) ने प्रदेश के लिए अलग मुद्रा बनाने की बात उठाई थी। सईद का तर्क है कि जिस तरह यूरोपीय संघ के देशों में व्यापार आदि के लिए एक ही मुद्रा का चलन है उसी तरह घाटी में भी पाकिस्तानी मुद्रा का चलन हो ताकि दोनों देशों के बीच व्यापार के साथ आपसी रिश्ते भी बढ़ें। मुफ्ती मोहम्मद सईद के कुतर्को को आगे बढ़ाते हुए पीडीपी के महासचिव निजामुद्दीन भट्ट ने कहा है कि कश्मीर के स्थाई निदान के लिए पीडीपी का जो स्व-शासन का फार्मूला है, दो मुद्राओं के चलन की बात उसी फार्मूले का आर्थिक पहलू है। यूरोपीय संघ का उदाहरण देते हुए सईद यह भूल गए कि संघ के सभी सदस्य देशों में एक-दूसरे की मुद्रा आपसी रजामंदी से चलती है और यह व्यवस्था किसी एक राज्य या देश के लिए नहीं है। कश्मीर में पाकिस्तानी मुद्रा का चलना जम्मू-कश्मीर पर भारत के दावे को कमजोर करेगा। &lt;strong&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;मुफ्ती का पाकिस्तान प्रेम छिपा नहीं है। कुछ समय पूर्व उनकी पुत्री और पीडीपी अध्यक्षा महबूबा मुफ्ती ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकवादी प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं को भारत आने की छूट देने की मांग की थी। स्वयं मुफ्ती मोहम्मद सईद समय-समय पर घाटी से भारतीय फौज हटाने की मांग भी करते रहे हैं-अर्थात घाटी में आतंकवादियों का स्वागत और सेना का विरोध। कभी सेना हटाने तो कभी सीमाओं को खोल देने की वकालत करने वाले सईद पिछले साठ सालों से पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर को भारत में मिलाने की मांग क्यों नहीं करते? पाक अधिकृत कश्मीर में चल रहे आतंकवादी शिविरों को बंद करने की बात क्यों नहीं उठाते? क्या पीडीपी कश्मीर को भारत का अंग नहीं मानती?&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt; क्या दो मुद्राओं के चलन की बात 'दो प्रधान, दो विधान, दो निशान' की अलगाववादी मानसिकता का अंग नहीं है?&lt;br /&gt;यदि मुफ्ती मोहम्मद सईद अपने बयान को अलगाववादी मानसिकता का पोषक नहीं मानते तो उनकी भारतीयता संदिग्ध है। देश का एक बड़ा जनमानस मुफ्ती मोहम्मद सईद को कश्मीरी आतंकवाद का जन्मदाता मानता है। केंद्रीय गृहमंत्री रहते हुए मुफ्ती मोहम्मद सईद की पुत्री रूबिया का अपहरण और रिहाई के बदले बर्बर आतंकवादियों को छोड़ा जाना इस आशंका के पुख्ता आधार है। संसद पर हमले के आरोप में जब गिलानी को गिरफ्तार किया गया था तब सेकुलर बुद्धिजीवियों का एक बड़ा वर्ग उनके समर्थन में आ खड़ा हुआ था। जांच एजेंसियों और न्यायपालिका पर कीचड़ उछाला गया और गिलानी की राष्ट्रभक्ति के कसीदे काढ़े गए, किंतु पिछले दिनों बरेली की एक संस्था 'पैगामे अमन' द्वारा आयोजित एक सेमिनार में गिलानी ने जो कहा उससे प्रत्येक राष्ट्रभक्त मुसलमान को भी पीड़ा हुई होगी और इसलिए आयोजकों को गिलानी के विचारों से अंतत: असहमति व्यक्त करनी पड़ी। &lt;strong&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;गिलानी ने कहा था, ''मैं भारतीय नहीं हूं। न ही भारत से मेरा कोई ताल्लुक है। मैं कश्मीरी हूं और कश्मीर भारत का हिस्सा नहीं है। कश्मीर में जो लोग लड़ रहे है वे आतंकवादी नहीं है। कश्मीर के लोगों की नजर में वे जननायक है।'' गिलानी ने आतंकवादियों की तुलना भगत सिंह से कर डाली।&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt; आगे उन्होंने भारत की न्याय व्यवस्था को कोसते हुए आरोप लगाया कि अफजल गुरू के खिलाफ कोई प्रमाण नहीं होने के बावजूद न्यायपालिका केवल जनभावनाओं को ध्यान में रखकर उसे फांसी पर लटकाना चाहती है। उच्चतम न्यायालय ने जब संसद पर हमले के मुख्य आरोपी अफजल गुरू को फांसी दिए जाने का आदेश दिया था तो तमाम 'सेकुलरवादी दलों' का राष्ट्रविरोधी चेहरा भी सामने आ गया था। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद सहित पीडीपी की नेता महबूबा मुफ्ती उसके बचाव में आ खड़ी हुई थीं। आजाद ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर फांसी की सजा नहीं दिए जाने की अपील की थी। अलगाववादी संगठनों के नेतृत्व में घाटी में व्यापक विरोध प्रदर्शन किया गया। इन सबका ही परिणाम है कि आज भी अफजल सरकारी मेहमान बना हुआ है और सेकुलर संप्रग सरकार फांसी की सजा माफ करने की जुगत में लगी है। संसद पर हमला करने आए आतंकवादियों की कार में लगे गृह मंत्रालय के जाली स्टीकर पर यह वाक्यांश लिखा मिला थे-''भारत बहुत बुरा देश है और हम भारत से घृणा करते है। हम भारत को नष्ट करना चाहते है और अल्लाह के फजल से हम ऐसा करेगे। अल्लाह हमारे साथ है और हम अपनी ओर से पूरी कोशिश करेगे।'' गिलानी के ताजा बयान के बाद भी यदि सेकुलर खेमा गिलानी और अफजल जैसे देशद्रोहियों की वकालत करता है तो उनकी राष्ट्र निष्ठा पर संदेह स्वाभाविक है। गिलानी दिल्ली विश्वविद्यालय में अरबी और फारसी पढ़ाता है। उसके नियुक्ति पत्रों की जांच होनी चाहिए और यदि उसने अपनी नागरिकता भारतीय बताई है तो उसे अविलंब बर्खास्त कर देना चाहिए। ऐसे देश द्रोही बतौर अध्यापक नवयुवकों को नफरत और अलगाववाद के सिवा और क्या शिक्षा दे पाएंगे? जम्मू-कश्मीर में कांग्रेस और पीडीपी की गठबंधन वाली सरकार है। विधानसभा चुनाव निकट आते देख पीडीपी का पाकिस्तान प्रेम और अलगाववादी ताकतों को समर्थन देना आश्चर्यजनक नहीं है। अब यह पूरी तरह स्पष्ट है कि मुफ्ती मोहम्मद सईद के बयान की निंदा करने से कतराती कांग्रेस भी वस्तुत: चुनाव को देखते हुए अलगाववादी ताकतों को नाराज नहीं करना चाहती। आखिरकार धारा 370 कांग्रेस की ही तो देन है। पीडीपी का उद्देश्य वस्तुत: 'स्थायी निवासी विधेयक' जैसे कानूनों से धारा 370 की और अधिक किलेबंदी कर जम्मू-कश्मीर को शेष भारत से हमेशा के लिए अलग कर देना है। जम्मू-कश्मीर की वृहत्त स्वायत्तता की मांग इसी दृष्टिकोण को रेखांकित करती है। 'यदि कश्मीर की जनता भारत के साथ नहीं रहना चाहती है तो हम उन्हे उनकी इच्छा के विरुद्ध मजबूर नहीं करेगे,' मार्च 1948 के अपने भाषण में पंडित नेहरू ने श्रीनगर में जो बात कही थी उसका अक्षरक्ष: पालन यदि पीडीपी या कांग्रेस कर रही है तो इसमें आश्चर्य की बात क्या है? 'माई फ्रोजन टरबुलेंस इन कश्मीर' नामक पुस्तक में लेखक जगमोहन ने लिखा है, &lt;strong&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;''द्वि-राष्ट्र सिद्धांत से जन्मा पाकिस्तान अपने संसाधनों पर जीवित है, किंतु यहां कश्मीर में धारा 370 और स्वायत्तता का मुद्दा इस तरह घालमेल कर बनाया गया है कि भारतीय धन से ही एक सल्तनत या छोटा पाकिस्तान पोषित किया जा रहा है।'' पं. नेहरू की अदूरदर्शिता से जन्मा कश्मीर संकट यदि आज नासूर बना है तो इसके लिए सेकुलर जमात ही प्रमुख कारण है, जो राष्ट्रीय हितों को भी वोट बैंक के पलड़े में तौलता&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt; है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;लिया गया : दैनिक जागरण संपादकीय २९/०४/२००८&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2369261783286222853-8920050761346687109?l=yugkipukar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://yugkipukar.blogspot.com/feeds/8920050761346687109/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2369261783286222853&amp;postID=8920050761346687109' title='2 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2369261783286222853/posts/default/8920050761346687109'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2369261783286222853/posts/default/8920050761346687109'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://yugkipukar.blogspot.com/2008/04/blog-post.html' title='अलगावबाद की आवाज'/><author><name>Gopal Kumar Azad</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17026889315614855803</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='22' src='http://bp1.blogger.com/_htfHEBB3KMM/R1OnPgC2oEI/AAAAAAAAAJ8/47Cqwt9SLzI/S220/15flag.jpg'/></author><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2369261783286222853.post-3696559023971027159</id><published>2008-03-07T02:53:00.000-08:00</published><updated>2008-03-07T03:03:59.708-08:00</updated><title type='text'>आतंक और हम</title><content type='html'>देश में जब कभी कोई आतंकवादी हमला होता है, तो हमले के लिए जिम्मेदार लोगों या उनके संगठनों अथवा हमलावरों को पनाह देने वाले मुल्क या मुल्कों के नाम रेडिमेड तरीके से सामने आ जाते हैं। आतंकवादियों को कायर, पीठ में छुरा घोंपने वाले या बेगुनाहों का हत्यारा कहकर केंद्र और राज्य सरकारें तयशुदा प्रतिक्रिया व्यक्त कर देती हैं। हमारे नेता भी ऊंची आवाज में चीखकर कहते हैं कि आतंकवाद के साथ सख्ती से निपटा जाएगा।&lt;br /&gt;घटनास्थल के दौरे के साथ ही सभी बड़ी-बड़ी बातें खत्म हो जाया करती हैं, और यह श्रंखला आतंकवादियों की अगली करतूत होने पर फिर शुरू हो जाती है, यही सिलसिला चलता रहता है। लोगों ने अब यह भी कहना शुरू कर दिया है कि बढ़-चढ़कर किए गए ऐसे दावों में कोई दम नहीं होता। कुछ लोगों ने मुझसे यहां तक कहा कि अखबारों में छपे ऐसे सियासी बयानों को हम पढ़ते तक नहीं।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;25 अगस्त को हैदराबाद के एक एम्यूजमेंट पार्क और फिर एक मशहूर चाट की दुकान पर कुछ ही मिनट के अंतर से एक के बाद एक हुए दो विस्फोटों में पचास से अधिक लोग मारे गए और 75 घायल हो गए&lt;/strong&gt;। &lt;strong&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;राज्य व केंद्र सरकार ने इस हादसे के लिए भी, हर बार की तरह सरहद पार से आए आतंकियों को जिम्मेदार ठहराया। हालांकि इन विस्फोटों के पीछे इस्लामाबाद का हाथ होने संबंधी भारत के आरोप को नकारते हुए पाकिस्तान ने कहा है कि यह आतंकवादियों का कृत्य है और हम इसकी निंदा करते हैं।&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt; हम खुद आतंकवाद के शिकार हैं और इसके खिलाफ लड़ने के लिए वचनबद्ध हैं। पाक के मुताबिक अटकलें लगाने की बजाय जांच करना हमेशा बेहतर होता है।&lt;br /&gt;अपनी ही जमीन पर आतंकवाद के जिस दानव को उसने खड़ा किया था उसे पाकिस्तान काबू नहीं कर पा रहा है। इस तथाकथित जेहाद ने जिन्हें जन्म दिया है, वही लोग भारत में आतंकी गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं। पाक ने हवा के बीज बोए थे, इसीलिए उसे बवंडर की फसल मिली है।&lt;br /&gt;हमारा देश आतंकवाद की सर्वाधिक गंभीर समस्या का सामना कर रहा है। सरकार के आतंकवाद विरोधी प्रयासों में तेजी और मजबूती लाने के लिए हमें आतंकवाद के आधार को निष्क्रिय करने वाले तथा आतंकी हमलों को शुरू होने से पहले ही रोकने वाले अधिक बुनियादी तरीके को अपनाने की तत्काल जरूरत है। मगर सबसे पहले सरकार को यह तय करना होगा कि आंध्रप्रदेश, असम और जम्मू-कश्मीर में उसका प्रस्ताव ठुकरा देने वाले आतंकियों को क्या वह बातचीत के लिए आमंत्रित करना चाहेगी। &lt;strong&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;अगर सरकार सख्त रवैया अपनाए और आतंकियों के आगे घुटने न टेकने के संकेत दे, तो देश के नागरिक पूरी तरह से सरकार का साथ देंगे।&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;सरकार खुद कहती है कि देशभर में आईएसआई के एजेंट सक्रिय हैं। तो फिर इन्हें खोजने और इनकी घुसपैठ रोकने के लिए सरकार खुफिया एजेंसियों को निर्देश क्यों नहीं देती।&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt; विदेश में प्रशिक्षित कोई आतंकी जब भारत या किसी महानगर में आता है, तो उसे रहने की जगह, अधिक से अधिक नुकसान के लिए हमला करने की जगह तक आने-जाने का साधन और संपर्क के लिए मोबाइल फोन के रूप में स्थानीय सहयोग की जरूरत होती है। निश्चित ही उसका कोई स्थानीय मेजबान होता है। खुफिया एजेंसियों को अधिक कुछ करने की जरूरत नहीं है, सिर्फ ऐसे सहयोगियों को खोजकर उन्हें पकड़ना है।&lt;br /&gt;सबसे बड़ी चुनौती यह है कि ऐसे आतंकी संगठनों से मुल्क को किस तरह बचाया जाए जिन्हें किसी की जान लेने में कोई संकोच नहीं है और न ही अपने मकसद के लिए जान दे देने का ही कोई डर है। भारी- भरकम फौज का जमावड़ा, परमाणु संहार, अमेरिका की तरह ‘स्टार वार’ शैली और एंटी मिसाइल कवच जैसी रक्षा की पारंपरिक रणनीतियां तेजी से अनुपयोगी होती जा रही हैं और हमला कर भागने वाले आतंकियों को रोक पाने में अक्षम या कम सक्षम हैं। &lt;strong&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;‘पैटर्न्‍स ऑफ ग्लोबल टैरेरिज्म’ नामक वार्षिक अमेरिकी रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2000 और 2003 के बीच दुनियाभर में की गईं आतंकी घटनाओं में से 75 फीसदी भारत में हुईं। यह मानना सही होगा कि इनमें से कई हमले, खासतौर पर कश्मीर में हुए हमलों के लिए ऐसे संगठन जिम्मेदार हैं जिनका ठिकाना पाकिस्तान में है। और समर्थन हिंदुस्तान के ही नासूर मुस्लिमों द्वारा दिया जा रहा है ताकि वो घटना को अंजाम देकर आसानी से हिंदुस्तान में अपने शुभचिंतक मुस्लिम जेहादी के यहाँ आराम से शरण पाते हैं और अगर उसके घर की तलाशी ली जाये तो पुलिस के ऊपर मुस्लमान को तंग करने का इल्जाम लगाते हैं&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 203 अंतरराष्ट्रीय आतंकी हमले हुए जबकि चीन में एक भी नहीं। यह उस विचार से संबंधित कुछ वास्तविक समस्याएं हैं जिसके मुताबिक-लोकतंत्र सोचने व करने की ऐसी आदतें विकसित कर देगा जिनके चलते आतंकवाद से जुड़ने का इरादा कम हो जाएगा। मगर इनके अलावा तार्किक समस्याएं भी हैं। उदाहरण के लिए आतंकी आमतौर पर हाशिए के ऐसे समूहों का प्रतिनिधित्व करते हैं जिन्हें मुख्यधारा की आबादी से नहीं के बराबर सहयोग हासिल होता है। इस तथ्य की जानकारी के बावजूद वे मानते हैं कि उनकी राह सही है- शायद उन्हें विश्वास होता है कि उनके मकसद को ईश्वर ने अधिकृत कर रखा है।&lt;br /&gt;भारत हमारा वतन है और इसकी रक्षा में योगदान देना हममें से हर एक का कर्तव्य है। किसी बस स्टॉप पर या आसपास, रेलवे स्टेशन या सबवे स्टेशन पर किसी संदिग्ध व्यक्ति या कुछ असामान्य दिखने पर कोई सूचना नहीं देता इसीलिए अधिकांश आतंकी बम विस्फोट होते हैं। अगर आप कुछ देखते हैं, तो कुछ कहिए, इस तरह की आसान प्रतिक्रिया खतरों को काफी कम कर सकती है। ऐसी सूचना देने की पहल करने वाले व्यक्ति को सरकार परेशान न करे। ऐसी सूचना किसी आतंकी घटना को होने से रोक सकती है। आतंकवाद के खिलाफ लड़ने के लिए प्रत्येक नागरिक को कानून लागू करवाने वाली एजेंसियों की आंख और कान की तरह काम करना होगा।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2369261783286222853-3696559023971027159?l=yugkipukar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://yugkipukar.blogspot.com/feeds/3696559023971027159/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2369261783286222853&amp;postID=3696559023971027159' title='2 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2369261783286222853/posts/default/3696559023971027159'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2369261783286222853/posts/default/3696559023971027159'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://yugkipukar.blogspot.com/2008/03/blog-post_9299.html' title='आतंक और हम'/><author><name>Gopal Kumar Azad</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17026889315614855803</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='22' src='http://bp1.blogger.com/_htfHEBB3KMM/R1OnPgC2oEI/AAAAAAAAAJ8/47Cqwt9SLzI/S220/15flag.jpg'/></author><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2369261783286222853.post-1915496600621499834</id><published>2008-03-07T02:33:00.000-08:00</published><updated>2008-03-07T02:53:11.977-08:00</updated><title type='text'>दारुल उलूम का मुस्लिम सम्मेलन की सच्चाई</title><content type='html'>दारुल उलूम का मुस्लिम सम्मेलन खासी चर्चा में है। बेशक पहली दफा किसी बड़े मुस्लिम सम्मेलन में आतंकवाद की निंदा की गई, लेकिन आतंकवाद के आरोप में जेल में बंद &lt;strong&gt;'असंख्य निर्दोष मुस्लिमों पर हो रहे असहनीय अत्याचारों' पर गहरी चिंता भी जताई गई। आल इंडिया एंटी टेररिज्म कांफ्रेंस की दो पृष्ठीय उद्घोषणा में आतंकवाद विरोधी सरकारी कार्रवाइयों को भेदभाव मूलक कहा गया। इसके अनुसार निष्पक्षता, नैतिकता और आध्यात्मिक मूल्यों वाले भारत में वर्तमान हालात बहुत खराब है। सम्मेलन ने आरोप लगाया कि इस वक्त सभी मुसलमान, खासतौर से मदरसा प्रोग्राम से जुड़े लोग दहशत में जी रहे है कि वे किसी भी वक्त गिरफ्तार हो सकते है। सम्मेलन में सरकारी अधिकारियों पर असंख्य निर्दोष मुस्लिमों को जेल में डालने, यातनाएं देने और मदरसों से जुड़े लोगों को शक की निगाह से देखने का आरोप भी जड़ा गया। सम्मेलन ने भारत की विदेश नीति और आंतरिक नीति पर पश्चिम की इस्लाम विरोधी ताकतों का प्रभाव बताया। देश दुनिया के मुसलमानों से हमेशा की तरह एकजुट रहने की अपील की गई।&lt;/strong&gt; ऐलान हुआ कि सभी सूबों में भी ऐसे ही जलसे होंगे। सरकार के कथित मुस्लिम विरोधी नजरिए के संदर्भ में अवाम को बताया जाएगा।&lt;br /&gt;सम्मेलन की उद्घोषणा दरअसल आतंकवाद से जारी संघर्ष की हवा निकालने वाली है। &lt;strong&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;जाहिर है कि जलसे का मकसद दीगर था। आतंकवाद की निंदा की वजहें भी दूसरी थीं। निगाहे मुस्लिम एकजुटता पर थीं,&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt; निशाना आतंकवाद से लड़ रहा राष्ट्र था। इराक, अफगानिस्तान, फलस्तीन, बोस्निया और दक्षिण अमेरिकी देशों के मुस्लिम उत्पीड़न की चर्चा की गई। &lt;strong&gt;जेहाद के नाम पर मारे गए हजारों भारतीय निर्दोषों, श्रृद्धा केंद्रों, कचहरी और मेला बाजारों में मारे गए नागरिकों के बारे में शोक संवेदना का एक लफ्ज भी इस्तेमाल नहीं हुआ। आतंकवाद से लड़ते हुए मारे गए सैकड़ों पुलिस जवानों/ सैनिकों की तारीफ के बजाय पुलिस व्यवस्था को ही भेदभाव मूलक बता दिया गया।&lt;/strong&gt; &lt;strong&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;आतंकवाद के आरोपों में बंद 'असंख्य निर्दोष मुस्लिम' वाक्य का इस्तेमाल भारतीय राष्ट्र-राज्य की घोर निंदा है।&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt; सम्मेलन की राय में यहां असंख्य मुसलमानों को बेवजह फंसाया जा रहा है। उन पर लगे सारे आरोप मनगढ़ंत है। सम्मेलन के मुताबिक देश के असंख्य मुसलमानों की जिंदगी तबाह है। वे प्रतिपल दहशत में हैं। उन्हे यहां सामान्य नागरिक अधिकार भी प्राप्त नहीं है। &lt;strong&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;आतंकवाद विरोधी सरकारी कार्रवाई को मुस्लिम विरोधी बताने का काम अध्यक्षीय भाषण में भी हुआ।&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt; सम्मेलन के अध्यक्ष मुहम्मद मरगूबउर्रहान ने फरमाया, ''आतंकवादी कार्रवाई के सिलसिले में दोषी या कम से कम संदिग्ध करार देने के लिए न तो किसी विचार-विमर्श की आवश्यकता महसूस की जाती है, न किसी सावधानी से काम लिया जाता है और न तथ्य और प्रमाण इकट्ठा करने का कोई गंभीर प्रयास किया जाता है। उनको दोषी बताने के लिए केवल इतना ही आवश्यक समझा जाता है कि वे मुसलमान है।''&lt;br /&gt;मौलाना ने आतंकवाद से निपटने में खास सतर्कता की जरूरत भी बताई। उन्होंने कहा कि इतिहास में अक्सर ऐसा हुआ है कि सरकार के दोषी हीरो कहलाए है-खासतौर से वे जिनके कट्टरवादी व्यवहार के कारण सरकार की ओर से अन्याय और अत्याचार हो। इतिहास के इस तथ्य पर नजर रखते हुए ऐसा काम न किया जाए जिसकी प्रतिक्रिया आतंकवाद के रूप में हो। &lt;strong&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;यानी आतंकवाद के विरुद्ध नरमी से पेश आना चाहिए, अन्यथा इसकी प्रतिक्रिया में आतंकवाद और भड़केगा। केंद्र सरकार की नरम नीति उलेमा की हिदायत से मिलती-जुलती है।&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt; बावजूद इसके केंद्र पर असंख्य निर्दोष मुस्लिमों को जेल में बंद रखने के आरोप भी लगाए। दरअसल, मजहब और पंथ का उदय देश, काल और परिस्थिति में ही होता है। वे प्रत्येक देश, समय और परिस्थिति में उपयोगी नहीं होते। मजहब-पंथ का काम मानवीय सद्गुणों का विकास ही है। दर्शन और विज्ञान यही काम 'सत्य दिखाकर' करते है। पंथ और मजहब यही काम अकीदत और आस्था के जरिए करते हैं। मौलाना ने इस्लाम की तारीफ की। ठीक किया। यह भी कहा कि इस्लाम निष्पक्षता, न्याय और दया की सीख देता है। &lt;strong&gt;उन्होंने कुरान के हवाले से कहा कि इस्लाम में गवाही देते समय परिवार और संबंधी का मोह भी छोड़ने की हिदायत है। वह भूल गए कि कुरान की इसी आयत के बाद कहा गया है, ''जो ईमानवालों/मुसलमानों को छोड़कर इनकार करने वालों को अपना दोस्त बनाते हैं, क्या उन्हे प्रतिष्ठा की तलाश है।'' आगे हिदायत दी गई, ''ऐ ईमानवालो! इनकार करने वालों को अपना मित्र न बनाओ।'' यह भी कहा गया कि जो इस्लाम के अलावा कोई और दीन तलब करेगा उसकी ओर से कुछ भी स्वीकार न होगा और अंतत: वह घाटे में रहेगा।&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;सह-अस्तित्व और समझौते की बातें भी अध्यक्षीय भाषण में कही गईं, लेकिन कुरान में साफ हिदायत है, ''तुम अपने दीन के अनुयायियों के अलावा किसी पर भी विश्वास न करो।''&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt; इस्लामी विचारधारा दुनिया के सभी मनुष्यों को दो हिस्सों में बांटती है। पहला, ईमानवाले यानी मुसलमान और दूसरे वे जिन्होंने इनकार किया। &lt;strong&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;कुरान में बताया गया कि इनकार करने वालों से कह दो कि वे बाज आएं तो क्षमा है। यदि वे फिर भी वही करेगे तो जैसा पूर्ववर्ती लोगों के लिए किया गया, वही रीति अपनाई जाएगी। उनसे युद्ध करो, यहां तक कि फितना भी बाकी न रहे और दीन पूरा का पूरा अल्लाह के लिए हो जाए।&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt; सम्मेलन ने जिन फलस्तीन, इराक आदि का जिक्र किया है वहां इस्लाम के पहले क्या था? भारत नाजुक दौर में है। मौलाना ने बजा फरमाया कि &lt;strong&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;आतंकवाद हमारे देश की मूल समस्या नहीं है, लेकिन उन्होंने गलत कहा कि यह साम्राज्यवादी देशों द्वारा फैलाया गया। प्राचीन अरब और अरबी सभ्यता पर पहला हमला इस्लामी विस्तारवाद ने ही किया। ऋग्वेद की निकटतम जेंदअवेस्ता वाली महान ईरानी सभ्यता भी इस्लामी हमले में तबाह हुई। यूरोप में स्पेन तक हमला हुआ। इस्लामी विस्तारवाद को भारत और स्पेन में ही टक्कर मिली, जबकि सीरिया, मिस्त्र, फलस्तीन और ईरान तबाह हो गए। मुहम्मद बिन कासिम से लेकर तराई (1192 ई.) की लड़ाई तक वे यहां अपनी स्थायी हुकूमत नहीं बना पाए।&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;इस्लामी गलबे के खिलाफ पृथ्वीराज चौहान, महाराणा प्रताप, गुरु तेग बहादुर, शिवाजी और गुरु गोविंद सिंह सहित हजारों लोग न लड़े होते तो भारत भी फलस्तीन, मिस्त्र, यूनान, ईरान और मध्य एशिया के तमाम इलाकों की तरह प्राचीन संस्कृति और इतिहास से शून्य होता?&lt;/strong&gt; मुस्लिम सम्मेलन ने विश्वव्यापी इस्लामी विस्तारवाद की चर्चा नहीं की। &lt;strong&gt;पाकिस्तान द्वारा मुसलसल भारत भेजे जा रहे आतंकवादी गिरोहों पर भी कोई बात नहीं हुई। पाक आतंकी डेली पैसेंजरी नहीं करते। वे भारत के ही लोगों द्वारा सहायता पाते हैं। सम्मेलन ने भारत के ऐसे राष्ट्रद्रोही तत्वों की आलोचना नहीं की&lt;/strong&gt;। बावजूद इसके लोग खुश हैं कि सम्मेलन ने आतंकवाद के विरुद्ध बोलकर भारत पर भारी कृपा की है। &lt;strong&gt;विद्वान प्रधानमंत्री बुरे फंसे। वे मुस्लिम सर्वोपरिता और तुष्टीकरण का संगीत बजा रहे है। ये है कि तमाम नाजायज कोशिशों के बावजूद रुष्ट है, तुष्ट होने का नाम भी नहीं लेते और 'असंख्य निर्दोष मुस्लिमों' को जेल में यातना देने का आरोप भी लगा रहे है।&lt;/strong&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2369261783286222853-1915496600621499834?l=yugkipukar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://yugkipukar.blogspot.com/feeds/1915496600621499834/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2369261783286222853&amp;postID=1915496600621499834' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2369261783286222853/posts/default/1915496600621499834'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2369261783286222853/posts/default/1915496600621499834'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://yugkipukar.blogspot.com/2008/03/blog-post_07.html' title='दारुल उलूम का मुस्लिम सम्मेलन की सच्चाई'/><author><name>Gopal Kumar Azad</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17026889315614855803</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='22' src='http://bp1.blogger.com/_htfHEBB3KMM/R1OnPgC2oEI/AAAAAAAAAJ8/47Cqwt9SLzI/S220/15flag.jpg'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2369261783286222853.post-828221059260702749</id><published>2008-03-07T02:26:00.000-08:00</published><updated>2008-03-07T02:32:08.252-08:00</updated><title type='text'>पाकिस्तान राष्ट्र नहीं है।</title><content type='html'>&lt;p&gt;पाकिस्तान राष्ट्र नहीं है। यह कट्टरपंथी जेहादी और विश्व आतंकवाद की प्रापर्टी है। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी का मालिकाना मसला वसीयत से सुलट गया। 'प्रापर्टी पाकिस्तान' को लेकर मुसलसल जंग है। यहां कोई संप्रभु संवैधानिक सत्ता भी नहीं है। &lt;strong&gt;सिर्फ 60 साल की उम्र के इस मुल्क ने 4 संविधान बनाए। 32 साल तक सेना का राज रहा। इसके अलावा भी 10 साल तक सेना ने ही परोक्ष हुकूमत की, सिर्फ 18 साल ही अप्रत्यक्ष लोकतंत्र रहा। अभी भी सेना का ही राज है।&lt;/strong&gt; बेनजीर भुट्टो की हत्या कोई अस्वाभाविक घटना नहीं है। पांच माह पहले ही लाल मस्जिद में कार्रवाई हुई थी। इसके पहले न्यायपालिका का सरेआम कत्ल हुआ। पाकिस्तान जेहादी आतंकवाद की विश्वविख्यात यूनिवर्सिटी है। &lt;strong&gt;{येही है इसलाम और इस्लामी सल्तनत }&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#cc0000;"&gt;रक्त पिपासु जेहादी आतंकियों पर आईएसआई और सेना का कवच है। आईएसआई और जेहादी आतंकियों के साथ कट्टरपंथी मौलानाओं की दुआएं है। भारत सबका दुश्मन नंबर एक है, लेकिन भारतीय हुक्मरान इससे बेखबर है।&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt; पाकिस्तान के जन्म का आधार मजहबी अलगाववाद था। राष्ट्र मजहब से नहीं बनते। राष्ट्र निर्माण का आधार संस्कृति होती है। मजहबी अलगाववादियों ने अपनी प्राचीन सांस्कृतिक विरासत को नहीं स्वीकारा। नई संस्कृति का निर्माण वे कर नहीं पाए। उन्होंने प्राचीन भारतीय इतिहास को भी खारिज किया। नया झूठा इतिहास लिखा गया। &lt;strong&gt;नई पीढ़ी ने भारत को शत्रु पढ़ा। मदरसे जेहाद सिखाने का केंद्र बने। मदरसा तालीम का विरोध बेनजीर ने किया था। अमेरिकी दबाव में मुशर्रफ ने भी किया था, लेकिन जहर मदरसों के आगे भी था। प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो के सलाहकार रहे इतिहासकार केके अजीज ने 'द पाकिस्तानी हिस्टोरियन' नामक शोध में पाकिस्तानी पाठ्य पुस्तकों के जहर की शिनाख्त की है। अजीज की किताब के मुताबिक कक्षा 2 की पाठ्य पुस्तक में उल्लेख है-''पं. नेहरू ने कहा कि आजादी के बाद हिंदुस्तान में हिंदुओं की सरकार होगी। कायदे आजम जिन्ना ने कहा कि यहां मुसलमान भी रहते हैं। मुसलमानों को अलग हुकूमत चाहिए।'' हिंदू विरोध के ही नजरिए से तैयार कक्षा 3 की पाठ्य पुस्तक में लिखा है, ''राजा जयपाल ने महमूद गजनवी के मुल्क में घुसने की कोशिश की। महमूद ने राजा को हरा दिया, लाहौर को हथिया लिया और इस्लामी हुकूमत कायम की।'' सच बात यह है कि पंजाब कभी इस्लाम राज्य नहीं था। महमूद आक्रांता और लुटेरा था। पाकिस्तान की नई पीढ़ी उसे हीरो पढ़ रही है। कक्षा 4 की किताब के अनुसार ''जब अंग्रेज ने इलाके पर हमला किया तो मुसलमानों के खिलाफ गैर मुसलमानों ने उनका साथ दिया। अंग्रेजों ने सारा मुल्क फतेह किया।'' कक्षा 5 की किताब में उल्लेख है-''मुस्लिम और हिंदू सभ्यताओं में विवाद हुआ। आजाद मुल्क (पाकिस्तान) की जरूरत हुई। पाकिस्तान का सिद्धांत आया। भारत (हिंदुओं) की दुष्टता थी। सर सैय्यद अहमद खां ने ऐलान किया कि मुसलमानों को एक अलग राष्ट्र के रूप में संगठित करना चाहिए।'' किताबों में 1965 के भारत-पाक युद्ध में पाकिस्तान को विजयी बताया गया। जेहाद और इसी किस्म के इतिहास को पढ़कर औसत पाकिस्तानी नौजवान आतंकी बनता है। कट्टरपंथी 'मौत के बाद जन्नत' की गारंटी देते है।&lt;/strong&gt; कुछ बरस पहले 'जंग' ने लाहौर के करीब स्थित मरकज अलदावत अलअरशद नाम की इस्लामी यूनिवर्सिटी के मुख्य कर्ता-धर्ता और लश्करे तैयबा के प्रमुख प्रो. हाफिज सईद का इंटरव्यू छापा था। उसने भारतीय मुसलमानों से भारत के खिलाफ जेहाद अपील की थी-इसलिए कि हिंदुओं ने मुसलमानों का जीना हराम कर दिया है। 'जंग' ने पूछा कि मुसलमान निकलकर कहां जाएं? क्या पाकिस्तान उन्हे संभाल लेगा? सईद ने जवाब दिया, ''इसका जवाब सरकार दे। &lt;strong&gt;&lt;span style="color:#ff6666;"&gt;1948, 1965 और 1971 में हमने संधि की, गलती की। यह न करते तो दिल्ली और कलकत्ता पर हमारा कब्जा होता।''&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt; सईद जैसे लोग जो कुछ बोलते है वही वहां के बच्चों को पढ़ाया जाता है। सईद ने 'जंग' से कहा कि &lt;strong&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;हमारे पैगंबर के मुताबिक अधिक बच्चे देने वाली बीबी से निकाह करना चाहिए। बड़ी आबादी वाली कौम ही दूसरों पर छा जाती है। भारत के तमाम हिस्सों में बढ़ी मुस्लिम आबादी से जनसंख्या संतुलन गड़बड़ाया है। तिस पर भी 11वीं योजना के मसौदे में मजहब आधारित 15 सूत्रीय तुष्टीकरण प्रोग्राम नत्थी किया गया।&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt; डा.अंबेडकर भारत की हिंदू-मुस्लिम साझा राष्ट्रीयता को असंभव मानते थे। उन्होंने तीखे सवाल उठाए, ''क्या भारत के राजनीतिक विकास के लिए हिंदू, मुस्लिम एकता जरूरी है? यदि तुष्टीकरण से तो कौन सी नई सुविधाएं उन्हें दी जाएं? अगर समझौते से तो शर्तें क्या होंगी?&lt;/p&gt;&lt;p&gt;'' &lt;strong&gt;सभी पाकिस्तानी हुक्मरान भारत विरोधी थे। भुट्टो भी, बेनजीर भी, नवाज शरीफ भी और परवेज मुशर्रफ भी। पाकिस्तान के पास परमाणु बम है। भारत विरोधी जेहादी जज्बा है।&lt;/strong&gt; फिलहाल वहां गृहयुद्ध के हाल हैं, लेकिन विरोधी पड़ोसी के घर गृहयुद्ध का भी असर पड़ोस पर पड़ता है। &lt;strong&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;पाकिस्तान का भूगोल भारत-पाक सीमाओं पर जरूर खत्म होता है, लेकिन पाकिस्तान एक विचारधारा भी है। पाकिस्तान जैसा उग्र कट्टरपंथ भारत में भी है। इसीलिए आतंकवादी अपने इसी देश में भी मदद पाते हैं।&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt; पाकिस्तान की आग का धुंआ भारत में भी है। राष्ट्र इसी धुंए से बेचैन है। पशु-पक्षी भी पड़ोसी धमक सुनकर चौकन्ने होते हैं। अपने ऊपर आती है तो पलटवार भी करते हैं, लेकिन भारतीय राजनीतिज्ञ सिर्फ सेंसेक्स उछाल देखकर ही उछल रहे हैं। &lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2369261783286222853-828221059260702749?l=yugkipukar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://yugkipukar.blogspot.com/feeds/828221059260702749/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2369261783286222853&amp;postID=828221059260702749' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2369261783286222853/posts/default/828221059260702749'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2369261783286222853/posts/default/828221059260702749'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://yugkipukar.blogspot.com/2008/03/blog-post.html' title='पाकिस्तान राष्ट्र नहीं है।'/><author><name>Gopal Kumar Azad</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17026889315614855803</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='22' src='http://bp1.blogger.com/_htfHEBB3KMM/R1OnPgC2oEI/AAAAAAAAAJ8/47Cqwt9SLzI/S220/15flag.jpg'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2369261783286222853.post-3879063821252564667</id><published>2008-02-26T04:01:00.000-08:00</published><updated>2008-02-26T04:13:03.135-08:00</updated><title type='text'>मुस्लिम जेहाद और भारतीय राजनीती</title><content type='html'>&lt;span style="color:#cc0000;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#cc0000;"&gt;&lt;strong&gt;भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एमके नारायणन के ताजा वक्तव्य ने सबको चौंकाया है। नारायणन ने बीते सप्ताह कहा कि अलकायदा का एक दल भारत आया और कुछ समय रुका, लेकिन उसका मंतव्य पूरा नहीं हुआ। वह जिस योजना पर काम कर रहा था वह असफल हो गई। उन्होंने आगे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के सुर में सुर मिलाया कि भारत का कोई मुसलमान अलकायदा का सदस्य नहीं है।&lt;/strong&gt; इस बयान से कई महत्वपूर्ण सवाल उठे है। नारायण सच बोलने के लिए प्रसिद्ध थे, लेकिन इस बार उनकी बात में विचित्र विरोधाभास है। &lt;strong&gt;अलकायदा की टीम यहां रुकी, लेकिन यहां उसके किसी मुसलमान से संबंध भी नहीं हैं। संबंध नहीं तो रुके कैसे? आए कैसे? क्या किसी हिंदू, सिख या ईसाई परिवार ने उसकी आवभगत की?&lt;/strong&gt; मसला गंभीर है। प्रधानमंत्री को अलकायदा भ्रमण के प्रश्न पर स्पष्टीकरण देना चाहिए।&lt;br /&gt;   अलकायदा विश्व कुख्यात आतंकी संगठन है। इसी तरह के ढेर सारे संगठन जेहाद के नाम पर युद्धरत हैं। जेहादी आतंक का भूमंडलीकरण हो चुका है। &lt;strong&gt;सारी दुनिया को कट्टरपंथी इस्लामी आस्था के लिए मजबूर करने वाले जेहादी युद्ध विश्वव्यापी है और इससे संपूर्ण मानवता आतंकित है। दक्षिण पूर्व में आस्ट्रेलिया इससे पीड़ित है। फिलीपींस, थाईलैंड इसके प्रभाव क्षेत्र हैं। रूस, मिस्त्र, युगोस्लाविया, स्पेन पीड़ित है। अमेरिका खुलकर मैदान में है। पिछले वर्ष अमेरिकी राष्ट्रपति जार्ज बुश ने जेहादी आतंकवाद को 'इस्लामी फासीवाद' कहा था। अमेरिका ने अफगानिस्तान पर की गई सैन्य कार्रवाई को 21वीं सदीं का प्रथम विश्व युद्ध बताया था। अमेरिकी वक्तव्य के अनुसार 'इस्लामी फासीवाद' सारी दुनिया का शत्रु है।&lt;/strong&gt; इससे सभी राष्ट्रों का संघर्ष है। अमेरिका ने हाल ही में पाकिस्तान द्वारा आतंकवाद के विरुद्ध की गई ठोस कार्रवाई को आर्थिक सहायता की नई शर्त बताया है। पाकिस्तान आतंकवाद का प्रशिक्षण केंद्र है। &lt;strong&gt;अमेरिका पाकिस्तानी 'इस्लामी फासीवाद' से परिचित था। इसके बावजूद उसने रूस के विरुद्ध तालिबान को सहायता दी। व‌र्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हुए हमले से अमेरिका की आंखें खुलीं।&lt;/strong&gt; &lt;strong&gt;पाकिस्तान और उसके हुक्मरान जम्मू-कश्मीर के आतंकवादियों को स्वाधीनता संग्राम सेनानी बता रहे थे, तब लाल मस्जिद सहित पाकिस्तान के कोने-कोने में बम फोड़ रहे आतंकी भी स्वाधीनता सेनानी ही होने चाहिए? &lt;/strong&gt;जेहादियों ने पहले अपने संरक्षक अमेरिका पर हल्ला बोला और अब अपने पोषक और प्रशिक्षक पाकिस्तान पर। भारत बहुत लंबे अर्से से जेहादी आतंक का निशाना है। &lt;strong&gt;पिछले कुछ वर्षों में अयोध्या, वाराणसी के संकटमोचन मंदिर, अक्षरधाम, रघुनाथ मंदिर और संसद पर जेहादी हमला हो चुका है। मुंबई में बीते बरस ही चलती ट्रेनों में 187 निर्दोष मारे गए। लगभग एक हजार लोग घायल हुए। दिल्ली की दीपावली रक्तरंजित हुई। जम्मू-कश्मीर में धारावाहिक हत्याएं जारी है। उत्तर प्रदेश की राजधानी और पड़ोसी जिले उन्नाव में आरडीएक्स मिला। राज्य विधानसभा में सरकार ने 34 जिलों को आतंकी गतिविधियों से युक्त बताया। पूरा भारत आतंकवाद की गिरफ्त में है। कुछ समय पहले अमेरिकी खुफिया विभाग ने दिल्ली और मुंबई को अलकायदा के निशाने पर बताया था, लेकिन भारत के सत्ताधीश मजे में हैं।&lt;/strong&gt; &lt;strong&gt;प्रधानमंत्री और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की सफाई भी सांप्रदायिक है। वे गर्वपूर्वक यह भी कह सकते थे कि भारत का कोई भी नागरिक अलकायदा का सदस्य नहीं है, लेकिन उन्होंने सिर्फ मुसलमानों पर सफाई दी।&lt;/strong&gt; सत्ता के शिखर से आए ऐसे बयानों का आखिरकार मतलब क्या है? &lt;strong&gt;आतंकवादी मानवता का शत्रु होता है। उसका कोई मजहब नहीं होता, लेकिन आतंकवाद से लड़ने के लिए अधिनियमित कानून पोटा हटाने का कारण मजहबी था।&lt;/strong&gt; भारत इतिहास से सबक नहीं लेता इसीलिए अदने से पड़ोसी मुल्क द्वारा प्रायोजित आतंकवाद के सामने भी पिट जाता है। &lt;strong&gt;भारत के सत्ताधीश विश्वव्यापी जेहादी आतंकवाद के फलसफे पर गौर नहीं करते। वे उनकी हिंसक विचारधारा, युद्ध क्षमता और रणनीति को भी नजरअंदाज करते हैं। वे राष्ट्रीय सुरक्षा और एकता पर विचार नहीं करते। वे जेहादी आतंकवाद के बजाए मुस्लिम वोट की दहशत में थर-थर कांपने के आदी हैं।&lt;/strong&gt; दुनिया दो भागों में विभाजित है। एक तरफ जेहादी आतंकी हैं और दूसरी तरफ समूची मानवता। जेहादी आतंकवाद तीसरे विश्वयुद्ध की शक्ल ले चुका है। तीसरा विश्वयुद्ध अनोखा है। इस युद्ध का ऐलान राष्ट्र नहींकरते। इसमें राष्ट्र और राज्यों की सेनाएं पक्ष प्रतिपक्ष नहीं हैं। दुनिया की समूची सैन्य शक्ति, राष्ट्र राज्य व्यवस्थाएं, अत्याधुनिक परमाणु हथियार और मिसाइलें भी जेहादी आतंकवाद के सामने मिमिया रही हैं।&lt;br /&gt;   &lt;strong&gt;जेहाद एक बेबाक युद्ध विचारधारा है। निर्दोषों की हत्या, हिंसा, लूटपाट इसमें अपराध नहीं साधन होते हैं&lt;/strong&gt;। यह दुनिया को दो हिस्सों में बांटता है। &lt;strong&gt;जमात-ए-इस्लामी के संस्थापक सैय्यद अबुल मौदूही के मुताबिक कुरान सारी दुनिया में सिर्फ दो पार्टियां देखता है। जमीयत ए उलेमा हिंद जैसे संगठनों के अनुसार जेहाद का मकसद इस्लामी हुकूमत और बाकी दीगर धर्मों पर इस्लाम का गलबा कायम करना है। बोस्निया, कोसोवो, काकेशश, चेचन्या, इंडोनेशिया, फिलीपीन्स, उत्तरी अफ्रीका और इजरायल जैसे देशों में मुसलमानों और गैरमुसलमानों के बीच ऐसे संघर्षों की अनेक गाथाएं हैं। भारत मोहम्मद बिनकासिम के समय से लेकर गौरी, गजनी और औरंगजेब जैसे खलनायकों का निशाना बना,&lt;/strong&gt; लेकिन नए किस्म के जेहादी युद्ध में दुश्मन की शिनाख्त आसान नहीं होती। यह युद्ध सीमा पर नहीं लड़ा जाता। सेना और पुलिस कानून के बंधन में रह कर सुरक्षा करते हैं जबकि आतंकी दनदनाते हुए किसी को भी मार डालते हैं। वे आत्मघाती मानव बम बना रहे हैं। उन्हें मारे जाने पर जन्नत की गारंटी है। आश्चर्य है कि भारत इस युद्ध से आंखें चुरा रहा है।&lt;/span&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2369261783286222853-3879063821252564667?l=yugkipukar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://yugkipukar.blogspot.com/feeds/3879063821252564667/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2369261783286222853&amp;postID=3879063821252564667' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2369261783286222853/posts/default/3879063821252564667'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2369261783286222853/posts/default/3879063821252564667'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://yugkipukar.blogspot.com/2008/02/blog-post_5164.html' title='मुस्लिम जेहाद और भारतीय राजनीती'/><author><name>Gopal Kumar Azad</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17026889315614855803</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='22' src='http://bp1.blogger.com/_htfHEBB3KMM/R1OnPgC2oEI/AAAAAAAAAJ8/47Cqwt9SLzI/S220/15flag.jpg'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2369261783286222853.post-3184334616504047582</id><published>2008-02-26T03:42:00.000-08:00</published><updated>2008-02-26T03:44:51.103-08:00</updated><title type='text'>गांधी हत्या : उचित या अनुचित ?</title><content type='html'>&lt;span style="color:#ff6666;"&gt;मेरी दृष्टि में महात्मा गांधी जी जैसे महान पुरुष की सैद्धान्तिक मौत तो भारत के विभाजन के समय ही हो चुकी थी। अतः शारीरिक रूप से गोली मार कर हुतात्मा नाथूराम गोडसे ने उन्हें अमरता का पर्याय ही बनाया। महापुरुषों के जीवन में उनके सिद्धान्तों और आदर्शों की मौत ही वास्तव में मौत होती है। &lt;strong&gt;14 अगस्त, 1946 में मुस्लिम लीग के गुण्डों को आह्वान और कलकत्ता में 6,000 हिन्दुओं का कल्तेआम पर गांधी की चुप्पी। जब लाखों माताओं, बहनों, के शील हरण तथा रक्तपात और विश्व की सबसे बड़ी त्रासदी द्विराष्ट्रवाद के सिद्धान्त के आधार पर पाकिस्तान का निर्माण हुआ, उस समय महात्मा गांधी के लिए हिन्दुस्तान की जनता में जबर्दस्त आक्रोश फैल चुका था। रही-सही कसर पाकिस्तान को 55 करोड़ रुपये देने के लिए महात्मा गांधी के अनशन ने पूरी कर दी। वास्तव में सारा देश महात्मा गांधी का उस समय घोर विरोध कर रहा था और भगवान से उनकी मृत्यु की आराधना कर रहा था। लोगों की जुबान पर बूढ़ा सठिया गया है-भगवान् इसको जल्दी उठा लें, जैसे शब्द थे। कई सभाओं में तो उन पर अण्डे, प्याज और टमाटर आदि भी फेंके गये तथा उनका तिरस्कार एवं बहिष्कार लोगों ने अपनी-अपनी तरह करना शुरू कर दिया था।&lt;/strong&gt; हिन्दुस्तान की जनता के दिलों में महात्मा गांधी के झूठे अहिंसावाद और नेतृत्व के प्रति घृणा पैदा हो चुकी थी। महात्मा गांधी प्रायः कहते थे-हिन्दू-मुस्लिम एकता के बिना स्वतंत्रता प्राप्ति का कोई महत्व नहीं है। एक बार तो उन्हें यह भी कहना पड़ा कि हिन्दू कायर और मुस्लिम पंगेबाज हैं। बहुत कम लोग जानते हैं कि मुस्लिमों को प्रसन्न करने के लिए रामायण में बेगम सीता, बादशाह राम और मौलवी वशिष्ठ जैसे नामों का भी सुझाव दिया गया। इसी अवधारणा से मुस्लिम तुष्टिकरण का जन्म भी हुआ जिसके मूल से ही पाकिस्तान का निर्माण हुआ है। &lt;strong&gt;1946-47 में प्रायः प्रत्येक की जुबान पर एक ही बात थी कि महात्मा गांधी मुसलमानों के सामने घुटने टेक चुके हैं। महात्मा गांधी का कथन-‘‘उनकी लाश पर पाकिस्तान बनेगा’’, कोरा झूठ साबित हुआ। यह सर्वविदित है कि खण्डित भारत का निर्माण महात्मा गांधी की लाश पर नहीं, अपितु 25 लाख हिन्दू सिखों की लाशों तथा असंख्य माताओं और बहनों के शीलहरण पर हुआ।&lt;/strong&gt; स्मरण रहे हमारे 62 जिले और 298 धर्मस्थल पाक-बांग्लादेश की इस्लामिक कैद में हैं और उन्हें मुक्त कराना हमारा राष्ट्रीय कर्तव्य है। मेरा विश्वास है कि जब तक पाक-बांग्लादेश इस धरती पर रहेगा-न तो जेहादी इस्लामिक आतंकवाद समाप्त होगा और न ही हिन्दुस्तान में शान्ति। अतः ‘‘अखण्ड भारत’’ ही एकमात्र हल है। &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#ff6666;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#ff6666;"&gt;VANDEMATRAM&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#ff6666;"&gt;जयहिन्द !&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#ff6666;"&gt;125 करोड़ भारतीयों में है कोई माई का लाल ???????????????? &lt;/span&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2369261783286222853-3184334616504047582?l=yugkipukar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://yugkipukar.blogspot.com/feeds/3184334616504047582/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2369261783286222853&amp;postID=3184334616504047582' title='2 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2369261783286222853/posts/default/3184334616504047582'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2369261783286222853/posts/default/3184334616504047582'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://yugkipukar.blogspot.com/2008/02/blog-post_26.html' title='गांधी हत्या : उचित या अनुचित ?'/><author><name>Gopal Kumar Azad</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17026889315614855803</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='22' src='http://bp1.blogger.com/_htfHEBB3KMM/R1OnPgC2oEI/AAAAAAAAAJ8/47Cqwt9SLzI/S220/15flag.jpg'/></author><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2369261783286222853.post-7811540203176720133</id><published>2008-02-07T07:53:00.000-08:00</published><updated>2008-02-07T08:04:58.830-08:00</updated><title type='text'>कम्युनिस्टों के ऐतिहासिक अपराध</title><content type='html'>&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;दुनिया भर के प्रमुख विचारकों ने भारतीय जीवन-दर्शन एवं जीवन-मूल्य, धर्म, साहित्य, संस्कृति एवं आध्यात्मिकता को मनुष्य के उत्कर्ष के लिए सर्वोत्कृष्ट बताया है, लेकिन इसे भारत का दुर्भाग्य कहेंगे कि यहां की माटी पर मुट्ठी भर लोग ऐसे हैं, जो पाश्चात्य विचारधारा का अनुगामी बनते हुए यहां की परंपरा और प्रतीकों का जमकर माखौल उड़ाने में अपने को धन्य समझते है। इस विचारधारा के अनुयायी 'कम्युनिस्ट' कहलाते है। विदेशी चंदे पर पलने वाले और कांग्रेस की जूठन पर अपनी विचारधारा को पोषित करने वाले 'कम्युनिस्टों' की कारस्तानी भारत के लिए चिंता का विषय है। हमारे राष्ट्रीय नायकों ने बहुत पहले कम्युनिस्टों की विचारधारा के प्रति चिंता प्रकट की थी और देशवासियों को सावधान किया था। आज उनकी बात सच साबित होती दिखाई दे रही है। सच में, माक्र्सवाद की सड़ांध से भारत प्रदूषित हो रहा है। आइए, इसे सदा के लिए भारत की माटी में दफन कर दें। कम्युनिस्टों के ऐतिहासिक अपराधों की लम्बी दास्तां है- &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;• सोवियत संघ और चीन को अपना पितृभूमि और पुण्यभूमि मानने की मानसिकता उन्हें कभी भारत को अपना न बना सकी। &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;• कम्युनिस्टों ने 1942 के 'भारत-छोड़ो आंदोलन के समय अंग्रेजों का साथ देते हुए देशवासियों के साथ विश्वासघात किया। &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;• 1962 में चीन के भारत पर आक्रमण के समय चीन की तरफदारी की। वे शीघ्र ही चीनी कम्युनिस्टों के स्वागत के लिए कलकत्ता में लाल सलाम देने को आतुर हो गए। चीन को उन्होंने हमलावर घोषित न किया तथा इसे सीमा विवाद कहकर टालने का प्रयास किया। चीन का चेयरमैन-हमारा चेयरमैन का नारा लगाया।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;• इतना ही नहीं, श्रीमती इंदिरा गांधी ने अपने शासन को बनाए रखने के लिए 25 जून, 1975 को देश में आपातकाल की घोषणा कर दी और अपने विरोधियों को कुचलने के पूरे प्रयास किए तथा झूठे आरोप लगातार अनेक राष्ट्रभक्तों को जेल में डाल दिया। उस समय भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी श्रीमती इंदिरा गांधी की पिछलग्गू बन गई। डांगे ने आपातकाल का समर्थन किया तथा सोवियत संघ ने आपातकाल को 'अवसर तथा समय अनुकूल' बताया। &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;• भारत के विभाजन के लिए कम्युनिस्टों ने मुस्लिम लीग का समर्थन किया। &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;• कम्युनिस्टों ने सुभाषचन्द्र बोस को 'तोजो का कुत्ता', जवाहर लाल नेहरू को 'साम्राज्यवाद का दौड़ता कुत्ता' तथा सरदार पटेल को 'फासिस्ट' कहकर गालियां दी।ये कुछ बानगी भर है। आगे हम और विस्तार से बताएंगे। &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;भारतीय कम्युनिस्ट भारत में वर्ग-संघर्ष पैदा करने में विफल रहे, परंतु उन्होंने गांधीजी को एक वर्ग-विशेष का पक्षधर, अर्थात् पुजीपतियों का समर्थक बताने में एड़ी-चोटी का जोड़ लगा दिया। उन्हें कभी छोटे बुर्जुआ के संकीर्ण विचारोंवाला, धनवान वर्ग के हित का संरक्षण करनेवाला व्यक्ति तथा जमींदार वर्ग का दर्शन देने वाला आदि अनेक गालियां दी। इतना ही नहीं, गांधीजी को 'क्रांति-विरोधी तथा ब्रिटीश उपनिवेशवाद का रक्षक' बतलाया। 1928 से 1956 तक सोवियत इन्साइक्लोपीडिया में उनका चित्र वीभत्स ढंग से रखता रहा। परंतु गांधीजी वर्ग-संषर्ष तथा अलगाव के इन कम्युनिस्ट हथकंडों से दुखी अवश्य हुए। साम्यवाद (Communism) पर महात्मा गांधी के विचार-महात्मा गांधी ने आजादी के पश्चात् अपनी मृत्यु से तीन मास पूर्व (25 अक्टूबर, 1947) को कहा- 'कम्युनिस्ट समझते है कि उनका सबसे बड़ा कत्तव्य, सबसे बड़ी सेवा- मनमुटाव पैदा करना, असंतोष को जन्म देना और हड़ताल कराना है। वे यह नहीं देखते कि यह असंतोष, ये हड़तालें अंत में किसे हानि पहुंचाएगी। अधूरा ज्ञान सबसे बड़ी बुराइयों में से एक है। कुछ ज्ञान और निर्देश रूस से प्राप्त करते है। हमारे कम्युनिस्ट इसी दयनीय हालत में जान पड़ते है। मैं इसे शर्मनाक न कहकर दयनीय कहता हूं, क्योंकि मैं अनुभव करता हूं कि उन्हें दोष देने की बजाय उन पर तरस खाने की आवश्यकता है। ये लोग एकता को खंडित करनेवाली उस आग को हवा दे रहे हैं, जिन्हें अंग्रेज लगा लगा गए थे।' &lt;/span&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2369261783286222853-7811540203176720133?l=yugkipukar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://yugkipukar.blogspot.com/feeds/7811540203176720133/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2369261783286222853&amp;postID=7811540203176720133' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2369261783286222853/posts/default/7811540203176720133'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2369261783286222853/posts/default/7811540203176720133'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://yugkipukar.blogspot.com/2008/02/blog-post.html' title='कम्युनिस्टों के ऐतिहासिक अपराध'/><author><name>Gopal Kumar Azad</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17026889315614855803</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='22' src='http://bp1.blogger.com/_htfHEBB3KMM/R1OnPgC2oEI/AAAAAAAAAJ8/47Cqwt9SLzI/S220/15flag.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2369261783286222853.post-4588001733020413888</id><published>2008-01-14T00:38:00.000-08:00</published><updated>2008-01-14T00:47:54.360-08:00</updated><title type='text'>बंगलादेशी घुसपैठ कितना खतरनाक ?</title><content type='html'>भारत की स्वतंत्रता के उपरान्त से ही जिस प्रकार विभिन्न देशों से लोग यहां आये उनमें से अनेक तो शरणार्थी के रूप में थे और अनेक चोरी छिपे घुसपैठिये थे। इससे भारत में जहां जनसंख्या में असंतुलन उभरा वहीं देश में अनेक प्रकार की समस्याएं खडी हो गईं। गत दस वर्षों में बांग्लादेश से लगभग 5.8 करोड की एक बडी आबादी ने भारत में अवैध रूप से घुसपैठ कर ली है जिससे देश में अनेक सीमावर्ती जिले इन घुसपैठियों के लगभग कब्जे में ही आ गये है। &lt;strong&gt;परन्तु सबसे बड़ा दुर्भाग्य यह है कि देश के तथाकथित गैर साम्प्रदायिक राजनीतिक नेता इन अवैध घुसपैठियों की बांग्लादेश में वापसी के लिए कोई पहल नहीं कर रहे हैं तथा जो राजनेता इनको वापिस भेजने की मांग करते हैं उनको साम्प्रदायिक कह कर गाली दी जाती है ।अब भारत की एकता व अखण्डता भी खतरे में पडती जा रही है । बढ़ती घुसपैठ व बढती जनसंख्या के असंतुलन से देश की आंतरिक सुरक्षा भी खतरे में पड गई है।&lt;/strong&gt; देश को बाह्य आक्रमण से बचाने के लिए देश की सम्पूर्ण जनता जाति, बिरादरी, मजहब व पंथ को छोड कर एकजुट हो जाती है लेकिन आंतरिक आक्रमण-घुसपैठ होने से आंतरिक असुरक्षा उत्पन्न हो जाती है जिसको सामान्य जन के साथ-साथ हमारे राजनेता भी गम्भीरता से नहीं लेते है। इससे आतंकवाद को शरण मिल जाती है। बढते आतंकवाद ने अब तक कई लाख लोगों को लील लिया है वहीं अरबों रुपये की राष्ट्र की सम्पत्ति को हानि पहुंची है एवं देशवासी भी एकजुट होकर इस आतंकवाद से लड़ने में स्वयं को तैयार नहीं कर पाते हैं &lt;strong&gt;।भारत ने स्वतंत्रता के अपने साठ साल के जीवन में पांच प्रमुख युध्द झेले है जिनमें हमारे रणबांकुरों ने दुश्मनों के दांत खट्टे किये है, परन्तु युध्दोपरांत वार्ता की मेज पर दृढ़ राजनैतिक इच्छाशक्ति के अभाव व अल्पसंख्यक वोट बैंक की राजनीतिक दुष्प्रवृति व मानसिकता के कारण भारत का जीता हुआ युध्द भी सदैव पराजित होता रहा है। लगभग वैसी ही स्थिति बांग्लादेश से हो रही घुसपैठ को लेकर हमारे राजनीतिक दलों की हो रही है। विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने तो भारत में रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों की कुल संख्या ही घटा कर 15 से 20 लाख बतायी है&lt;/strong&gt; जिसे विपक्ष ने लोकसभा में सफेद झूठ बताया है। दिल्ली में ही विभिन्न क्षेत्रों में लगभग पांच लाख से अधिक बांग्लादेशी घुसपैठिए निवास करते हैं। मुम्बई, कोलकाता तथा पश्चिमी बंगाल के विभिन्न हिस्सों में राजनेताओं की कृपा दृष्टि से तीस लाख से अधिक बांग्लादेशी बसे हुए हैं। असम के कई जिलों में इन घुसपैठियों के कारण आबादी में (भारतीय व विदेशी घुसपैठियों के बीच) संतुलन का खतरा पैदा हो गया है। राष्ट्रवादी शक्तियां इन अवैध घुसपैठियों से देश में बढ़ते हुए खतरे को लेकर चिन्तित रहती है। परन्तु पूर्वोत्तर राज्यों के राजनेता एकदम से आंख मूंदे हुए हैं । &lt;strong&gt;समूचे भारत में लगभग 5.8 करोड बांग्लादेशी निवास करते हैं जिनके कारण भारत में सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक (खाद्यान्न सहित) तानाबाना तहस-नहस हो रहा है। देश की एकता व अखंडता निरन्तर खतरे में पडती जा रही है सो अलग।यह कई बार साबित हो चुका है कि मुस्लिम आतंकवादी पकिस्तान की गुप्तचर एजेंसी आईएसआई बांग्लादेश के लोगों व जमीन का उपयोग भारत विरोधी गतिविधियों के लिए कर रहे हैं । पाकिस्तान से प्रशिक्षित आंतकवादी बांग्लादेश के रास्ते भारत में प्रवेश कर जाते हैं ।&lt;/strong&gt; बांग्लादेश से भारत में आ रहे बांग्ला घुसपैठिए महज रोजी रोटी के लिए भारत की सीमाओं का उल्लंघन नहीं कर रहे हैं। भारत में पकडे गये आतंकवादियों से खुलासा हुआ है कि उन्होंने बांग्लादेश की कई बार यात्रा की है। हमारे राजनेताओं के दब्बूपन और सत्ता के लिए वोट बैंक की राजनीति ने राष्ट्र को एक गम्भीर खतरे की ओर बढा दिया &lt;strong&gt;है।केन्द्र सरकार की ढिलाई के कारण प्रतिदिन 12,000 बांग्लादेशी घुसपैठिए अवैध रूप से भारत की सर-जमीन पर दाखिल हो जाते हैं। भारतीय सुरक्षा बलों के कुछ भ्रष्ट सिपाहियों व अधिकारियों को मात्र हजार पांच सौ रुपये देकर बांग्लादेशियों को भारत की सीमा में चुपचाप दाखिल करवा दिया जाता है। भारत में घुसे इन अवैध घुसपैठियों को फिर भारतीय राजनेताओं का राजनीतिक संरक्षण प्राप्त हो जाता है तथा भारत में रहने के लिए आवश्यक सभी प्रपत्र फर्जी रूप से तैयार करवा दिये जाते हैं। &lt;/strong&gt;अवैध घुसपैठियों के कारण भारत के मूल नागरिकों के काम धन्धे पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा हैं ।भारत में बांग्लादेश से हो रही अवैध घुसपैठ रोकने के लिए सरकार को दृढ़ इच्छाशक्ति से प्रारम्भ में दो काम करने चाहिए-अवैध रूप से भारत में रहने वालों को वापस खदेडा जाए तथा बांग्लादेश की पूरी सीमा को कंटीले लोहे के तारों से सील किया जाए वरना तो भारत का एक बडा हिस्सा भारत से पृथक हो &lt;strong&gt;जायेगा।सन् 1800 में अफगानिस्तान व ईरान भारत के ही हिस्से थे किन्तु विदेशी आक्रमणकारियों से उत्पन्न हुए आतंक के कारण ही यह हिस्सा भारत से अलग हो गया। कश्मीर में फैलता आतंकवाद व 1960 से शुरू हुआ माओ आतंक भारत की आंतरिक सुरक्षा को भेदने का निरन्तर प्रयास कर रहा है। 21 वीं शताब्दी में विश्व में दो बडे आतंकवादी हमले हुए है। अमेरिका के पैंटागन और वर्ल्ड सेंटर पर हुआ हमला जिसने अमेरिका जैसी महाशक्ति को हिला कर रख दिया और दूसरा हमला विश्व के सबसे बडे लोकतंत्र भारत की संसद पर किया गया जिससे पाक प्रायोजिक आतंकवाद बेनकाब हुआ ।&lt;/strong&gt; 1971 में हमारे वीर सैनिकों ने अपना खून बहा कर जिस बांग्लादेश का निर्माण किया वही आज भारत के लिए सबसे बड़ी समस्या बन चुका &lt;strong&gt;है।5.8 करोड से अधिक बांग्लादेशी भारत की संस्कृति, आंतरिक सुरक्षा व रोजगार में सेंध मार रहे हैं वहीं प्रतिदिन 3,90,000 कुंतल खाद्यान्न चट कर जाते है। परन्तु अल्पसंख्यकों के तुष्टीकरण में तल्लीन हमारे राजनेता इस महत्वपूर्ण समस्या को गम्भीरता से नहीं ले रहे है तथा घुसपैठियों से उत्पन्न हुआ रोग अब नासूर बन चुका है&lt;/strong&gt; जिसका एक बड़ा ऑपरेशन शीघ्र अतिशीघ्र करना आवश्यक हो गया है। जिसमें बांग्लादेश की सीमा पर 100 प्रतिशत तार बंदी शामिल है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2369261783286222853-4588001733020413888?l=yugkipukar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://yugkipukar.blogspot.com/feeds/4588001733020413888/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2369261783286222853&amp;postID=4588001733020413888' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2369261783286222853/posts/default/4588001733020413888'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2369261783286222853/posts/default/4588001733020413888'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://yugkipukar.blogspot.com/2008/01/blog-post_8732.html' title='बंगलादेशी घुसपैठ कितना खतरनाक ?'/><author><name>Gopal Kumar Azad</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17026889315614855803</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='22' src='http://bp1.blogger.com/_htfHEBB3KMM/R1OnPgC2oEI/AAAAAAAAAJ8/47Cqwt9SLzI/S220/15flag.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2369261783286222853.post-6579823914073114064</id><published>2008-01-14T00:34:00.000-08:00</published><updated>2008-01-14T00:35:34.168-08:00</updated><title type='text'></title><content type='html'>&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2369261783286222853-6579823914073114064?l=yugkipukar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://yugkipukar.blogspot.com/feeds/6579823914073114064/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2369261783286222853&amp;postID=6579823914073114064' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2369261783286222853/posts/default/6579823914073114064'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2369261783286222853/posts/default/6579823914073114064'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://yugkipukar.blogspot.com/2008/01/blog-post_14.html' title=''/><author><name>Gopal Kumar Azad</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17026889315614855803</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='22' src='http://bp1.blogger.com/_htfHEBB3KMM/R1OnPgC2oEI/AAAAAAAAAJ8/47Cqwt9SLzI/S220/15flag.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2369261783286222853.post-1435272605989097759</id><published>2008-01-07T04:27:00.000-08:00</published><updated>2008-01-07T04:34:01.077-08:00</updated><title type='text'>हिंदुत्व</title><content type='html'>&lt;p&gt; &lt;a class="new" title="वीर सावरकर" href="http://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=%E0%A4%B5%E0%A5%80%E0%A4%B0_%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A4%B0&amp;amp;action=edit"&gt;वीर सावरकर&lt;/a&gt; ने हिन्दुत्व और हिन्दूशब्दों की एक परिभाषा दी थी जो हिन्दुत्ववादियों के लिये बहुत महत्त्वपूर्ण है  उन्होंने कहा कि हिन्दू वो व्यक्ति है जो &lt;a title="भारत" href="http://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4"&gt;भारत&lt;/a&gt; को अपनी पितृभूमि और अपनी पुण्यभूमि दोनो मानता है । हिन्दुत्व शब्द फ़ारसी शब्द हिन्दू और संस्कृत प्रत्यय -त्व से बना है ।&lt;br /&gt;&lt;/p&gt;&lt;ul&gt;&lt;li&gt;हिन्दुत्ववादी कहते हैं कि हिन्दू शब्द के साथ जितनी भी भावनाएं और पद्धतियाँ, ऐतिहासिक तथ्य, सामाजिक आचार-विचार तथा वैज्ञानिक व आध्यात्मिक अन्वेषण जुड़े हैं, वे सभी हिन्दुत्व में समाहित हैं।हिन्दुत्व शब्द केवल मात्र हिन्दू जाति के कोरे धार्मिक और आध्यात्मिक इतिहास को ही अभिव्यक्त नहीं करता। हिन्दू जाति के लोग विभिन्न मत मतान्तरों का अनुसरण करते हैं। इन मत मतान्तरों व पंथों को सामूहिक रूप से हिन्दूमत अथवा हिन्दूवाद नाम दिया जा सकता है । आज भ्रान्तिवश हिन्दुत्व व हिन्दूवाद को एक दूसरे के पर्यायवाची शब्दों के रूप में प्रयोग किया जा रहा है। यह चेष्टा हिन्दुत्व शब्द का बहुत ही संकीर्ण प्रयोग है । &lt;/li&gt;&lt;li&gt;हिन्दुत्ववादियों के अनुसार हिन्दुत्व किसी भी धर्म या उपासना पद्धति के ख़िलाफ़ नहीं है ।&lt;br /&gt;वो तो भारत में सुदृढ़ राष्ट्रवाद और नवजागरण लाना चाहता है । उसके लिये हिन्दू संस्कृति वापिस लाना ज़रूरी है ।&lt;br /&gt;अगर समृद्ध हिन्दू संस्कृति का संरक्षण न किया गया तो विश्व से ये धरोहरें मिट जायेंगी । आज भोगवादी पश्चिमी संस्कृति से हिन्दू संस्कृति को बचाने की ज़रूरत है । &lt;/li&gt;&lt;li&gt;हिन्दुत्व और हिन्दू धर्म सर्वधर्म समभाव के सिद्धान्त में विश्मास रखता है । (ईसाई और मुसलमान ये नहीं मानते)&lt;br /&gt;हिन्दुत्व गाय जैसे मातासमान पशु का संरक्षण करता है । &lt;/li&gt;&lt;li&gt;ईसाई और इस्लाम धर्म हिन्दू धर्म को पाप और शैतानी धर्म मानता है । इस्लाम के अनुसार हिन्दू लोग क़ाफ़िर हैं ।&lt;br /&gt;मुसलमान हिन्दू बहुल देशों में रहाना ही नहीं चाहते । वो एक वृहत्-इस्लामी उम्मा में विश्वास रखते हैं और भारत को दारुल-हर्ब (विधर्मियों का राज्य) मानते हैं । वो भारत को इस्लामी राज्य बनाना चाहते हैं । &lt;/li&gt;&lt;li&gt;मुसलमान हिंसा से और ईसाई लालच देकर हिन्दुओं (ख़ास तौर पर अनपढ़ दलितों को) अपने धर्म में धर्मान्तरित करने में लगे रहते हैं ।&lt;/li&gt;&lt;li&gt;इतिहास गवाह है कि मुसलमान आक्रान्ताओं ने मध्य-युगों में भारत में भारी मार-काट मचायी थी । उन्होंने हज़ारों मन्दिर तोड़े और लाखों हिन्दुओं का नरसंहार किया था । हमें इतिहास से सीख लेनी चाहिये । &lt;/li&gt;&lt;li&gt;इस्लामी बहुमत पाकिस्तान (अखण्ड भारत का हिस्सा) भारत को कभी चैन से जीने नहीं देगा । आज सारी दुनिया को इस्लामी आतंकवाद से ख़तरा है । अगर आतंकवाद को न रोका गया तो पहले कश्मीर और फिर पूरा भारत पाकिस्तान के पास चला जायेगा ।&lt;/li&gt;&lt;li&gt;कम्युनिस्ट इस देश के दुश्मन हैं । वो धर्म को अफ़ीम समझते हैं । उनके हिसाब से तो भारत एक राष्ट्र है ही नहीं, बल्कि कई राष्ट्रों की अजीब मिलावट है । रूस और चीन में सभी धर्मों पर भारी ज़ुल्मो-सितम ढहाने वाले अब भारत में इस्लाम के रक्षक होने का ढोंग करने के लिये प्रकट हुए हैं । &lt;/li&gt;&lt;li&gt;अयोध्या का राम मंदिर हिन्दुओं के लिये वैसा ही महत्त्व रखता है जैसे काबा शरीफ़ मुसलमानों के लिए या रोम और येरुशलम के चर्च ईसाइयों के लिये । फिर क्यों एक ऐसी बाबरी मस्जिद के पीछे मुसलमान पड़े हैं जहाँ नमाज़ तक नहीं पढ़ी जाती, और जो एक हिन्दू मन्दिर को तोड़ कर बनायी गयी है ? &lt;/li&gt;&lt;li&gt;भारत में मुसल्मन संगठित हैं--एक समुदाय के रूप में । हिन्दू जात-पात, साम्प्रदाय, भाषा आदि में बँटे हैं । हिन्दुत्व सभी हिन्दुओं को संगठित करता है । &lt;/li&gt;&lt;li&gt;आधुनिक भारत में नकली धर्मनिर्पेक्षता चल रही है । बाकी लोकतान्त्रिक देशों की तरह यहाँ सभी धर्मावलम्बियों के लिये समानाचार संहिता नहीं है । यहाँ मुसलमानों के अपने व्यक्तिगत कानून हैं जिसमें औरत के दोयम दर्ज़े, ज़बानी तलाक़, चार-चार शादियों जैसी घटिया चीज़ों जो कानूनी मान्यता दी गयी है ।&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2369261783286222853-1435272605989097759?l=yugkipukar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://yugkipukar.blogspot.com/feeds/1435272605989097759/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2369261783286222853&amp;postID=1435272605989097759' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2369261783286222853/posts/default/1435272605989097759'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2369261783286222853/posts/default/1435272605989097759'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://yugkipukar.blogspot.com/2008/01/blog-post_07.html' title='हिंदुत्व'/><author><name>Gopal Kumar Azad</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17026889315614855803</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='22' src='http://bp1.blogger.com/_htfHEBB3KMM/R1OnPgC2oEI/AAAAAAAAAJ8/47Cqwt9SLzI/S220/15flag.jpg'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2369261783286222853.post-4345761333277164654</id><published>2008-01-05T02:16:00.000-08:00</published><updated>2008-01-05T02:21:26.395-08:00</updated><title type='text'>ऐतिहासिक परिपेक्ष्य में जिहाद</title><content type='html'>द्वारा डैनियल पाइप्सन्यूयार्क सन31 मई, 2005&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;राइस विश्वविद्यालय के डेविड कुक ने “अन्डर-स्टेंडिंग जिहाद” नाम से एक बहुत अच्छी और बोधगम्य पुस्तक लिखी है .युनिवर्सिटी औफ कैलीफोर्निया प्रेस द्वारा प्रकाशित इस पुस्तक का विमोचन अभी शीघ्र ही हुआ है ...इस पुस्तक में डेविड कुक ने 11 सितम्बर के पश्चात जिहाद पर आरंभ हुई निचले स्तर की बहस के स्वरुप को निरस्त किया है कि क्या यह एक आक्रामक युद्द पद्धति है या फिर व्यक्ति के नैतिक विकास का प्रकार है...&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;कुरान मुसलमानों को स्वर्ग के बदले अपनी जान देने को आमंत्रित करता है ..हदीथ , जो कि मोहम्मद के क्रियाकलापों और व्यक्तिगत बयानों का लेखा जोखा है ,कुरान के सिद्दांतो की और अधिक व्याख्या करता है .इसमें संधियों, धन का वितरण , युद्द में प्राप्त सामग्री य़ा पुरस्कार , बंदियों, विभिन्न नीतियों का उल्लेख है ..मुसलिम विधिशास्त्र ने कालांतर में इन व्यावहारिक विषयों को सूत्रबद्ध कर इसे एक कानून का स्वरुप दे दिया ....&lt;strong&gt;पैगंबर ने अपने शासनकाल के दौरान औसतन प्रतिवर्ष नौ सैन्य अभियानों में हिस्सा लिया ...अर्थात प्रत्येक पाँच या छ सप्ताह में एक सैन्य अभियान , इस प्रकार अत्यंत आरंभ से जिहाद इस्लाम को परिभाषित करने में सहायक है ...गैर मुसलमानों पर विजय प्राप्त करना और उन्हें अपमानित करना यह पैगंबर के जिहाद का प्रमुख अंग है ...&lt;br /&gt;&lt;/strong&gt;इस्लाम की प्रारंभिक शताब्दियों मे “जिहाद की व्याख्या निश्चित रुप से आक्रामक और विस्तारवादी रही ” . जब विजय का सिलसिला थम गया साथ ही गैर मुसलमानों को धमकाना कम हो गया तब सैन्य शब्द के समानांतर जिहाद की सूफी अवधारणा विकसित हुई जिसका मतलब था ..आत्म – विकास.&lt;br /&gt;क्रूसेड के माध्यम से पवित्र भूमि पर नियंत्रण स्थापित करने के शताब्दियों के यूरोपियन प्रयास ने जिहाद के नए “शास्त्रीय” सिद्दांत को विकसित करने की आवश्यकता महसूस की .स्वयं को रक्षात्मक मुद्रा में देखकर मुसलमानों ने अपना व्यवहार और अधिक कठोर बना लिया ....&lt;br /&gt;तेरहवीं शताब्दी में मंगोलों के विजय अभियान ने अधिकांश मुस्लिम विश्व को पदाक्रांत कर लिया , यह पीड़ा कुछ मेगेलों द्वारा इस्लाम स्वीकार कर लेने से थोडी मात्रा में कम अवश्य हो गई ...इस दौरान कुछ चिंतक सामने आए जिसमें विशेष रुप से सन् 1328 के इब्न तेमिया शामिल हैं ..जिन्होने सच्चे और झूठे मुसलमान के बीच विभेद करते हुए जिहाद को नया महत्व दिया ..उनके अनुसार जिहाद के संदर्भ में किसी व्यक्ति की प्रामाणिकता इस बात पर निर्भर करती है कि उस व्यक्ति में जिहाद आरंभ करने की इच्छा शक्ति कितनी है ...&lt;br /&gt;19 वीं शताब्दी का “शुद्दीकरण जिहाद ” अनेक क्षेत्रों में साथी मुसलमानों के विरुद्ध ही आरंभ हुआ ...इन सबमें सबसे कट्टर और प्रतिक्रियावादी अरब का वहाबी जिहाद था .इब्न तेमिया से प्रेरणा लेते हुए इन्होनें गैर वहाबी मुसलमानों को काफिर बताकर उनकी निंदा की और उनके विरुद्ध जिहाद छेड़ दिया .&lt;br /&gt;भारत , काकेशस , सोमालिया , सूडान , अल्जीरिया&lt;br /&gt;और मोरक्को जैसे देशों में यूरोपियन साम्राज्यवाद ने जिहादी प्रतिरोध को प्रेरित किया जिससे इन क्षेत्रों में जिहाद असफल रहा .इस आपदा का अर्थ था जिहाद पर नए सिरे से विचार करना .इस्लामवादियों का नया विचार भारत और मिस्र में 1920 में आरंभ हो गया परंतु इसने समकालीन कट्टर आक्रामक युद्ध पद्धति 1966 में मिस्र के विचारक सैयद कुतब के समय में प्राप्त की .कुतब ने इब्न तेमिया की भाँति ही सच्चे और झूठे मुसलमान के मध्य विभेद करते हुए गैर इस्लामवादियों को गैर- मुसलमान करार दिया और उनके विरुद्ध जिहाद घोषित कर दिया . 1981 में अनवर अल सादात की हत्या करने वाले गुट ने एक और विचार जोड़ते हुए जिहाद को विश्व पर नियंत्रण स्थापित करने का एक रास्ता बताया .&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;अफगानिस्तान में रुस के विरुद्ध हुआ युद्ध जिहाद के अबतक के विकास का अंतिम चरण है . अफगानिस्तान में पहली बार पूरी दुनिया के मुसलमान इस्लाम के नाम पर युद्ध करने के लिए एक जगह एकजुट हुए.1980 में एक फिलीस्तीनी अब्दुल्ला अज्जाम ने वैश्विक जिहाद का विचार दिया .इसके अंतर्गत जिहाद इस्लाम का प्रमुख अंग मानते हुए प्रत्येक मुसलमान के बारे में फैसला जिहाद के बारे में उसकी भूमिका के आधार पर किया गया तथा जिहाद को इस्लाम और मुसलमानों की मुक्ति का मार्ग माना गया. इसी विचार में से समकालीन आतंकवाद और बिन लादेन का जन्म हुआ .&lt;br /&gt;&lt;/strong&gt;जिहाद की वर्तमान अवधारणा इस्लामिक इतिहास के किसी भी युग की तुलना में कहीं अधिक कट्टर है ..&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2369261783286222853-4345761333277164654?l=yugkipukar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://yugkipukar.blogspot.com/feeds/4345761333277164654/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2369261783286222853&amp;postID=4345761333277164654' title='6 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2369261783286222853/posts/default/4345761333277164654'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2369261783286222853/posts/default/4345761333277164654'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://yugkipukar.blogspot.com/2008/01/blog-post_9780.html' title='ऐतिहासिक परिपेक्ष्य में जिहाद'/><author><name>Gopal Kumar Azad</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17026889315614855803</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='22' src='http://bp1.blogger.com/_htfHEBB3KMM/R1OnPgC2oEI/AAAAAAAAAJ8/47Cqwt9SLzI/S220/15flag.jpg'/></author><thr:total>6</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2369261783286222853.post-6538694030054018236</id><published>2008-01-05T01:57:00.000-08:00</published><updated>2008-01-05T02:03:06.307-08:00</updated><title type='text'>मुस्लिम वोटों की लालच</title><content type='html'>पिछले दिनों जब असम में उग्रवादी संगठनों ने हिन्दी भाषी लोगों को निशाना बनाया तो एक बार फिर एक साथ अनेक सवाल उठकर खड़े हो गये. पहला, इस बर्बर नरसंहार के लिये दोषी किसे ठहराया जाना चाहिये. उग्रवादी संगठन उल्फा को पाकिस्तानी खुफिया संगठन आई.एस.आई को या फिर स्वयं असम सरकार की लापरवाही को.&lt;br /&gt;    वैसे तो असम के मुख्यमन्त्री ने तत्काल इस नरसंहार की जिम्मेदारी आई.एस.आई पर डाल दी परन्तु क्या इससे मुख्यमन्त्री तरूण गोगोई का उत्तरदायित्व समाप्त हो जाता है. आखिर पिछले चुनावों में  उल्फा की सहायता लेकर और फिर बोडो अलगाववादी संगठन की पूर्ववर्ती शाखा के साथ सरकार बनाकर सेना के हाथ किसने बाँधे थे. कांग्रेस सरकार ने ऐसे बोडो सदस्यों को अपना भागीदार बनाया जिनके अभी भी भूमिगत उग्रवादियों से सम्बन्ध हैं. उल्फा के सहयोग की कीमत चुकाते हुये सरकार ने उल्फा के साथ युद्ध विराम की घोषणा कर दी और इस दौरान इस संगठन को स्वयं को सशक्त करने का अवसर प्राप्त हो गया. &lt;strong&gt;तत्काल लापरवाही के साथ-साथ कांग्रेस सरकार की बांग्लादेश घुसपैठ के सम्बन्ध में राष्ट्रीय सुरक्षा से अधिक मुस्लिम वोट बैंक को खुश करने की नीति ने भी इस समस्या को बढ़ावा दिया है.&lt;br /&gt;&lt;/strong&gt;  &lt;strong&gt; पिछले वर्ष कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर जब मेघालय में इस्कान मन्दिर में आतंकवादियों द्वारा बम विस्फोट किया गया तभी स्पष्ट हो गया था कि इस्लामी आतंकवादियों ने अपनी रणनीति बदल कर उत्तर पूर्व को अपना नया केन्द्र बनाकर स्थानीय उग्रवादी संगठनों के माध्यम से हमलों को अन्जाम देने का नया फार्मूला अपनाया है.&lt;/strong&gt; यही नहीं तो जुलाई में मुम्बई में हुये बम विस्फोटों की जाँच कर रही आतंकवाद प्रतिरोध शाखा ने बांग्लादेश की सीमा से सटे पूर्वोत्तर क्षेत्र को इस्लामी आतंकवादियों का नया केन्द्र बताया था और त्रिपुरा से लेकर मेघालय तक अनेक मदरसों को संदेह के दायरे में रखा था. मुम्बई विस्फोटों के बाद अनेक आतंकवादियों को असम में कामाख्या मन्दिर पर आक्रमण के षड़यन्त्र में गिरफ्तार भी किया गया है. &lt;strong&gt;अभी कुछ महीनों पहले सिलीगुड़ी में हुये रेल विस्फोट की जाँच के दौरान पाया गया कि इस विस्फोट को बांग्लादेश स्थित जेहादी संगठन जमातुल मुजाहिदीन बांग्लादेश ने स्थानीय उग्रवादी संगठन कामतपुर लिबरेशन आर्गनाइजेशन की सहायता से कराया है. जमातुल मुजाहिदीन कट्टर जेहादी संगठन है जिसके अल-कायदा से सम्बन्ध हैं और इस संगठन ने उत्तरी बंगाल में अपनी घुसपैठ कर ली है और अपने प्रशिक्षण शिविर चला रहा है.&lt;br /&gt;&lt;/strong&gt;   इन तथ्यों से एक बात पूरी स्पष्ट है कि आई.एस.आई पूर्वोत्तर के उग्रवादी संगठनों की सहायता से इस्लामी मिशन को पूरा कर रहा है&lt;strong&gt;.&lt;/strong&gt; &lt;strong&gt;असम में हिन्दी भाषियों पर आक्रमण का सीधा उद्देश्य उन्हें असम से बाहर निकलने को विवश करना है ताकि यहाँ निर्बाध गति से बांग्लादेशी घुसपैठ हो सके और इन क्षेत्रों को बांग्लादेश से मिलाया जा सके. आखिर इस भयावह स्थिति के लिये उत्तरदायी कौन है, मुस्लिम वोटों के भिखारी राजनेता जो राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ समझौता करने में तनिक भी नहीं हिचकते.&lt;/strong&gt; &lt;br /&gt;बांग्लादेश घुसपैठ के मामले में कांग्रेस का रवैया कितना ढुलमुल रहा है यह बताने की आवश्यकता नहीं है, सर्वोच्च न्यायालय द्वारा आई.एम.डी.टी अधिनियम समाप्त करने के बाद केन्द्र सरकार ने एक और अध्यादेश जारी कर उसे फिर से लागू करने का प्रयास किया सर्वोच्च न्यायालय ने उस अध्यादेश को भी असंवैधानिक घोषित कर दिया. &lt;strong&gt;सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दो बार कहे जाने के बाद भी सरकार ने आज तक अवैध घुसपैठियों को देश से बाहर निकालने का कोई प्रयास नहीं किया है.&lt;/strong&gt; अभी इसी सप्ताह एक और जनहित याचिका की सुनवाई में सर्वोच्च न्यायालय ने फिर अवैध घुसपैठियों को देश से बाहर निकाले जाने के मामले में सरकार से प्रगति आख्या मंगाई है.&lt;br /&gt;   &lt;strong&gt;आखिर मुस्लिम वोटों की लालच में कब तक देश की सुरक्षा के साथ समझौता होता रहेगा, &lt;/strong&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2369261783286222853-6538694030054018236?l=yugkipukar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://yugkipukar.blogspot.com/feeds/6538694030054018236/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2369261783286222853&amp;postID=6538694030054018236' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2369261783286222853/posts/default/6538694030054018236'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2369261783286222853/posts/default/6538694030054018236'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://yugkipukar.blogspot.com/2008/01/blog-post_2860.html' title='मुस्लिम वोटों की लालच'/><author><name>Gopal Kumar Azad</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17026889315614855803</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='22' src='http://bp1.blogger.com/_htfHEBB3KMM/R1OnPgC2oEI/AAAAAAAAAJ8/47Cqwt9SLzI/S220/15flag.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2369261783286222853.post-5869382329621864365</id><published>2008-01-05T01:39:00.000-08:00</published><updated>2008-01-05T01:44:13.316-08:00</updated><title type='text'>वामपंथ की दरकती इमारत</title><content type='html'>जब कोई इमारत दरकने लगती है तो उसकी दरारों में से कीड़े-मकोड़े निकलने शुरू हो जाते हैं। पश्चिम बंगाल में ऐसा ही कुछ नजर आ रहा है। गत माह कोलकाता की गलियों में गुंडागर्दी के शर्मनाक प्रदर्शन की जो तस्वीर दुनिया के सामने आई है उसमें यह साफ-साफ नजर आया कि माकपा के हाथ से एक ऐसे राज्य का नियंत्रण निकल रहा है जिस पर उसने अनवरत 30 सालों तक शासन किया है। कार्यकर्ताओं द्वारा नंदीग्राम पर पुन: कब्जा जमाना यदि ग्रामीण समुदाय के कोने-कोने में पार्टी के प्रभुत्व को स्थापित करने का एक हताशा भरा प्रयास था तो राज्य सरकार द्वारा तसलीमा नसरीन को कोलकाता से बाहर निकालना उन प्रतिगामी शक्तियों के फिर से हावी हो जाने का प्रमाण था जिनको माकपा व्यवस्थित तरीके से पोषित करती रही है। ऐसा आभास होता है कि राजनीतिक अस्तित्व को बचाए रखने के लिए माकपा पूरे घटनाक्रम से संबद्ध नुकसान अर्थात बंगाली भद्रलोक से पार्टी के अलगाव को भी स्वीकार करने को तैयार है।&lt;br /&gt;पार्टी की बुनियादी मान्यताओं पर समग्र दृष्टिपात किए बिना ही घड़ी की सुई को पीछे खींचने की कोशिश के संबंध में किसी मत पर पहुंचना अभी जल्दबाजी होगी। सोवियत संघ में मिखाइल गोर्बाच्योव तो असफल रहे, किंतु चीन में देंग जियाबिंग ने कामयाबी हासिल की। फिर भी यह स्पष्ट नजर आता है कि उदार हिंदू परिकल्पना के संदर्भ में कम्युनिस्टों के संकल्प को तगड़ा झटका लगा है। बौद्धिक जगत-कला, शिक्षाविद् और मीडिया पर प्रभाव के कारण ही राष्ट्रीय जीवन में वाम दल मिथ्या साख बनाने में कामयाब हुए। नंदीग्राम प्रकरण और &lt;strong&gt;तसलीमा के निष्कासन के बाद वाम दल खुद को देवतुल्य बताने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन उनके मुंह से बदबू निकल रही है। तसलीमा के विरोध में दंगा-फसाद और तदनुपरांत कोलकाता से उनके निष्कासन को कम कर नहीं आंकना चाहिए।&lt;br /&gt;करीब 17 सालों से वामपंथियों के विद्वान सिद्धांतकार हिंदू सांप्रदायिकता को दुश्मन नंबर एक घोषित करते रहे हैं। तभी से माकपा मुस्लिम समाज की प्रतिगामी शक्तियों को बढ़ावा दे रही है&lt;/strong&gt;। पहले तो माकपा भाजपा की उभरती शक्ति के भय का शिकार बनी तथा इसके बाद अमेरिका विरोध के नाम पर उसने खुद को तथाकथित मुस्लिम पुनरोद्धार के आत्मघाती शिकंजे में फंसा लिया। पश्चिम बंगाल में यह दूसरे रूप में सामने आया है-ठीक उसी तरह जैसे घुसपैठ के कारण सीमांत जिलों का जनसांख्यिकीय स्वरूप बदल गया है। राजग शासन के दौरान &lt;strong&gt;माकपा नेताओं ने बांग्लादेशी घुसपैठियों के निष्कासन को जबरन रोक दिया था।&lt;/strong&gt; मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य ने सार्वजनिक रूप से इस पर खेद प्रकट किया कि उन्होंने राज्य के मदरसों के बारे में यह टिप्पणी करने का साहस दिखाया था कि उन्हें आधुनिकता और देशभक्ति का पाठ पढ़ना चाहिए। &lt;strong&gt;इराक और इजरायल के खिलाफ आत्मघाती हमलावरों को महिमामंडित करने और अमेरिका के साथ सामरिक साझेदारियों के विरोध में देश के अन्य इलाकों में माकपा ने मुल्लाओं के साथ गठजोड़ कर लिया है।&lt;/strong&gt; तसलीमा के सवाल पर माकपा ने एक बार फिर उन्हीं शक्तियों का साथ दिया है। तसलीमा की पुस्तक पर लगे प्रतिबंध को उच्च न्यायालय द्वारा खारिज कर दिए जाने के बावूजद माकपा ने उस पर फिर से प्रतिबंध लगा दिया। माकपा ने तो उस बंगाली पत्रिका पर भी प्रतिबंध लगा दिया, जिसने पंथ की आलोचना के तसलीमा के अधिकार की वकालत की थी। माकपा ने तसलीमा को वीजा जारी न करने के लिए केंद्र को तैयार करने का भी प्रयास किया। अंतत: उन्हें पश्चिम बंगाल से निष्कासित कर माकपा ने नरेंद्र मोदी को एक जबरदस्त मुद्दा थमा दिया।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;क्या अनीश्वरवादी कम्युनिस्टों और खुद को मुजाहिदीन बताने वालों के बीच इस असंगत संबंध से आंखें फेरी जा सकती हैं? अपनी हिफाजत के लिए इस्लामिक कट्टरपंथी पिछले करीब दो दशकों से माकपा के साथ मैत्री बढ़ाने में लगे हैं। कोई आश्चर्य नहीं कि पश्चिम बंगाल में अब बांग्लादेश आधारित जेहादी संगठनों के विस्तार केंद्र खुल रहे हैं।&lt;/strong&gt; मुस्लिम कट्टरवादियों की राज्य प्रशासन के साथ एक गोपनीय समझबूझ विकसित हो गई है कि वे प्रदेश में कोई बखेड़ा खड़ा नहींकरेंगे। कभी-कभार इसका उल्लंघन जरूर हुआ है, लेकिन वह बहुत मामूली घटनाओं तक ही सीमित रहा, कुल मिलाकर पश्चिम बंगाल में जेहादी गुट ऐसा कुछ नहीं करते जिससे राज्य सरकार अस्थिर हो। &lt;strong&gt;मुसलमानों की अलगाववादी राजनीति, जिसके कारण पाकिस्तान का गठन हुआ, स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भी जारी है।&lt;/strong&gt; पश्चिम बंगाल में हुए हंगामे का एक कारण मुस्लिम समुदाय में हो रही हलचल है। वहां मुसलमानों का संपन्न तबका राजनीतिक हिस्सेदारी हासिल करने के लिए उतावला है। माकपा के पास वह ढांचा और लचीलापन नहीं है जिस पर उनकी उम्मीदें खरी उतर सकें। माकपा का ढांचा ऐसा है कि केवल कार्ड होल्डर कामरेड ही वास्तव में ताकतवर हो सकते हैं। हालांकि अब मुस्लिम नेतृत्व यह मानता है कि उसके पास समुदाय द्वारा तयशुदा मुद्दों पर सार्वजनिक जीवन में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए पर्याप्त जनसांख्यिकीय क्षमता है। &lt;strong&gt;पश्चिम बंगाल में मुस्लिम आबादी करीब 30 फीसदी है। बांग्लादेश की सीमा से लगे लगभग सभी जिलों में मुसलमान या तो बहुसंख्यक हैं या इसके करीब हैं।&lt;/strong&gt; पश्चिम बंगाल की राजनीति एक रोचक मोड़ पर है। फिलहाल, माकपा ने येन-केन-प्रकारेण अपना नियंत्रण जमा लिया है। अलगाववादी मुस्लिम गुट अब अपनी आबादी के अनुपात में सत्ता में भागीदारी चाहते हैं। बंगाल द्वारा राहत की सांस लेने के साठ साल बाद अलगाववादी राजनीति जबरदस्त तरीके से वापस लौट रही है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2369261783286222853-5869382329621864365?l=yugkipukar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://yugkipukar.blogspot.com/feeds/5869382329621864365/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2369261783286222853&amp;postID=5869382329621864365' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2369261783286222853/posts/default/5869382329621864365'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2369261783286222853/posts/default/5869382329621864365'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://yugkipukar.blogspot.com/2008/01/blog-post_05.html' title='वामपंथ की दरकती इमारत'/><author><name>Gopal Kumar Azad</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17026889315614855803</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='22' src='http://bp1.blogger.com/_htfHEBB3KMM/R1OnPgC2oEI/AAAAAAAAAJ8/47Cqwt9SLzI/S220/15flag.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2369261783286222853.post-473671710236479743</id><published>2008-01-05T01:30:00.000-08:00</published><updated>2008-01-05T01:33:40.139-08:00</updated><title type='text'>सीमा पार सुलगती आग</title><content type='html'>पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में है। पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो की हत्या अंतरराष्ट्रीय खबर थी और हत्या को हादसा बताने वाली सरकारी सफाई भी। बेनजीर की वसीयत के मुताबिक पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी नाबालिग पुत्र के नाम हो गई। यह भी बड़ी खबर थी। गोया पार्टी भी एक प्रापर्टी थी। पाकिस्तान भी राष्ट्र नहीं है। यह कट्टरपंथी आक्रामक समूहों और सेना की प्रापर्टी है। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी का मालिकाना मसला वसीयत से सुलट गया। 'प्रापर्टी पाकिस्तान' को लेकर मुसलसल जंग है। यहां कोई संप्रभु संवैधानिक सत्ता भी नहीं है। सिर्फ 60 साल की उम्र के इस मुल्क ने 4 संविधान बनाए। 32 साल तक सेना का राज रहा। इसके अलावा भी 10 साल तक सेना ने ही परोक्ष हुकूमत की, सिर्फ 18 साल ही अप्रत्यक्ष लोकतंत्र रहा। अभी भी सेना का ही राज है। बेनजीर भुट्टो की हत्या कोई अस्वाभाविक घटना नहीं है। पांच माह पहले ही लाल मस्जिद में कार्रवाई हुई थी। इसके पहले न्यायपालिका का सरेआम कत्ल हुआ। पाकिस्तान जेहादी आतंकवाद की विश्वविख्यात यूनिवर्सिटी है।&lt;br /&gt;रक्त पिपासु जेहादी आतंकियों पर आईएसआई और सेना का कवच है। आईएसआई और जेहादी आतंकियों के साथ कट्टरपंथी मौलानाओं की दुआएं है। भारत सबका दुश्मन नंबर एक है, लेकिन भारतीय हुक्मरान इससे बेखबर है। पाकिस्तान के जन्म का आधार मजहबी अलगाववाद था। राष्ट्र मजहब से नहीं बनते। राष्ट्र निर्माण का आधार संस्कृति होती है। मजहबी अलगाववादियों ने अपनी प्राचीन सांस्कृतिक विरासत को नहीं स्वीकारा। नई संस्कृति का निर्माण वे कर नहीं पाए। उन्होंने प्राचीन भारतीय इतिहास को भी खारिज किया। नया झूठा इतिहास लिखा गया। नई पीढ़ी ने भारत को शत्रु पढ़ा। मदरसे जेहाद सिखाने का केंद्र बने। मदरसा तालीम का विरोध बेनजीर ने किया था। अमेरिकी दबाव में मुशर्रफ ने भी किया था, लेकिन जहर मदरसों के आगे भी था। प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो के सलाहकार रहे इतिहासकार केके अजीज ने 'द पाकिस्तानी हिस्टोरियन' नामक शोध में पाकिस्तानी पाठ्य पुस्तकों के जहर की शिनाख्त की है। अजीज की किताब के मुताबिक कक्षा 2 की पाठ्य पुस्तक में उल्लेख है-''पं. नेहरू ने कहा कि आजादी के बाद हिंदुस्तान में हिंदुओं की सरकार होगी। कायदे आजम जिन्ना ने कहा कि यहां मुसलमान भी रहते हैं। मुसलमानों को अलग हुकूमत चाहिए।'' हिंदू विरोध के ही नजरिए से तैयार कक्षा 3 की पाठ्य पुस्तक में लिखा है, ''राजा जयपाल ने महमूद गजनवी के मुल्क में घुसने की कोशिश की। महमूद ने राजा को हरा दिया, लाहौर को हथिया लिया और इस्लामी हुकूमत कायम की।'' सच बात यह है कि पंजाब कभी इस्लाम राज्य नहीं था। महमूद आक्रांता और लुटेरा था। पाकिस्तान की नई पीढ़ी उसे हीरो पढ़ रही है। कक्षा 4 की किताब के अनुसार ''जब अंग्रेज ने इलाके पर हमला किया तो मुसलमानों के खिलाफ गैर मुसलमानों ने उनका साथ दिया। अंग्रेजों ने सारा मुल्क फतेह किया।'' कक्षा 5 की किताब में उल्लेख है-''मुस्लिम और हिंदू सभ्यताओं में विवाद हुआ। आजाद मुल्क (पाकिस्तान) की जरूरत हुई। पाकिस्तान का सिद्धांत आया। भारत (हिंदुओं) की दुष्टता थी। सर सैय्यद अहमद खां ने ऐलान किया कि मुसलमानों को एक अलग राष्ट्र के रूप में संगठित करना चाहिए।'' किताबों में 1965 के भारत-पाक युद्ध में पाकिस्तान को विजयी बताया गया। जेहाद और इसी किस्म के इतिहास को पढ़कर औसत पाकिस्तानी नौजवान आतंकी बनता है। कट्टरपंथी 'मौत के बाद जन्नत' की गारंटी देते है। कुछ बरस पहले 'जंग' ने लाहौर के करीब स्थित मरकज अलदावत अलअरशद नाम की इस्लामी यूनिवर्सिटी के मुख्य कर्ता-धर्ता और लश्करे तैयबा के प्रमुख प्रो. हाफिज सईद का इंटरव्यू छापा था। उसने भारतीय मुसलमानों से भारत के खिलाफ जेहाद अपील की थी-इसलिए कि हिंदुओं ने मुसलमानों का जीना हराम कर दिया है। 'जंग' ने पूछा कि मुसलमान निकलकर कहां जाएं? क्या पाकिस्तान उन्हे संभाल लेगा? सईद ने जवाब दिया, ''इसका जवाब सरकार दे। 1948, 1965 और 1971 में हमने संधि की, गलती की। यह न करते तो दिल्ली और कलकत्ता पर हमारा कब्जा होता।'' सईद जैसे लोग जो कुछ बोलते है वही वहां के बच्चों को पढ़ाया जाता है। सईद ने 'जंग' से कहा कि हमारे पैगंबर के मुताबिक अधिक बच्चे देने वाली बीबी से निकाह करना चाहिए। बड़ी आबादी वाली कौम ही दूसरों पर छा जाती है। भारत के तमाम हिस्सों में बढ़ी मुस्लिम आबादी से जनसंख्या संतुलन गड़बड़ाया है। तिस पर भी 11वीं योजना के मसौदे में मजहब आधारित 15 सूत्रीय तुष्टीकरण प्रोग्राम नत्थी किया गया। डा.अंबेडकर भारत की हिंदू-मुस्लिम साझा राष्ट्रीयता को असंभव मानते थे। उन्होंने तीखे सवाल उठाए, ''क्या भारत के राजनीतिक विकास के लिए हिंदू, मुस्लिम एकता जरूरी है? यदि तुष्टीकरण से तो कौन सी नई सुविधाएं उन्हें दी जाएं? अगर समझौते से तो शर्तें क्या होंगी?''&lt;br /&gt;सभी पाकिस्तानी हुक्मरान भारत विरोधी थे। भुट्टो भी, बेनजीर भी, नवाज शरीफ भी और परवेज मुशर्रफ भी। पाकिस्तान के पास परमाणु बम है। भारत विरोधी जेहादी जज्बा है। फिलहाल वहां गृहयुद्ध के हाल हैं, लेकिन विरोधी पड़ोसी के घर गृहयुद्ध का भी असर पड़ोस पर पड़ता है। पाकिस्तान का भूगोल भारत-पाक सीमाओं पर जरूर खत्म होता है, लेकिन पाकिस्तान एक विचारधारा भी है। पाकिस्तान जैसा उग्र कट्टरपंथ भारत में भी है। इसीलिए आतंकवादी अपने इसी देश में भी मदद पाते हैं। पाकिस्तान की आग का धुंआ भारत में भी है। राष्ट्र इसी धुंए से बेचैन है। पशु-पक्षी भी पड़ोसी धमक सुनकर चौकन्ने होते हैं। अपने ऊपर आती है तो पलटवार भी करते हैं, लेकिन भारतीय राजनीतिज्ञ सिर्फ सेंसेक्स उछाल देखकर ही उछल रहे हैं।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2369261783286222853-473671710236479743?l=yugkipukar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://yugkipukar.blogspot.com/feeds/473671710236479743/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2369261783286222853&amp;postID=473671710236479743' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2369261783286222853/posts/default/473671710236479743'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2369261783286222853/posts/default/473671710236479743'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://yugkipukar.blogspot.com/2008/01/blog-post.html' title='सीमा पार सुलगती आग'/><author><name>Gopal Kumar Azad</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17026889315614855803</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='22' src='http://bp1.blogger.com/_htfHEBB3KMM/R1OnPgC2oEI/AAAAAAAAAJ8/47Cqwt9SLzI/S220/15flag.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2369261783286222853.post-6253412125465783812</id><published>2007-12-21T01:04:00.000-08:00</published><updated>2007-12-21T01:07:58.761-08:00</updated><title type='text'>धर्मान्तरण कैसे कैसे !</title><content type='html'>1. मानविहिर की शातू बेन गुलाब भाई पवार बतातीं है कि असका पति गुलाब भाई बिमार रहता था। दवाई आदि कराई पर कोई लाभ नहीं हुआ। गांव के पास्टर के कहने पर कि ख्रिस्ती बनने पर ठीक हो जायेगा, गुलाब भाई ने अपना धर्म बदल लिया। असके बावजूद भी उसका स्वास्थ ठीक नहीं हुआ तो पास्टर ने कहा कि शीतू बेन अभी भी भूत, बंदरों की पूजा करती है, वह भी ईसाई हो जायेगी तो ठीक हो जाओगे। शीतू बेन और बाद में उसका पूरा परिवार ईसाई हो गया परन्तु गुलाब भाई ठिक होने की बजाए मर गया ।&lt;br /&gt;अब शीतू बेन और उसका पूरा परिवार वास्तविकता को समझ गया है और उनई माता के कुंड में स्नान कर पुन: हिन्दू हो गया है ।&lt;br /&gt;2. जामनविहिर की ही अरूणा चंदू पवार आज से दो वर्ष पूर्व जब 7 साल की थी तो आने गांव में बपतिस्मा क्या होता है - यह तमाशा देखने गयी थी । पादरी ने इस नाबालिग लड़की को भी बपतिस्मा का पानी दे दिया । यह ध्यान रहे कि नाबालिग व्यक्ति का धर्म बदलना कानूनन अपराध है ।&lt;br /&gt;3. धांगड़ी फादर पाड़ा के सुरेश ने बताया कि उसके पेट में हर समय दर्द रहता था। चर्च वाले पास्टर ने कहा कि तुन ख्रिस्ती बन जाओगे तो मैं तुम्हारे लिये प्रार्थना करूंगा और उसने धर्म बदल लिया ।&lt;br /&gt;4. वाकीगांव (गलकुंड आहवा जिला डांग के पास) का मधुगवली बांसदा की सुमित्रा बेन पटेल के साथ बिना विवाह किये रहने लग गया । जब सुमित्राबेन गर्भवती हो गयी तो मधु ने उसे ईसाई बनने की शर्त पर विवाह कर ब्लेकमेल करना चाहा, जिस पर बांसदा में हंगामा हो गया ।&lt;br /&gt;(दैनिक धबकार दिनांक 3/1/99)&lt;br /&gt;5. दिनांक 3/1/99 को सूरत जिला के तालुका सोनगढ़ के राशमाटी गांव में रमेशभाई माकड़ियाभाई गामित जो कि खेतों में मजदूरी करता है, को लीमजीभाई छीड़ीयाभाई गांमित (पास्टर) रमेशभाई गामित और पांच अन्य लोंगो ने रास्ते चलते मारा पीटा, फिर चर्च में ले जा कर खंभे से बांध दिया और रात भर इसलिये पीटते रहे क्योंकि वह ईसाई बनने को तैयार नहीं हो रहा था ।&lt;br /&gt;रड़तियाभाई बुधियाभाई पवार ने उसे अगले दिन खोल कर छोड़ा । मामले की 7 जनवरी को सोनगढ़ थाने में नामजद प्राथमिकी दर्ज कराई गयी ।&lt;br /&gt;(दैनिक संदेश सूरत 7/1/99)&lt;br /&gt;6. उधना डिंडोलीरोड़ पर सीतारामनगर सोसायटी सूरत के प्लाट नं. 11 मे मूल उत्तरप्रदेश की रहने वाली उर्मिलाबेन लौजारी विश्वकर्मा नामक एक महिला रहती है, उसकी हिनलबेल नामक बच्ची पोलियो से ग्रस्त है । पहले इस लड़की को ठीक करने के नाम पर चर्च ने इस गरीब परिवार पर डोरा डाला । लड़की न तो ठीक हुई न होनी थी बाद में मजदूरी करके जोड़े गये पैसे से जब उसने अपना छोटा सा मकान बनना शुरू किया तो राजू नामक पास्टर ने उसे धमकाया कि पहले ईसाई बनो फिर मकान बनने दूंगा । लोगों को पता लगने पर इस क्षेत्र में हंगामा हुआ ।&lt;br /&gt;(गुजरात समाचार 18-1-99)&lt;br /&gt;7. डांग में इस क्षेत्र के एक पास्टर जल्दूभाई और दूसरे जामनविहिर के पास्टर यशवंत भाई बताते है कि बीमारी और खराब आर्थिक स्थिति के कारण वे चर्च के चंगुल में फँस गये, उनके उपकार से बने होने के कारण वे ईसाई फादर की ईसाई बन जाने की मांग को ठुकरा नहीं सके ।&lt;br /&gt;इन दोनो के साक्षात्कार इंडिया टुडे जनवरी 99 में भी छपे है । बाद में ये दोनो और कई अन्य पास्टर अपनी भूल और चर्च की ठगी को समझ कर पुन: अपने मूल धर्म में वापस आ गये ।&lt;br /&gt;8. पीपलवाड़ा तालुका व्यारा जिला सुरत के नानूभाई दिवालूभाई कोंकणी चर्च और उसके ईशारे पर हो रहे अत्याचारों को याद कर आज भी अपनी हँसी भूल जाते हैं । 28 जनवरी 99 को पीपलवाड़ा में उसने बताया कि हम लोग जब पांडर देव की पूजा करते है तो हम पर गुलेलां से हमला और पीटायी होती थी । 17 वर्ष पूर्व शंकर भगवान के मंदिर पर नलिया डाल रहे थे तो ईसाइयों ने हम लोगों की बहुत पिटाई की । तब से मंदिर की मरम्मत करने की भी हम लोग हिम्मत नहीं करते थे । अब दो वर्ष से अम लोग जैसे नरक से मुक्त हुए है, 15 वर्ष बाद इस गांव में गणपति उत्सव मनाया गया है । स्वामी असीमानंदजी के इस क्षेत्र में आने और वनवासी कल्याण परिषद् के कार्यकर्ताओं के कारण ही हिन्दू समाज में फिर से बसंत आया है ।&lt;br /&gt;9. डांग मे मंदिरो पर हमले और मूर्तियों को खंडित करने का क्रम अब भी जारी है । 19-20 जनवरी 99 की रात को पादलखड़ी के हनुमानजी के मंदिर में आग लगायी गयी । वहां गाय बैल का पूरा अस्थी पंजर डाला गया । मंदिर के प्रांगण में क्रास गाडा गया और मंदिर में लगे देवी देवताओं के फोटो में से 20-25 फाटो जलाये गये । 29-30 जनवरी 99 की रात को धुमकल के मंदिर में स्थापित शिवजी के लिंग को तोड़कर दो टुकड़े कर दिये गये ।&lt;br /&gt;दोनों ही घटनाओं की प्राथमिकी दर्ज करने से पुलिस ने पहले तो आना कानी की फिर लोगों के दबाव को दखकर वाद तो दर्ज किया परन्तु नामजद रिपोर्ट होने के बावजूद अभी तक किसी को भी नहीं पकड़ा गया है। अवैध एवं अनैतिक रूप से चारेी छिपे बनाये गये कथिन प्रार्थनाघरों में से कुछ को जलाये जाने की निन्दनीय घटना को पूरी दुनिया में हिन्दू धर्म और देश की बदनामी के लिये प्रचारित किया गया परन्तु मंदिरों पर हुए, हो रहे हमले, मुर्तियों को खंडित करने, मरे हुए गाय बैल की हड्डियां डालकर मंदिरों को अपवित्र करने और संपूर्ण हिन्दू समाज को अपमानित करने की और न तो अंग्रेजी अखबार और न ही वोटों के सौदागर ध्यान दे रहे है ।&lt;br /&gt;10. डांग और उसके आस पास रहते वाला अपना वनवासी समाज चर्च की समाज को तोड़ने वाली और राष्ट्रघाती प्रवृति को समझ चुका है । अज्ञान, लोभ और दबाव में आकर पुर्वजों के हिन्दू धर्म को छोडकर उसने गलती की है, यह महसूस कर अब वह अपने मूल धर्म में वापस आरहा है ताकि घर परिवार, गांव और संपूर्ण समाज में वह शांति से रह सके, अपनी अमूल्ल्य सांस्कृतिक धरोहर को बचा कर रख सके । इसके लिये उनई माता के पुराण प्रसिध्द गर्म पानी के कुंड में डुबकी लगा कर प्रायश्चित करके उनई माता, अंबा माता और भगवान राम के दर्शन करे सैकड़ो लोग प्रतिदिन अपने धर्म में वापस आरहे है ।&lt;br /&gt;ऐसे वापस आरहे बंधुओं पर भी चर्च के ईशारे पर हमले हो रहे हैं । सुडीयाबरडा के लक्ष्मणभाई कनु भाई वाघमारे आयु 35 वर्ष ने 1/1/99 को आहवा पुलिस थाने में मामला दर्ज कराया कि वह और उसका परिवार 5 वर्ष पूर्ण ईसाई हुआ था । 29/12/98 को अपपनी मर्जी से पुन: हिंन्दू बन गया है इसके कारण गांव के सावलू, गुलाब, चारसू बेन, सीताराम वगैरह 12 लोग एक राय होकर उसके घर पर हमला करने आये और मारपीट की ।&lt;br /&gt;(गुजरात मित्र, नव गुजरात सूरत दिनांक 2/1/99)&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2369261783286222853-6253412125465783812?l=yugkipukar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://yugkipukar.blogspot.com/feeds/6253412125465783812/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2369261783286222853&amp;postID=6253412125465783812' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2369261783286222853/posts/default/6253412125465783812'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2369261783286222853/posts/default/6253412125465783812'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://yugkipukar.blogspot.com/2007/12/blog-post_21.html' title='धर्मान्तरण कैसे कैसे !'/><author><name>Gopal Kumar Azad</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17026889315614855803</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='22' src='http://bp1.blogger.com/_htfHEBB3KMM/R1OnPgC2oEI/AAAAAAAAAJ8/47Cqwt9SLzI/S220/15flag.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2369261783286222853.post-6672250422727482876</id><published>2007-12-20T05:14:00.000-08:00</published><updated>2007-12-20T05:17:37.840-08:00</updated><title type='text'>हिंदू छात्राओं को जबरन मुसलिम बनाने की कोशिशें</title><content type='html'>&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#ff6666;"&gt;हिंदू छात्राओं को जबरन मुसलिम बनाने की कोशिशें लंदन।&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt; ब्रिटेन के विश्वविद्यालय परिसरों में हिंदू छात्राओं को डरा-धमका कर मुसलिम बनाने की कोशिशें की जा रही हैं। इससे यहां रह रहे हिंदुओं में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। वहीं, ब्रिटिश पुलिस इस मामले में मुसलिम कट्टंरपंथी समूहों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करेगी। इसके साथ ही हिंदुओं की सुरक्षा के लिए हिंदू सेफ्टी फोरम भी गठित किया जाएगा। ब्रिटिश मेट्रोपोलिटन पुलिस के आयुक्त सर इयान ब्लेयर ने बुधवार को यहां हिंदू फोरम आफ ब्रिटेन तथा नेशनल हिंदू स्टूडेंट्स फोरम द्वारा आयोजित एक सम्मेलन में मुसलिम कट्टंरपंथियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने और हिंदू सेफ्टी फोरम गठित करने की घोषणा की। सर ब्लेयर ने कहा कि हिंदू समुदाय में ऐसी भावना है कि हमने उन पर अन्य समुदायों की तुलना में अधिक ध्यान नहीं दिया है। उन्होंने आश्वासन दिया कि वे दोषी कट्टरपंथी मुसलिम संगठनों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे। मेट्रोपोलिटन पुलिस हिंदू एसोसिएशन के सहयोग से आयोजित इस सम्मेलन में आपराधिक न्याय प्रणाली से जुडे़ युवा, सामुदायिक नेता एवं अन्य प्रतिष्ठित लोग शामिल हुए। सम्मेलन में पुलिस द्वारा गठित होने वाले हिंदू सेफ्टी फोरम द्वारा हिंदुओं के खिलाफ नस्लीय अपराधों की विशेष रूप से जांच कराए जाने के मुद्दे पर भी विचार किया जाएगा। हिंदू फोरम आफ ब्रिटेन के महासचिव रमेश कल्लीदई ने सम्मेलन में कहा कि पुलिस और अन्य एजेंसियों को इस बात का कोई अंदाजा नहीं है कि विश्वविद्यालय परिसरों में कट्टरपंथी मुसलिम संगठनों द्वारा हिंदू और सिख समुदाय के खिलाफ आक्रामक धर्मातरण के तरीके अपनाने और उन्हें डराए धमकाए जाने को लेकर इन समुदायों में बहुत आक्रोश पनप रहा है। उन्होंने कहा कि परिवार टूट रहे हैं। हमारी लड़कियों को मारा पीटा गया है जिससे उन्हें विश्वविद्यालय छोड़ना पड़ा है। हमें इन मुद्दों पर महज बातचीत नहीं बल्कि सकारात्मक कार्रवाई करने की जरूरत है। मुझे उम्मीद है कि प्रस्तावित हिंदू सेफ्टी फोरम इस मामलों से निपटने में सक्षम होगा। सम्मेलन में इसलामिक आतंकवाद के विशेषज्ञ टाम लंदलैक, सांसद टोनी मैकनल्टी, सुरक्षा एवं नीति मामलों के राज्यमंत्री डा. रॉब बर्कले, शाही अभियोजन सेवा में कार्यरत वरिष्ठतम हिंदू सामुदायिक नेता राज जोशी आदि अनेक जाने माने लोग हिस्सा ले रहे हैं।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2369261783286222853-6672250422727482876?l=yugkipukar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://yugkipukar.blogspot.com/feeds/6672250422727482876/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2369261783286222853&amp;postID=6672250422727482876' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2369261783286222853/posts/default/6672250422727482876'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2369261783286222853/posts/default/6672250422727482876'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://yugkipukar.blogspot.com/2007/12/blog-post_7146.html' title='हिंदू छात्राओं को जबरन मुसलिम बनाने की कोशिशें'/><author><name>Gopal Kumar Azad</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17026889315614855803</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='22' src='http://bp1.blogger.com/_htfHEBB3KMM/R1OnPgC2oEI/AAAAAAAAAJ8/47Cqwt9SLzI/S220/15flag.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2369261783286222853.post-1568354743628924865</id><published>2007-12-20T04:22:00.000-08:00</published><updated>2007-12-20T04:27:36.645-08:00</updated><title type='text'>हाथो मे चूडिया पहन रखी है क्या हिन्दूओ ने</title><content type='html'>वैसे तो पिछले डेढ़ वर्ष से केन्द्र में सत्तारूढ़ होने के बाद से संयुक्त प्रगतिशील गठबन्धन ने एक के बाद एक मुस्लिम तुष्टीकरण के ऐसे कदम उठाये हैं जो पिछले सारे रिकार्ड धवस्त करते हैं. पिछले वर्ष दो निजी टेलीविजन के साथ साक्षात्कार में कांग्रेस अध्यक्षा श्रीमती &lt;strong&gt;सोनिया गाँधी ने स्वीकार किया था कि मुसलमान कांग्रेस के स्वाभाविक मित्र हैं&lt;/strong&gt; और उन्हें अपने पाले में वापस लाने का पूरा प्रयास किया जायेगा. यह इस बात का संकेत था कि मुसलमानों को कुछ और विशेषाधिकार दिये जायेंगे.इसी बीच केन्द्र सरकार ने सेवा निवृत्त न्यायाधीश राजेन्द्र सच्चर की अध्यक्षता में एक आयोग बनाकर समाज के प्रत्येक क्षेत्र में मुसलमानों की सामाजिक व आर्थिक स्थिति का आकलन करने का निर्णय लिया. सेना में मुसलमानों की गिनती सम्बन्धी आदेश को लेकर उठे विवाद के बाद उस निर्णय को तो टाल दिया गया परन्तु न्यायपालिका, कार्यपालिका और विधायिका में मुस्लिम भागीदारी का सर्वेक्षण अवश्य किया गया.राजेन्द्र सच्चर आयोग ने अब अपनी विस्तृत रिपोर्ट प्रधानमन्त्री को सौंप दी है. इस रिपोर्ट के सार्वजनिक होने से पूर्व ही जिस प्रकार प्रधानमन्त्री डा. मनमोहन सिंह ने मुसलमानों की बराबर हिस्सेदारी की बात कह डाली वह तो स्पष्ट करता है कि सरकार ने मुसलमानों को आरक्षण देने का मन बना लिया है. इसकी झलक पहले भी मिल चुकी है जब आन्ध्र प्रदेश के मुख्यमन्त्री ने अपने प्रदेश में मुसलमानों को आरक्षण दिया परन्तु आन्ध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने उसे निरस्त कर दिया. फिर भी सरकार का तुष्टीकरण का खेल जारी रहा. संघ लोक सेवा आयोग में मुस्लिम प्रत्याशियों के लिये सरकारी सहायता, रिजर्व बैंक से मुसलमानों को ऋण की विशेष सुविधा, विकास योजनाओं का कुछ प्रतिशत मुसलमानों के लिये आरक्षित करना ऐसे कदम थे जो मुस्लिम आरक्षण की भूमिका तैयार कर रहे थे. अब सच्चर आयोग ने आरक्षण की सिफारिश न करते हुये भी मुस्लिम आरक्षण के लिये मार्ग प्रशस्त कर दिया है.&lt;strong&gt;मुसलमानों को बराबर की हिस्सेदारी का सवाल उठा ही क्यो? इसका उत्तर हे कि हमारे सेक्यूलर वामपंथी उदारवादी दलील देते हैं कि इस्लामी आतंकवाद मुसलमानों के पिछड़ेपन का परिणाम है. इसी तर्क के सन्दर्भ में दो महत्वपूर्ण तथ्यों को समझना समीचीन होगा. सच्चर आयोग ने ही अपनी रिपोर्ट में कहा है कि देश की जेलों में बन्द कैदियों की संख्या में मुसलमानों की संख्या उनकी जनसंख्या के अनुपात से काफी अधिक है. भारत की जेलों में कुल 102,652 मुसलमान बन्द हैं और उनमें भी 6 माह से 1 वर्ष की सजा काट रहे मुसलमानों की संख्या का प्रतिशत और भी अधिक है. कुछ लोग इसका कारण भी मुसलमानों के पिछड़ेपन को ठहरा सकते हैं पर ऐसा नहीं है.केवल भारत में ही नहीं फ्रांस, इटली, ब्रिटेन, स्काटलैण्ड और अमेरिका में भी जेलों में बन्द मुसलमानों का प्रतिशत उनकी कुल जनसंख्या के अनुपात में अधिक है. इसका कारण मुसलमानों का पिछड़ापन नहीं वरन् जेलों में गैर मुसलमान कैदियों का मुसलमानों द्वारा कराया जाने वाला धर्मान्तरण है. अभी हाल में मुम्बई में आर्थर रोड जेल में डी कम्पनी के गैंगस्टरों द्वारा हिन्दू कैदियों को धर्मान्तरित कर उन्हें मदरसों में जिहाद के प्रशिक्षण का मामला सामने आया था. यह उदाहरण स्पष्ट करता है कि मुसलमान का एकमेव उद्देश्य अपना धर्म मानने वालों की संख्या बढ़ाना है. इस कट्टरपंथी सोच को आरक्षण या विशेषाधिकार देने का अर्थ हुआ उन्हें अपना एजेण्डा पालन करने की छूट देना&lt;/strong&gt;.दूसरा उदाहरण 22 जून 2006 को अमेरिका स्थित सेन्ट्रल पिउ रिसर्च सेन्टर द्वारा किया गये सर्वेक्षण की रिपोर्ट है 6 मुस्लिम बहुल और 7 गेर मुस्लिम देशों में किये गये सर्वेक्षण के आधार पर प्रसिद्ध अमेरिकी विद्वान डेनियल पाइप्स ने निष्कर्ष निकाला कि दो श्रेणी के देशों के मुसलमान अलग-थलग और कट्टर हैं एक तो ब्रिटेन जहाँ उन्हें विशेषाधिकार प्राप्त है और दूसरा नाइजीरिया जहाँ शरियत का राज्य चलता है. अर्थात विशेषाधिकार मुसलमानों को और कट्टर बनाता है. ब्रिटेन का उदाहरण भारत के लिये प्रासंगिक है क्योंकि भारत की शासन व्यवस्था और राजनीतिक पद्धति काफी कुछ ब्रिटेन की ही भाँति है.इन दृष्टान्तों की पृष्ठभूमि में केन्द्र सरकार के मुस्लिम तुष्टीकरण के पागलपन को समझने की आवश्यकता है विशेषकर तब जब जनता पार्टी के अध्यक्ष सुब्रमण्यम स्वामी सार्वजनिक रूप से श्रीमती सोनिया गाँधी के साथ इस्लामी संगठनों के सम्पर्क की बात कह चुके हैं. ऐसा लगता है इस्लाम बहुसंख्यक हिन्दू समाज की कनपटी पर बन्दूक रखकर आतंकवादी घटनाओं के सहारे अपने लिये विशेषाधिकार चाहता है.वे जनसंख्या उपायों का पालन नहीं करेंगे और जनसंख्या बढ़ायेंगे , देश के किसी कानून का पालन नहीं करेंगें और ऊपर देश में बम विस्फोट कर आरक्षण तथा विशेषाधिकार भी प्राप्त करेंगे. यह फैसला हिन्दुओं को करना है कि उन्हें धिम्मी बनकर शरियत के अधीन जजिया देकर रहना है या फिर ऋषियों की परम्परा जीवित रखकर इसे देवभूमि बने रहने देना है.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2369261783286222853-1568354743628924865?l=yugkipukar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://yugkipukar.blogspot.com/feeds/1568354743628924865/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2369261783286222853&amp;postID=1568354743628924865' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2369261783286222853/posts/default/1568354743628924865'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2369261783286222853/posts/default/1568354743628924865'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://yugkipukar.blogspot.com/2007/12/blog-post_5034.html' title='हाथो मे चूडिया पहन रखी है क्या हिन्दूओ ने'/><author><name>Gopal Kumar Azad</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17026889315614855803</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='22' src='http://bp1.blogger.com/_htfHEBB3KMM/R1OnPgC2oEI/AAAAAAAAAJ8/47Cqwt9SLzI/S220/15flag.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2369261783286222853.post-7931243642553074750</id><published>2007-12-20T03:51:00.000-08:00</published><updated>2007-12-20T04:03:13.646-08:00</updated><title type='text'>मुसलमानों की सोच का सर्वेक्षण</title><content type='html'>&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#ff6666;"&gt;मुसलमानों की सोच का सर्वेक्षण&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt; &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;द्वारा डैनियल पाइप्सन्यूयार्क सन्27 जून, 2006&lt;br /&gt;मौलिक अंग्रेजी सामग्री:&lt;br /&gt;&lt;a href="http://www.danielpipes.org/article/3706"&gt;[Pew Poll on] How Muslims Think&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;हिन्दी अनुवाद - अमिताभ त्रिपाठी&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;विश्व भर के मुसलमान कैसा सोचते हैं ? यह जानने के लिये पिउ रिसर्च सेन्टर फॉर द पीपुल एण्ड प्रेस ने बसन्त ऋतु में उनके व्यवहार के सम्बन्ध में व्यापक सर्वेक्षण किया. "&lt;a href="http://pewglobal.org/reports/pdf/253.pdf"&gt;The Great Divide: How Westerners and Muslims View Each Other&lt;/a&gt;," शीर्षक से किये गये इस सर्वेक्षण में दो बैच में देशों को लिया गया. इनमें से छह देश वे थे जिनमें बड़ी मात्रा में मुस्लिम जनसंख्या है (मिस्र, इण्डोनेशिया, जार्डन , नाइजीरिया, पाकिस्तान और तुर्की) और चार पश्चिमी यूरोप के नई मुस्लिम अल्पसंख्यक जनसंख्या वाले देश (फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन और स्पेन)&lt;br /&gt;सर्वेक्षण में मुसलमानों के पश्चिम सम्बन्धी विचारों को देखते हुये जो परिणाम आये हैं वे पीड़ादायक तो हैं परन्तु आश्चर्यजनक कतई नहीं हैं. सर्वेक्षण के सारतत्व को तीन शीर्षकों में विभाजित किया जा सकता है.&lt;br /&gt;षड़यन्त्रकारी सिद्धान्त की ओर झुकाव- सर्वेक्षण में सम्मिलित मुस्लिम जनसंख्या में कहीं भी बहुमत में मुसलमान यह स्वीकार नहीं करते कि अमेरिका पर 11 सितम्बर 2001 का हमला अरबवासियों की करतूत थी. अरबवासियों को इस घटना के लिये उत्तरदायी न मानकर अमेरिका, इजरायल या अन्य एजेन्सियों को इसके लिये उत्तरदायी मानने वालों का प्रतिशत पाकिस्तान में 15 प्रतिशत से फ्रांसीसी मुसलमानों की 48 प्रतिशत की परिधि तक है. तुर्की में इस समय का नकारात्मक रूझान पुष्ट होता है कि 2002 में अरबवासियों को इस घटना के लिये उत्तरदायी मानने वालों का प्रतिशत 46 से घटकर अब 16 पर आ गया है.&lt;br /&gt;इसी प्रकार मुसलमान व्यापक रूप से यहूदियों के प्रति पूर्वाग्रह से ग्रस्त हैं और यह पूर्वाग्रह 28 प्रतिशत फ्रांसीसी मुसलमानों से लेकर जार्डन के 98 प्रतिशत मुसलमानों की परिधि में है. ( जार्डन में राजशाही की उदारता के बाद भी फिलीस्तीनी अरब जनसंख्या बहुमत में है). इससे भी आगे कुछ देशों में (विशेषकर मिस्र और जार्डन ) में मुसलमान यहूदियों को षड़यन्त्रकारी के रूप में देखते हुये पश्चिम और मुसलमानों के मध्य खराब सम्बन्धों के लिये प्रमुख रूप से उत्तरदायी मानते हैं.&lt;br /&gt;षड़यन्त्रकारी सिद्धान्त कुछ बड़े विषयों से भी जुड़ा है. पाकिस्तान के 14 प्रतिशत से जार्डन के 43 प्रतिशत मुसलमान मुस्लिम देशों में गरीबी का कारण इन देशों में लोकतन्त्र, शिक्षा के अभाव, जबर्दस्त भ्रष्टाचार और कट्टरपंथी इस्लाम को न मानकर अमेरिका और पश्चिमी देशों की नीतियों को मानते हैं.&lt;br /&gt;यह षड़यन्त्रवाद इस बात की ओर भी संकेत करता है कि उम्मा वास्तविकता का सामना करने के स्थान पर योजनाओं और षड़यन्त्रों के सुरक्षित वातावरण में घिरे रहना चाहता है. इससे आधुनिकता के साथ सांमजस्य बिठा पाने में उनकी असफलता की पोल भी खुलती है.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#000000;"&gt;आतंकवाद के लिये समर्थन-सर्वेक्षण में मतदान करने वाली समस्त मुस्लिम जनसंख्या ने ओसामा बिन लादेन के साथ बहुमत के आधार पर ठोस समर्थन जताया है. तुर्की में 8 प्रतिशत से लेकर नाइजीरिया में 72 प्रतिशत की परिधि में मुसलमान ओसामा बिन लादेन में विश्वास व्यक्त करते हैं. इसी प्रकार आत्मघाती हमले भी लोकप्रिय हैं. जर्मनी में 13 प्रतिशत से लेकर नाइजीरिया में 69 प्रतिशत तक मुसलमान इसे न्यायसंगत ठहराते हैं. इस डरावनी संख्या से सुझाव मिलता है कि मुसलमानों के आतंकवाद की जड़ें काफी गहरी हैं और आने वाले वर्षों में भी यह खतरा बरकरार रहेगा.&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#000000;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;ब्रिटेन और नाइजीरिया के मुसलमान अधिक अलग-थलग हैं- ब्रिटेन एक विडम्बनापूर्ण देश के रूप में सामने आया है. पश्चिम के अन्य किसी देश की अपेक्षा यहाँ के गैर-मुसलमान इस्लाम और मुसलमानों के प्रति कहीं अधिक सकारात्मक विचार रखते हैं. उदाहरण के लिये सर्वेक्षण के नमूने में केवल 32 प्रतिशत लोग ही मुसलमानों को हिंसक मानते हैं जो कि फ्रांस, जर्मनी और स्पेन के अपने सहयोगियों की अपेक्षा कम है जहाँ यह प्रतिशत क्रमश: 41 प्रतिशत, 52 प्रतिशत और 60 प्रतिशत है. मोहम्मद कार्टून विवाद में भी मुस्लिम व्यवहार के प्रति ब्रिटेन के लोगों ने सहानुभूति दिखाई थी. इससे भी विस्तृत रूप में खराब मुस्लिम पश्चिम सम्बन्धों के लिये ब्रिटेन के लोग मुसलमानों को कम दोषी ठहराते हैं.&lt;br /&gt;परन्तु ब्रिटेन के लोगों द्वारा मुसलमानों के साथ इस पक्षपात के बदले में यहाँ के मुसलमानों का व्यवहार पूरे यूरोप में सबसे अधिक पश्चिम विरोधी है. उनमें से बहुत से पश्चिम के लोगों को हिंसक, लालची, अनैतिक और घमण्डी मानते हैं जबकि वहीं फ्रांस, जर्मनी और स्पेन में मुसलमानों की पश्चिम विरोधी धारणा इतनी तीव्र नहीं है. इसके अलावा 11 सितम्बर के हमले के लिये यहूदियों के उत्तरदायित्व और पश्चिमी समाज में महिलाओं की स्थिति के सम्बन्ध में उनके विचार उल्लेखनीय रूप से अधिक अतिवादी है.&lt;br /&gt;ब्रिटेन की यह स्थिति &lt;a href="http://www.danielpipes.org/blog/298"&gt;लन्दनिस्तान&lt;/a&gt; के रूझान को व्यक्त करती है जहाँ ब्रिटेनवासी सक्रिय रूप से रक्षात्मक होकर सिकुड़ रहे हैं और मुसलमान इस इस कमजोरी पर आक्रामक ढंग से प्रतिक्रिया कर रहे हैं.&lt;br /&gt;सामान्य रूप से नाइजीरिया के मुसलमान पश्चिम-मुस्लिम सम्बन्धों , पश्चिम की काल्पनिक अनैतिकता और घमण्डीपन तथा बिन लादेन और आतंकवाद जैसे मुद्दों पर सर्वाधिक आक्रामक और शत्रुवत् विचार रखते हैं. निश्चित रूप से इस अतिवाद का करण नाइजीरिया में ईसाई मुसलमानों का पारस्परिक हिंसक सम्बन्ध है.&lt;br /&gt;विडम्बना है कि उन देशों में मुसलमान सर्वाधिक अलग-थलग हैं जहाँ या तो अधिकतर आत्मसात् किये गये हैं या एकदम नहीं किये गये हैं. इससे सुझाव मिलता है कि मध्यम मार्ग सर्वाधिक उपयुक्त है जहाँ न तो ब्रिटेन जैसा मुसलमानों को विशेषाधिकार प्राप्त है और न ही नाइजीरिया जैसी शत्रुवत् स्थिति काफी आगे बढ़ चुकी है.&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#ff6666;"&gt;कुल मिलाकर पिउ सर्वेक्षण मुस्लिम विश्व के एक कोने से दूसरे कोने तक व्याप्त अखंडनीय संकट का संदेश देता है&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2369261783286222853-7931243642553074750?l=yugkipukar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://yugkipukar.blogspot.com/feeds/7931243642553074750/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2369261783286222853&amp;postID=7931243642553074750' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2369261783286222853/posts/default/7931243642553074750'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2369261783286222853/posts/default/7931243642553074750'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://yugkipukar.blogspot.com/2007/12/blog-post_20.html' title='मुसलमानों की सोच का सर्वेक्षण'/><author><name>Gopal Kumar Azad</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17026889315614855803</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='22' src='http://bp1.blogger.com/_htfHEBB3KMM/R1OnPgC2oEI/AAAAAAAAAJ8/47Cqwt9SLzI/S220/15flag.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2369261783286222853.post-3521702498815907056</id><published>2007-12-13T04:52:00.000-08:00</published><updated>2007-12-13T06:40:48.368-08:00</updated><title type='text'>इसलाम, फतवा और मुस्लिम औरत</title><content type='html'>&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#ff6666;"&gt;हिजाब न पहनने पर बेटी की हत्या, टोरंटो (आई ए एन एस)&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#000000;"&gt;पाकिस्तानी मूल की एक कनाडाई लरकी द्वारा हिजाब पहनने से इंकार करने पर उसके पिता ने उसकी हत्या कर दी.दक्षिण एशियाई नागरिको के उपनगर मिस्सिसुआगा में रहने वाली 16 वर्षीय अक्सा को उसके पिता मुह्हमद परवेज ने गला घोट कर मार डाला अक्सा के सहपाठियों के अनुसार उसके और उसके परिवार वालों के वीच  हिजाब को लेकर कुछ समय से तनाव चल रहा था वाह घर से निकलते समय हिजाब पहनती थी और स्चूल पहुचकर आधुनिक कपरे पहन लेती थी,मुस्लिम समुदाय में मूर्ख तो मूर्ख पढे लिखे और आधुनिक लोग भी कट्टरता को भूल नहीं पा रहे हैं ये अपने कट्टरपंथी इसलाम और कुरान में लिखे फालतू बकबासों का पालन करने के लिए अपने बच्चो तक को नहीं छोर रहे  तो किसी और को क्या छोरेंगे       &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#000000;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#ff6666;"&gt;करनी मामा की और सजा मिली मासूम भांजी को &lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#666666;"&gt;मुजफ्फरनगर में मुस्लिम जातीय पंचायत ने मानवता की सारी हदों को पर करते हुए एक पंचायत में एक 14 वर्ष की मासूम नवालिग़ बालिका को अपने से दुगने उम्र के लरके से निकाह करने का फरमान सुनाया, लरकी रुबीना के मामा के किये गए पाप की सजा इस नवलिग़ को मिली, रुबीना के मामा ने एक नवालिग़ लरकी को भगा कर ले गया और इसके लिए वहा के पंचायत की  बिरादरी के मुखिया जफरुद्दीन ने फैसला सुनाया की लरकी के बदले लरकी ही ली जायेगी और नवालिग़ के बदले लरकी भी नवालिग़ ही होनी चाहिए, रुबीना के पिता को वहा उपस्थित बिरादरी ने हुक्म दिया की वाह अपनी १४ वर्षीय पुत्री रुबीना का निकाह सादा (जिसकी लरकी को लेकर रुबीना का मामा फरार हुआ ) के चचेरे भाई से कर दे रुबीना का पिता उस समय हवालात में बंद था इसलिए पंचायत का फैसला उसे थाने में जाकर सुना दिया गया तो वाह राजी भी हो गया, कथित बिरादरी के लोगो ने यह फैसला रुबीना को सुनते हुए कहा की तुम्हारे पिता पुलिस के चंगुल से तभी छूटेंगे जब तुम निकाह की मंजूरी दे दोगी पिता की रिहाई के लिए उसने हमी भर di अनन फानन में रुबीना को हबीब के घर बुलाया और उसकी निकाह उससे दो गुने उम्र के साजिद से कर दी गयी और पुलिस मूकदर्शक बनी रही यह उनलोगों की वह के मौलवी की तलिवानी संस्किरती नहीं तो और क्या है ?           &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#666666;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#ff6666;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#ff6666;"&gt;बलात्कार की शिकार लड़की को 200 कोड़े मारने की सजा जेद्दाह :&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt; जेद्दाह में एक सऊदी अदालत ने पिछले साल सामूहिक बलात्कार की शिकार लड़की को 90 कोड़े मारने की सजा दी थी। उसके वकील ने इस सजा के खिलाफ अपील की तो अदालत ने सजा बढ़ा दी और हुक्म दिया: '200 कोड़े मारे जाएं।' लड़की को 6 महीने कैद की सजा भी सुना दी। अदालत का कहना है कि उसने अपनी बात मीडिया तक पहुंचाकर न्याय की प्रक्रिया पर असर डालने की कोशिश की। कोर्ट ने अभियुक्तों की सजा भी दुगनी कर दी।इस फैसले से वकील भी हैरान हैं। बहस छिड़ गई है कि 21वीं सदी में सऊदी अरब में औरतों का दर्जा क्या है? उस पर जुल्म तो करता है मर्द, लेकिन सबसे ज्यादा सजा भी औरत को ही दी जाती है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#ff6666;"&gt;&lt;strong&gt;बेटी से निकाह कर उसे गर्भवती किया जलपाईगुड़ी :&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले में एक व्यक्ति ने सारी मर्यादाओं को तोड़ते हुए अपनी सगी बेटी से ही शादी कर ली और उसे गर्भवती भी कर दिया है। यही नहीं , वह इसे सही ठहराने के लिए कहा रहा है कि इस रिश्ते को खुदा की मंजूरी है। सबसे आश्चर्यजनक बात तो यह है कि इस निकाह का गवाह कोई और नहीं खुद लड़की की मां और उस शख्स की बीवी थी।जलपाईगुड़ी के कसाईझोरा गांव के रहने वाले अफज़ुद्दीन अली ने गांव वालों से छिपाकर अपनी बेटी से निकाह किया था इसलिए उस समय किसी को इस बारे में पता नहीं चला। अब छह महीने बाद लड़की गर्भवती हो गई है ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#ff6666;"&gt;मस्जिद में नमाज अदा करने पर महिलाओं को मिला फतवा गुवाहाटी (टीएनएन) : &lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;असम के हाउली टाउन में कुछ महिलाओं के खिलाफ फतवा जारी किया गया क्योंकि उन्होंने एक मस्जिद के भीतर जाकर नमाज अदा की थी।असम के इस मुस्लिम बाहुल्य इलाके की शांति उस समय भंग हो गई , जब 29 जून शुक्रवार को यहां की एक मस्जिद में औरतों के एक समूह ने अलग से बनी एक जगह पर बैठकर जुमे की नमाज अदा की। राज्य भर से आई इन महिलाओं ने मॉडरेट्स के नेतृत्व में मस्जिद में प्रवेश किया। इस मामले में जमाते इस्लामी ने कहा कि कुरान में महिलाओं के मस्जिद में नमाज पढ़ने की मनाही नहीं है।जिले के दीनी तालीम बोर्ड ऑफ द कम्युनिटी ने इस कदम का विरोध करते हुए कहा कि इस तरीके की हरकत गैरइस्लामी है। बोर्ड ने मस्जिद में महिलाओं द्वारा नमाज करने को रोकने के लिए फतवा भी जारी किया।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#ff6666;"&gt;कम कपड़े वाली महिलाएं लावारिस गोश्त की तरह मौलवी: मेलबर्न (एएनआई) :&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt; एक मौलवी के महिलाओं के लिबास पर दिए गए बयान से ऑस्ट्रेलिया में अच्छा खासा विवाद उठ खड़ा हुआ है। मौलवी ने कहा है कि कम कपड़े पहनने वाली महिलाएं लावारिस गोश्त की तरह होती हैं , जो ' भूखे जानवरों ' को अपनी ओर खींचता है।रमजान के महीने में सिडनी के शेख ताजदीन अल-हिलाली की तकरीर ने ऑस्ट्रेलिया में महिला लीडर्स का पारा चढ़ा दिया। शेख ने अपनी तकरीर में कहा कि सिडनी में होने वाले गैंग रेप की वारदातों के लिए के लिए पूरी तरह से रेप करने वालों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।500 लोगों की धार्मिक सभा को संबोधित करते हुए शेख हिलाली ने कहा , ' अगर आप खुला हुआ गोश्त गली या पार्क या किसी और खुले हुए स्थान पर रख देते हैं और बिल्लियां आकर उसे खा जाएं तो गलती किसकी है , बिल्लियों की या खुले हुए गोश्त की ?&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#ff6666;"&gt;&lt;strong&gt;'कामकाजी महिलाएं पुरुषों को दूध पिलाएं फतवा, काहिरा :&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;काहिरा : मिस्र में पिछले दिनों आए दो अजीबोगरीब फतवों ने अजीब सी स्थिति पैदा कर दी है। ये फतवे किसी ऐरे-गैरे की ओर से नहीं बल्कि देश के टॉप मौलवियों की ओर से जारी किए जा रहे हैं। देश के बड़े मुफ्तियों में से एक इज्ज़ात आतियाह ने कुछ ही दिन पहले नौकरीपेशा महिलाओं द्वारा अपने कुंआरे पुरुष को-वर्करों को कम से कम 5 बार अपनी छाती का दूध पिलाने का फतवा जारी किया। तर्क यह दिया गया कि इससे उनमें मां-बेटों की रिलेशनशिप बनेगी और अकेलेपन के दौरान वे किसी भी इस्लामिक मान्यता को तोड़ने से बचेंगे। इस्लाम के अंतर्गत किसी महिला का उस व्यक्ति से विवाह संबंध नहीं हो सकता जिसे उसने दूध पिलाया हो। दरअसल यह नियम मां-बेटे के बीच शारीरिक संबंधों को रोकने के लिए है लेकिन आतिया का कहना है कि इसे वयस्कों पर भी लागू किया जाए। इससे उनमें मां-बेटे का रिश्ता पनपेगा और वे अवैध संबंधों से बचे रहेंगे। इस फतवे से उठा विवाद अभी ठंडा भी नहीं हुआ था कि एक और नया फतवा आ गया। इस फतवे में यह कहा गया है कि पैगंबर मोहम्मद के साथी उनका पेशाब पीते थे और ऐसा करना पुण्य का काम है। यह फतवा जारी करते हुए मौलवी अली गुमआ ने हदीथ का हवाला दिया। गुमआ का कहना है कि जिस तरह मां अपने बच्चे के मल-मूत्र पर नाक-भौं नहीं सिकोड़ती क्योंकि वह उससे बेइंतहा प्यार करती है , उसी तरह हज़रत मोहम्मद का थूक , पसीना , बाल , पेशाब और रक्त भी पाक हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#ff6666;"&gt;&lt;strong&gt;गले लगाना बना फतवे का कारण, इस्लामाबाद (भाषा) :&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt; इस्लामाबाद की लाल मस्जिद के धर्मगुरुओं ने पर्यटन मंत्री नीलोफर बख्तियार के खिलाफ तालिबानी शैली में एक फतवा जारी किया है और उन्हें तुरंत हटाने की मांग की है।बख्तियार पर आरोप है कि उन्होंने फ्रांस में पैराग्लाइडिंग के दौरान अपने इंस्ट्रक्टर को गले लगाया। इसकी वजह से इस्लाम बदनाम हुआ है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#ff6666;"&gt;&lt;strong&gt;फतवा: ससुर को पति पति को बेटा&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;एक फतवा की शिकार मुजफरनगर की ईमराना भी हुई। जो अपने ससुर के हवश का शिकार होने के बाद उसे आपने ससुर को पति ओर पति को बेटा मानने को कहा ओर ऐसा ना करने पे उसे भी फतवा जारी करने की धमकी मिली।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#ff6666;"&gt;&lt;strong&gt;फतवा क्या है ?&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;जो लोग फतवों के बारे में नहीं जानते, उन्‍हें लगेगा कि यह कैसा समुदाय है, जो ऐसे फतवों पर जीता है। फतवा अरबी का लफ्ज़ है। इसका मायने होता है- किसी मामले में आलिम ए दीन की शरीअत के मुताबिक दी गयी राय। ये राय जिंदगी से जुड़े किसी भी मामले पर दी जा सकती है। फतवा यूँ ही नहीं दे दिया जाता है। फतवा कोई मांगता है तो दिया जाता है, फतवा जारी नहीं होता है। हर उलमा जो भी कहता है, वह भी फतवा नहीं हो सकता है। फतवे के साथ एक और बात ध्‍यान देने वाली है कि हिन्‍दुस्‍तान में फतवा मानने की कोई बाध्‍यता नहीं है। फतवा महज़ एक राय है। मानना न मानना, मांगने वाले की नीयत पर निर्भर करता है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2369261783286222853-3521702498815907056?l=yugkipukar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://yugkipukar.blogspot.com/feeds/3521702498815907056/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2369261783286222853&amp;postID=3521702498815907056' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2369261783286222853/posts/default/3521702498815907056'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2369261783286222853/posts/default/3521702498815907056'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://yugkipukar.blogspot.com/2007/12/blog-post.html' title='इसलाम, फतवा और मुस्लिम औरत'/><author><name>Gopal Kumar Azad</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17026889315614855803</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='22' src='http://bp1.blogger.com/_htfHEBB3KMM/R1OnPgC2oEI/AAAAAAAAAJ8/47Cqwt9SLzI/S220/15flag.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2369261783286222853.post-1333566173658289564</id><published>2007-10-31T05:14:00.000-07:00</published><updated>2007-10-31T05:15:11.071-07:00</updated><title type='text'>आतंक के शिक्षा केन्द्र</title><content type='html'>अभी इस वर्ष के आरम्भ तक भारत में चल रहे इस्लामी आतंकवाद को उसके वैश्विक और विचारधारागत स्वभाव से जोड़कर देखने पर देश के नेताओं, लेखकों, समीक्षकों और रणनीतिकारों को गहरी आपत्ति थी. यहाँ तक कि भारत के मुसलमानों को इस आतंकी नेटवर्क या विचार से परे सिद्ध करने के लिये तर्क दिये जाते थे कि भारत का कोई भी मुसलमान अफगानिस्तान और ईराक में तालिबान या अल-कायदा की ओर से लड़ने नहीं गया. परन्तु सम्भवत: ये समीक्षक भारत में स्थित उन इस्लामी संस्थानों को लेकर चिन्तित नहीं थे जो इस धरती से पूरे विश्व के मुसलमानों को कट्टरता और आतंक की शिक्षा दे रहे हैं.     जी हाँ ये चौंकने का विषय नहीं है भारत की धरती पर स्थित दो इस्लामी संस्थान समस्त विश्व में विध्वंस की मानसिकता रखने वाले आतंकियों के प्रेरणास्रोत हैं. लन्दन में अनेक विमानों को उड़ाने के षड़यन्त्र की पूछताछ में ब्रिटेन की पुलिस को पता चला है कि इस षड़यन्त्र में सम्मिलित कुल 23 लोगों में अनेक तबलीगी जमात के कट्टर समर्थक हैं. इस संगठन का ब्रिटेन की अधिकांश मस्जिदों पर नियन्त्रण है.        तबलीगी जमात की स्थापना 1927 में भारत में मोहम्मद इलयास नामक मुस्लिम द्वारा की गयी थी जिसका मुख्यालय दिल्ली के निजामुद्दीन क्षेत्र में है. इस संगठन की स्थापना इस्लाम में धर्मान्तरित हिन्दुओं को कट्टर मुसलमान बनाने के लिये गयी थी. इस संगठन के अनुयायियों को दाढ़ी बढ़ानी पड़ती है, पाँचो वक्त नमाज पढ़नी होती है तथा ये बड़ा कुर्ता और छोटा पायजामा पहनते हैं.     लन्दन षड़यन्त्र के एक संदिग्ध असाद सरवर के भाई अमजद ने ब्रिटेन के एक टी.वी चैनल को बताया कि उसके भाई ने विश्वविद्यालय की पढ़ाई छोड़ दी और तबलीगी जमात की साप्ताहिक बैठकों में जाने लगा. केवल असद ही नहीं अनेक संदिग्धों के रिश्तेदारों ने इनके तबलीगी जमात से जुड़ाव की पुष्टि की है. यह पहला अवसर नहीं है जब आतंकवादी घटनाओं को अंजाम देने वालों का जमात से लगाव और सम्पर्क रहा है. इससे पूर्व  जुलाई 2005 में हुये लन्दन विस्फोटों के दो फिदाईन सिद्दीक अहमद खान और शहजाद तनवीर ने तबलीग के नियन्त्रण वाली मस्जिद का दौरा किया था. इसके साथ ही अल-कायदा के अनेक सदस्यों ने अमेरिका के समक्ष स्वीकार किया कि उन्होंने पाकिस्तान में तबलीग के शिविरों में भाग लिया था. इसके अतिरिक्त गोधरा में अयोध्या से वापस लौट रहे कारसेवकों को साबरमती में जीवित जलाने की घटना में भी जाँच में तबलीगी जमात का नाम आया था.            इसके अतिरिक्त भारत का दूसरा इस्लामी संस्थान जो आतंक का शिक्षा केन्द्र है वह है दारूल उलूम देवबन्द. राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से 70 कि.मी की दूरी पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में देवबन्द नामक स्थान पर स्थित यह मदरसा विश्व के बड़े इस्लामी आतंकवादियों की विचारधारा का पोषक रहा है. तालिबान अमीर मुल्ला उमर, जैश-ए-मोहम्मद का संस्थापक मसूद अजहर, पाकिस्तानी राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ इसी देवबन्दी विचारधारा के अनुयायी हैं. जिहाद का अनुपालन करने वाली दो शाखाओं बरेलवी और देवबन्दी में मूलभूत अन्तर जिहाद के प्रकार को लेकर है. बरेलवी शाखा धीरे चलने में विश्वास करते हैं जबकि देवबन्दी ओसामा के जिहाद में भरोसा रखते हैं. समस्त विश्व में आज  जिहाद के नाम पर आतंकवाद फैलाने वाले सभी संगठनों में अधिकांश की प्रेरणास्रोत देवबन्दी विचारधारा है.     इस स्थिति को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि 21वीं शताब्दी में इस्लामी आतंकवाद का प्रेरणा स्थल भारत हो जायेगा जैसा कभी 20वीं शताब्दी में सउदी अरब और उसका वहाबी चिन्तन था.     अच्छा होता हमारे देश के रणनीतिकार इस वास्तविकता को समझकर भारत को आतंकी शिक्षाकेन्द्र बनने से रोकते न कि इस मुगालते में जीते कि भारत किसी भी प्रकार से वैश्विक जिहाद का अंग नहीं है.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2369261783286222853-1333566173658289564?l=yugkipukar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://yugkipukar.blogspot.com/feeds/1333566173658289564/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2369261783286222853&amp;postID=1333566173658289564' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2369261783286222853/posts/default/1333566173658289564'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2369261783286222853/posts/default/1333566173658289564'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://yugkipukar.blogspot.com/2007/10/blog-post_9034.html' title='आतंक के शिक्षा केन्द्र'/><author><name>Gopal Kumar Azad</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17026889315614855803</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='22' src='http://bp1.blogger.com/_htfHEBB3KMM/R1OnPgC2oEI/AAAAAAAAAJ8/47Cqwt9SLzI/S220/15flag.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2369261783286222853.post-3889309170406676478</id><published>2007-10-31T05:12:00.000-07:00</published><updated>2007-10-31T05:13:44.158-07:00</updated><title type='text'>वन्देमातरम् पर आपत्ति</title><content type='html'>एक बार फिर वन्देमातरम् विवादों में है. कारण वही पुरानी इस्लामी जिद कि हमारे लिये देश से बढ़कर धर्म है. हालिया विवाद का आरम्भ उस समय हुआ जब मानव संसाधन मन्त्रालय की ओर से एक शासनादेश जारी कर वन्देमातरम् की रचना के शताब्दी समारोहों को समस्त देश में मनाने के उद्देश्य से समस्त विद्यालयों को आदेशित किया गया कि 7 सितम्बर को उनके यहाँ वन्देमातरम् के दो प्रारम्भिक चरण अनिवार्य रूप से गवाये जायें. इस शासनादेश के जारी होते ही मुस्लिम संगठनों और उलेमाओं ने वन्देमातरम् को इस्लाम के विरूद्ध बताते हुये कहा कि इसे गाते समय उन्हें भारतमाता की आराधना करनी होगी जबकि उनका धर्म अल्लाह और रसूल के अतिरिक्त किसी अन्य की प्रशंसा या आराधना की अनुमति नहीं देता. वन्देमातरम् के अनिवार्य गायन पर आपत्ति करने वालों में मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य जफरयाब जिलानी प्रमुख थे फिर उनका अनुसरण किया दिल्ली के शाही इमाम अहमद बुखारी ने. आल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड मुसलमानों का प्रतिनिधि संगठन है इसलिये उसके प्रतिनिधि द्वारा वन्देमातरम् न गाने की बात करने से यह स्पष्ट होता है कि आम मुसलमान इसी विचार का है. मुसलमानों द्वारा वन्देमातरम् गाने की अनिवार्यता पर आपत्ति उठाये जाते ही मानव संसाधन मन्त्री ने कहा कि इसे गाना अनिवार्य नहीं है. अब सवाल यह है कि क्या देशभक्ति या राष्ट्रीय कर्तव्य से जुड़े प्रश्नों का निर्धारण भी वोट बैंक को ध्यान में रखकर किया जायेगा. आखिर किस स्तर तक इस देश में इस्लामी हठधर्मिता स्वीकार की जायेगी. वैसे वन्देमातरम् को इस्लामी हठधर्मिता के समस्त नतमस्तक कराने का श्रेय भी कांग्रेस और उसके दो महापुरूषों महात्मा गाँधी और जवाहर लाल नेहरू को ही जाता है. 1923 में काग्रेस के काकीनाडा अधिवेशन में जब मुस्लिम प्रतिनिधियों ने इसे इस्लाम विरोधी बताकर इसे न बजाने की माँग की और सम्मेलन से बाहर आकर कान में अंगुली डालकर खड़े हो गये तो भी कांग्रेस ने इस विभाजनकारी विषाक्त मानसिकता के मनोविज्ञान को पहचानने के स्थान पर उसे प्रश्रय ही दिया. आज एक बार पुन: कांग्रेस वही भूल दुहराने जा रही है और राष्ट्र में ही एक और उपराष्ट्र निर्मित करने वाले तत्वों के समस्त नतमस्तक हो रही है. वन्देमातरम् न गाने का हठधर्मितापूर्ण निर्णय भारत के मुसलमानों और उनके जनमत निर्माताओं को कटघरे में खड़ा करता है जो आधे-अधूरे मन से राष्ट्रभक्ति की कसमें खाते हैं. इस घटनाक्रम की पृष्ठभूमि में उस सम्मेलन की चर्चा करना भी समीचीन प्रतीत हो रहा है जो 20 और 21 सितम्बर को संसद भवन में जमायत-उलेमा-हिन्द की पहल पर आतंकवाद के विषय पर आयोजित की गई थी. इस सम्मेलन में देश के अनेक प्रमुख उलेमा आये थे. सम्मेलन में सरकार की ओर से पहले दिन सूचना प्रसारण मन्त्री और दूसरे दिन गृहमन्त्री और स्वयं प्रधानमन्त्री ने भाग लिया. इस सम्मेलन में दर्शक के रूप में उपस्थित रहे लोगों के अनुसार दोनों ही दिन मुस्लिम प्रतिनिधियों की बात से ऐसा नहीं लगा कि वे इस्लामी आतंकवाद का प्रतिरोध करने के प्रति गम्भीर हैं. पहले दिन उनका सारा जोर मीडिया को कोसने में लगा और कुछ प्रतिनिधियों ने तो मीडिया को अमेरिका और इजरायल का जासूस और दलाल की संज्ञा दे डाली. इन प्रतिनिधियों के अनुसार मीडिया मुसलमानों को बदनाम कर रहा है. प्रतिनिधियों ने सूचना प्रसारण मन्त्री से आग्रह किया कि मीडिया पर अंकुश लगाया जाये क्योंकि वे मदरसों और मस्जिदों को आतंकवाद का केन्द्र बता रहे हैं. इस पूरी बहस में आतंकवाद की धार्मिक प्रेरणा, उसके समाधान को लेकर कोई पहल मुस्लिम उलेमाओं की ओर से नहीं हुई. केवल प्रलाप हुआ कि मुसलमानों का उत्पीड़न हो रहा है , उनकी छवि खराब की जा रही है. सम्मेलन के दूसरे दिन वही घिसा-पिटा प्रस्ताव कि इस्लाम में हिंसा के लिये कोई स्थान नहीं है और सभी उपस्थित प्रतिनिधि आतंकवादी कृत्य की निन्दा करते हैं. अच्छा होता इन कर्मकाण्डी प्रस्तावों से परे कुछ ऐसा ठोस और दीर्घगामी कदम ये लोग उठाते जो इनकी ईमानदारी को पुष्ट करता. आखिर आज तक दुनिया के किसी भी कोने में आतंकवाद के विरूद्ध मुसलमानों की वैसी रैली क्यों नहीं आयोजित हो सकी जैसी पैगम्बर के कार्टून के प्रकाशित होने पर या अमेरिकी राष्ट्रपति के भारत आगमन पर हुई थी. आखिर यही उलेमा मुस्लिम जनमानस को आतंकवाद के विरूद्ध आन्दोलित करने मे क्यों असफल हैं या तो मुसलमान इस सम्बन्ध में उनसे सहमत नहीं है या फिर उलेमा स्वयं आतंकवादियों से असहमत नहीं हैं. आखिर जिस देश में मुसलमान विशेषाधिकारों से पुरस्कृत है. जिसे देश का कानून या राष्ट्रीय कर्तव्य पालन न करने की स्वतन्त्रता है उसका उत्पीड़न कहाँ हो रहा है , हाँ इतना अवश्य है कि समाज के सभी क्षेत्रों पर दबाव बनाकर वह अपने इस्लामी एजेण्डे को गतिशील और प्रभावी बनाता जा रहा है. इसका नवीनतम उदाहरण तसलीमा नसरीन का वह वक्तव्य है जो उन्होंने केरल में एक पुस्तक विमोचन के अवसर पर दिया है और इस्लाम की वास्तविकता से समाज को परिचित कराया है.आज आवश्यकता इसी बात की है कि तुलनात्मक धर्मों के अध्ययन की परम्परा विकसित होनी चाहिये इस्लाम के उद्देश्य और उसकी कलाबाजियों से हम परिचित हो सकें.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2369261783286222853-3889309170406676478?l=yugkipukar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://yugkipukar.blogspot.com/feeds/3889309170406676478/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2369261783286222853&amp;postID=3889309170406676478' title='2 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2369261783286222853/posts/default/3889309170406676478'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2369261783286222853/posts/default/3889309170406676478'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://yugkipukar.blogspot.com/2007/10/blog-post_7459.html' title='वन्देमातरम् पर आपत्ति'/><author><name>Gopal Kumar Azad</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17026889315614855803</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='22' src='http://bp1.blogger.com/_htfHEBB3KMM/R1OnPgC2oEI/AAAAAAAAAJ8/47Cqwt9SLzI/S220/15flag.jpg'/></author><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2369261783286222853.post-5010378954871423930</id><published>2007-10-31T05:11:00.000-07:00</published><updated>2007-10-31T05:12:09.219-07:00</updated><title type='text'>एक और फतवा</title><content type='html'>अभी जब गणेश जी सहित देश के अनेक मन्दिरों में विभिन्न देवप्रतिमाओं ने दुग्ध पान किया तो सामान्य तौर पर हिन्दुओं ने इसे श्रद्धा के तौर पर नकारा भले न हो परन्तु धर्मगुरू और अन्य लोगों ने इसे अन्धविश्वास ही अधिक माना. इससे हिन्दू धर्म की तार्किकता प्रमाणित होती है.      परन्तु इसी देश में ऐसे धर्म के अनुयायी भी रहते हैं जो न केवल धर्म पालन में वरन् दिन प्रतिदिन के नियम पालन में भी धार्मिक कानून से ही संचालित होते हैं. अभी वन्देमातरम् पर फतवे की गूँज कम भी नहीं हुई थी कि सहारनपुर स्थित सुन्नी मुसलमानों के सबसे बड़े संस्थान दारूल उलूम देवबन्द ने लखनऊ के सलीम चिश्ती के प्रश्न के उत्तर में फतवा जारी किया है कि बैंक से ब्याज लेना या जीवन बीमा कराना इस्लामी कानून या शरियत के विरूद्ध है. दारूल उलूम के दो मुफ्तियों के साथ परामर्श कर मोहम्मद जफीरूद्दीन ने यह फतवा जारी किया . आल इण्डिया पर्सनल लॉ बोर्ड के अनेक सदस्यों ने इसे उचित ठहराया है. उनके अनुसार जीवन बीमा कराने का अर्थ है अल्लाह की सर्वोच्चता को चुनौती देना.       यह नवीनतम उदाहरण मुसलमानों की स्थिति पर फिर से विचार करने के लिये पर्याप्त है. आखिर जब इस आधुनिक विश्व में जब सभी धर्मावलम्बी लौकिक विषयों में देश के कानूनों का अनुपालन करते हैं तो फिर एक धर्म अब भी लौकिक सन्दर्भों में शरियत का आग्रह क्यों रखता है.      हो सकता है बहुत से लोगों का तर्क हो कि कितने मुसलमान शरियत के आधार पर चलते हैं, परन्तु प्रश्न शरियत के पालन का उतना नहीं है जितना यह कि शरियत का पालन कराने की इच्छा अब भी मौलवियों और मुस्लिम धर्मगुरूओं में है. यही सबसे खतरनाक चीज है क्योंकि शब्द और विचार ही वे प्रेरणा देते हैं  जिनसे व्यक्ति कुछ भी कर गुजरने का जज्बा पालता है. मुस्लिम समस्या का मूल यहाँ है, जब तक उनकी इस मानसिकता में बदलाव नहीं आयेगा प्रत्येक युग में इस्लामी कट्टरता का खतरा बना रहेगा.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2369261783286222853-5010378954871423930?l=yugkipukar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://yugkipukar.blogspot.com/feeds/5010378954871423930/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2369261783286222853&amp;postID=5010378954871423930' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2369261783286222853/posts/default/5010378954871423930'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2369261783286222853/posts/default/5010378954871423930'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://yugkipukar.blogspot.com/2007/10/blog-post_5155.html' title='एक और फतवा'/><author><name>Gopal Kumar Azad</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17026889315614855803</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='22' src='http://bp1.blogger.com/_htfHEBB3KMM/R1OnPgC2oEI/AAAAAAAAAJ8/47Cqwt9SLzI/S220/15flag.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2369261783286222853.post-6867625065091603058</id><published>2007-10-31T04:46:00.000-07:00</published><updated>2007-10-31T04:49:29.140-07:00</updated><title type='text'>पाकिस्तान में हिन्दू</title><content type='html'>भारत और पाकिस्तान आज़ादी के साठ साल पूरे होने पर तरह-तरह के समारोह गये लेकिन कराची के हिंदू के लिए इन समारोहों का कोई मतलब नहीं . बल्कि उनके सामने ज़िंदगी और मौत का सवाल खड़ा है.कराची की एक ऐसी बस्ती में रहते हैं जो चारों तरफ़ से मुसलमानों से घिरी हुई है और उनके लिए हर दिन यह ख़तरा लेकर आता है कि आज जाने क्या होगा. उनका दिन जब सही सलामत गुज़र जाता है तो बड़ी राहत की साँस लेते हैं.बुजुर्ग कहते हैं, “हमने तो जैसे-तैसे वक़्त गुज़ार लिया लेकिन हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए पाकिस्तान में हालात अच्छे नहीं हैं. हम बहुत डर में ज़िंदगी गुज़ार रहे हैं. हमारे बुज़ुर्गों ने पाकिस्तान में रहने का फ़ैसला करके बहुत बड़ा ख़तरा मोल लिया था.”पाकिस्तान में रहने वाले 25 लाख हिंदुओं हैं जिन्हें संविधान में तो बराबरी का दर्जा हासिल है लेकिन हक़ीक़त कुछ और ही है.बहुत सारे हिंदुओं का यह भी कहना है कि आम ज़िंदगी में उन्हें कोई ख़ास परेशानी नहीं है लेकिन बहुत सारे ऐसे मुद्दे भी हैं जिनमें उन्हें अहसास होता है कि वे एक मुसलिम देश में रहते हैं जहाँ कभी-कभी कट्टरपंथियों का दबदबा उन्हें यह सोचने को मजबूर कर देता है कि पाकिस्तान में हिंदुओं का भविष्य क्या है?अगस्त 1947 में पाकिस्तान बनते समय उम्मीद की गई थी कि वो मुसलमानों के लिए एक आदर्श देश साबित होगा लेकिन मोहम्मद अली जिन्ना ने कहा था कि पाकिस्तान एक मुस्लिम देश ज़रूर होगा मगर सभी आस्थाओं वाले लोगों को पूरी धार्मिक आज़ादी होगी.पाकिस्तान के संविधान में ग़ैर मुसलमानों की धार्मिक आज़ादी के बारे में कहा भी गया है, “देश के हर नागरिक को यह आज़ादी होगी कि वह अपने धर्म की अस्थाओं में विश्वास करते हुए उसका पालन और प्रचार कर सके और इसके साथ ही हर धार्मिक आस्था वाले समुदाय को अपनी धार्मिक संस्थाएँ बनाने और उनका रखरखाव और प्रबंधन करने की इजाज़त होगी.”मगर आज के हालात पर ग़ौर करें तो पाकिस्तान में ग़ैर मुसलमानों की परिस्थितियाँ ख़ासी चिंताजनक हैं. उनकी पहचान पाकिस्तानी पहचान में खो सी गई है, बोलचाल और पहनावा भी मुसलमानों की ही तरह होता है, वे अभिवादन के लिएपाकिस्तान में हिंदुओं की ज़्यादातर अबादी सिंध में है. सिंध और पंजाब में रहने वाले हिंदुओं के हालात में भी ख़ासा फ़र्क नज़र आता है. सिंध में हिंदू अपने अधिकारों के लिए संघर्ष भी करते नज़र आते हैं लेकिन लाहौर में रहने वाले हिंदू जैसे पूरे तौर पर सरकार पर निर्भर हैं और उन पर सरकार की निगरानी भी है.कराची के स्वामीनारायण मंदिर परिसर में आस पास रहने वाले हिन्दू कहते है कि उन्हें वहाँ कोई परेशानी नहीं है और हिंदू अपने त्यौहार – होली, दीवाली, रामलीला वग़ैरा भारत में हिंदुओं की ही तरह पूरी आजादी और उत्साह से मनाते हैं.स्वानारायण मंदिर कराची महानगर पालिका के दफ़्तर के बिल्कुल सामने है और मंदिर परिसर में ही अनेक हिंदुओं के घर भी हैं और वहीं आसपास कुछ दुकानें भी. और उस परिसर में ऐसा ही माहौल रहता है जैसाकि भारत के किसी हिंदू बहुल इलाक़े में.वैसे तो कराची में अनेक इलाक़ों में हिंदू मंदिर और घर नज़र आते हैं लेकिन एक ऐसी भी बस्ती है जिसमें हिंदू, सिख और ईसाई रहते हैं और वहाँ अनेक मंदिरों के अलावा चर्च और एक छोटा सा गुरुद्वारा भी है. नारायणपुरा नामक यह बस्ती भी बदहाली की वही कहानी कहती है जो भारत के किसी बेहद पिछड़े इलाक़े में होती है यानी भारी गंदगी, कुपोषित बच्चे और बेकार घूमते युवकहमारे पूर्वजों ने वापिस पाकिस्तान आने का फ़ैसला करके बहुत बड़ी ग़लती की थी लेकिन हमारी मजबूरी ये है कि भारत सरकार भी हमें स्वीकार करने को तैयार नहीं है और पाकिस्तान में हम डर की ज़िंदगी जीने के लिए मजबूर हैं मुसलमानों की ही तरह अस्सलामुअलैकुम और माशाअल्लाह, इंशाअल्लाह जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हैं. इन बस्तियों में बातचीत से ऐसा आभास होता है कि वहाँ ग़ैरमुसलमानों को कोई परेशानी ही नहीं है लेकिन सच जानने की कोशिश करें तो कुछ हिंदुओं के अनुसार एक मौलवी ने एक मंदिर पर क़ब्ज़ा करके वहाँ पीर की दरगाह बना ली है.उस बस्ती में रहने वाले बताते हैं कि उनके पूर्वज 1950 के दौर में भारत के कच्छ इलाक़े में पहुँचे थे लेकिन वहाँ उन्हें समाज और सरकार का कोई सहयोग नहीं मिला और फिर वे मजबूर होकर पाकिस्तान ही लौट आये भारत में तथाकथित उच्च जाति के हिंदुओं ने उन्हें स्वीकार करने से इनकार कर दिया और छुआछूत की समस्या की वजह से उनके पूर्वज भारत से एक बार फिर पाकिस्तान लौट आए.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;तथ्य बी बी सी से----&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2369261783286222853-6867625065091603058?l=yugkipukar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://yugkipukar.blogspot.com/feeds/6867625065091603058/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2369261783286222853&amp;postID=6867625065091603058' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2369261783286222853/posts/default/6867625065091603058'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2369261783286222853/posts/default/6867625065091603058'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://yugkipukar.blogspot.com/2007/10/blog-post_31.html' title='पाकिस्तान में हिन्दू'/><author><name>Gopal Kumar Azad</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17026889315614855803</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='22' src='http://bp1.blogger.com/_htfHEBB3KMM/R1OnPgC2oEI/AAAAAAAAAJ8/47Cqwt9SLzI/S220/15flag.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2369261783286222853.post-5254226796537577308</id><published>2007-10-30T05:21:00.000-07:00</published><updated>2007-10-30T05:41:58.414-07:00</updated><title type='text'>वंदे मातरम् पर बहिष्कार की धमकी</title><content type='html'>भारत के पूर्वी राज्य झारखंड के कुछ मुसलमान नेताओं ने कहा है कि वे सात सितंबर को वंदे मातरम् गाना अनिवार्य किए जाने के विरोध में अपने बच्चों के उस दिन स्कूल ही नहीं भेजेंगे.इस संबंध में झारखंड के मुस्लिम नेता मौलाना कुतुबुद्दीन रिज़वी का कहना है, "यदि भाजपा शासित राज्य सरकार हम पर वंदे मातरम् को थोपेगी तो हम इसका बहिष्कार करेंगे. हम इसके विरोध में अपने बच्चों को स्कूल ही नहीं भेजेंगे." मौलाना रिज़वी के रुख़ का अन्य मुस्लिम संगठनों ने भी समर्थन किया है.इससे आप क्या निष्कर्ष निकलते हैं ? क्या अब मुस्लिम रास्त्र विरोधी नहीं हो गये हैं ?जो वंदेमातरम नहीं बोलेगा उसे हिंदुस्तान जैसे पावन देश में रहने का कोई मतलब नहीं&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;वंदेमातरमजय हिंद जय भारत हर हर महादेव&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2369261783286222853-5254226796537577308?l=yugkipukar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://yugkipukar.blogspot.com/feeds/5254226796537577308/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2369261783286222853&amp;postID=5254226796537577308' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2369261783286222853/posts/default/5254226796537577308'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2369261783286222853/posts/default/5254226796537577308'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://yugkipukar.blogspot.com/2007/10/blog-post_2369.html' title='वंदे मातरम् पर बहिष्कार की धमकी'/><author><name>Gopal Kumar Azad</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17026889315614855803</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='22' src='http://bp1.blogger.com/_htfHEBB3KMM/R1OnPgC2oEI/AAAAAAAAAJ8/47Cqwt9SLzI/S220/15flag.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2369261783286222853.post-3798481945226291263</id><published>2007-10-30T05:16:00.000-07:00</published><updated>2007-10-30T05:45:10.522-07:00</updated><title type='text'>मुसलमानों का तालिबानी संस्कृति और हिन्दुस्तान</title><content type='html'>जहां कहीं भी मुसलमान अल्पसंख्या में होते है तो साधारणतया वे पंथनिरपेक्षता का समर्थन करते है, किंतु जैसे ही उनकी संख्या एक सीमा से बढ़ जाती है तो लोकतंत्र और पंथनिरपेक्षता जैसे मूल्य 'कुफ्र' हो जाते है। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद ने गांधी जयंती के अवसर पर एक सभा को संबोधित करते हुए कहा, ''..गांधी दर्शन ही प्रगति का मार्ग है।'' यह बात वहां के मुसलमानों को रास नहीं आई। कश्मीर के मुफ्ती बशीरुद्दीन ने इसकी कड़ी आलोचना करते हुए कहा, ''गांधी अपने समुदाय के लिए प्रासंगिक हो सकते है, किंतु मुसलमानों के लिए केवल पैगंबर साहब ही अनुकरणीय है।'' मुफ्ती ने आजाद से 'इस्लाम विरोधी' टिप्पणी के लिए प्रायश्चित करने को कहा है। गांधी जी ने मुस्लिमों की हर उचित-अनुचित मांगों का समर्थन किया। कठमुल्लों से प्रभावित मुस्लिम समाज को संतुष्ट करने के लिए खिलाफत आंदोलन में कांग्रेस को भी घसीट ले गए, किंतु वह जीवनपर्यत मुसलमानों का विश्वास नहीं जीत पाए। स्वतंत्रता संग्राम में मुसलमानों की भागीदारी नाम मात्र की थी। पाकिस्तान के निर्माण तक अधिकांश मुसलमानों ने अपना समर्थन अपने दीन की पार्टी-मुस्लिम लीग को ही दिया। विभाजन के साथ खंडित भारत में तमाम लीगी नेताओं ने रातोंरात कांग्रेस का पंथनिरपेक्षता का चोला पहन लिया, क्योंकि विभाजन के बाद भारत में मुसलमानों का जनसंख्या अनुपात आधे से भी कम रह गया था। कश्मीर में मुसलमानों ने गांधी जी के बारे में जो कहा उसमें कुछ नया नहीं है।लखनऊ के अमीनाबाद पार्क में सन 1924 में मुस्लिम नेता मोहम्मद अली ने कहा था, ''मिस्टर गांधी का चरित्र कितना भी पाक क्यों नहीं हो, मेरे लिए मजहबी दृष्टि से वह किसी भी मुसलमान से हेय है।. हां, मेरे मजहब के अनुसार मिस्टर गांधी को किसी भी दुराचारी और पतित मुसलमान से हेय मानता हूं।'' आज शेष भारत में तो गांधी जी मुसलमानों और 'सेकुलरिस्टों' के लिए आदर्श है,परंतु जम्मू-कश्मीर में केवल 'काफिर' मात्र। क्यों? इस बात में दो राय नहीं कि किसी भी समुदाय की आस्था पर आघात सभ्य समाज में स्वीकार नहीं होना चाहिए। हिंदू देवी-देवताओं और भारत माता का अश्लील चित्रण करने वाले एफएम हुसैन सेकुलर बिरादरी के हीरो क्यों है?&lt;br /&gt;Please Read Full Topic On&lt;a href="http://www.ckshindu.blogspot.com/" target="_blank"&gt;http://www.ckshindu.blogspot.com/&lt;/a&gt;and Please Post Your Comments&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2369261783286222853-3798481945226291263?l=yugkipukar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://yugkipukar.blogspot.com/feeds/3798481945226291263/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2369261783286222853&amp;postID=3798481945226291263' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2369261783286222853/posts/default/3798481945226291263'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2369261783286222853/posts/default/3798481945226291263'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://yugkipukar.blogspot.com/2007/10/blog-post_30.html' title='मुसलमानों का तालिबानी संस्कृति और हिन्दुस्तान'/><author><name>Gopal Kumar Azad</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17026889315614855803</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='22' src='http://bp1.blogger.com/_htfHEBB3KMM/R1OnPgC2oEI/AAAAAAAAAJ8/47Cqwt9SLzI/S220/15flag.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2369261783286222853.post-7076428780990184422</id><published>2007-10-30T05:09:00.000-07:00</published><updated>2007-10-30T05:46:00.788-07:00</updated><title type='text'>इसलाम और कुरान पर महापुरुषों के द्वारा दिए वीचार</title><content type='html'>महर्षि दयानंद सरस्वती :&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इस मजहब में अल्लाह और रसूल के वास्ते संसार को लुटवाना और लुट के माल में खुदा को हिस्सेदार बनाना लुटेरों का काम है, जो मुस्लमान नहीं बनते उन लोगो को मरना और बदले में बहिश्त को पाना आदि पक्षपात की बाते इश्वर की नहीं हो सकती, श्रेष्ठ ग़ैर मुसलमानो से शत्रुता और दुस्त मुसलमानो से मित्रता जन्नत में अनेक लौंडे होना आदि निन्दित उपदेश कुएं में डालने योग्य हैं, अनेक स्त्रियों को रखने वाले मुहम्मद साहेब निर्दयी, राक्षस व विषयासक्त मनुष्य थे, और इसलाम से अधिक अशांति फ़ैलाने वाला दुस्त मत और दुसरा कोई नहीं, इसलाम मत की मुख्य पुस्तक कुरान पर हमारा यह लेख हठ, दुराग्रह, इर्ष्या-द्वेष, वाद विवाद और विरोध घटने के लिए लिखा गया, न की इनको बढ़ने के लिए सब सज्जनो के सामने रखने का उद्देश्य अच्छाई को ग्रहन करना और बुरे को त्यागना है.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;गुरू राम दास जी :-&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;छत्रपति शिवाजी महाराज के गुरू अपने "ग्रंथ-दास बोध" में लिखते हैं की मुस्लमान शासको द्वारा कुरान के अनुसार काफ़िर हिंदु नारियों से बलात्कार किये गए जिससे दुःखी होकर अनेकों ने आत्महत्या कर ली, मुस्लमान न बनने पर अनेक क़त्ल किये और अनगिनत बच्चे अपने अपने माँ बाप को देखकर चीखते रहे, मुसलमान आक्रमणकारी पशुओं के समान निर्दयी थे, उन्होने धर्म परिवर्तन न करने वालों को जिंदा ही धरती में दबा दिया या आग से जला दिया.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;गुरू देव रविंद्रनाथ टैगोर :&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इसाई और मुस्लमान मत अन्यों को समाप्त करने हेतु कटिबद्ध है, उनका उद्देश्य केवल अपने मत पर चलना ही नहीं अपितु मानव धरम को नष्ट करना है, वे अपनी रास्त्र भक्ती ग़ैर मुस्लिम देश के प्रति नहीं रख सकते, वे संसार के किसी भी मुस्लिम और मुस्लिम देश के प्रति वफादार हो सकते हैं परंतु किसी अन्य हिंदु या हिंदु देश के प्रति नहीं.संभवतः मुस्लमान और हिंदु एक दुसरे के प्रति बनावटी मित्रता तो स्थापित कर सकते हैं परंतु स्थायी नहीं,&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;राजाराम मोहन राय :&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मुसलमानो ने मान रखा है की कुरान की आयते अल्लाह का हुक्म है, और कुरान पर विश्वाश न करने वालो को मरना उचित है इसी कारन मुसलमानो ने हिंदु पर अत्यधिक अत्याचार किये, उनका बध किया, लुटा और उन्हें गुलाम बनाया. बाड्मय- राजाराम मोहन राय&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;श्रीमती ऐनी बेसेंट :-&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मुसलमानो के दिल में ग़ैर मुसलमानो के बिरुध नंगी और बेशर्मी की हद तक नफरत है हमने मुसलमान नेताओ को यह कहते हुये सुना है की यदी अफगान भारत पर हमला करता है तो वे मुसलमानो की रक्षा और हिन्दुओ की हत्या करेंगे, मुसलमानो की पहली वफादारी मुस्लिम देश के प्रति है हमारी मातृभूमि भारत के प्रति नहीं, हमें यह भी ज्ञात हुआ है की उनकी इच्छा अंग्रेजो के पश्चात यहाँ अल्लाह का राज्य स्थापित करना है न की सारे संसार के स्वामी प्रेमी परमात्मा का, स्वाधीन भारत के बारे में सोचते समय हमें मुस्लिम शासन के आतंक के बारे में वीचार करना होगा.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;लाला लाजपत राय :-&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मुस्लिम कानून और मुस्लिम इतिहास को पढने के पश्चात् मै इस निष्कर्ष पर पंहुचा हूँ की उनका मजहब उनके अच्छे मार्ग में एक रुकावट है, मुसलमान जनतांत्रिक आधार पर हिंदुस्तान पर शासन चलाने हेतु हिन्दुओ के साथ एक नहीं हो सकते, क्या कोई मुसलमान कुरान के बिपरीत जा सकता है ? हिन्दुओ के विरुध कुरान और हदीस की निवेधज्ञा क्या हमें एक होने देगी ? हमें दर है की हिंदुस्तान के ७ करोर मुसलमान अफगानिस्तान, मध्य एशिया अरब, मेसोपोटामिया और तुर्की के हथियार बंद गिरोह मिलकर अपर्त्याशित स्थिति पैदा कर देंगे.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;Guru nanak dev&lt;br /&gt;मुस्लमान, सैयद, शेख, मुग़ल पठान आदि सभी बहुत निर्दयी हो गए थे, जो लोग मुसलमान नहीं बनते थे उनके शरीर में कीलें ठोक कर और कुत्तों से नुच्वाकर मर दिया जाता था, नानक प्रकाश और प्रेमनाथ जोशी की पुस्तक से लिया गया,&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मोहन दास करमचंद गांधी :&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;"मेरा अपना अनुभव है की मुसलमान क्रूर और हिंदु कायर होते है" मोपला और नोवाखली के दंगो में मुसलमानो द्वारा की गयी असंख्य हिंदुओं की हत्या वाली हिंसा को देखकर अहिंसा निति से मेरा वीचार बदल रहा है,गांधी जी की जीवनी धनंजय कीर द्वारा लिखित&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;महर्षि अरबिंद :&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;हिंदु मुस्लिम एकता असंभव है क्योकि कुरान-मत हिंदु को मित्र के रूप में सहन नहीं करता, हिंदु मुस्लिम एकता का अर्थ हिन्दुओ की गुलामी नहीं होनी चाहिए इस सच्चाई की उपेक्षा करने से लाभ नहीं की किसी दिन हिन्दुओ को मुसलमानो से लारने हेतु तैयार होना होगा और होना चाहिए, हम भ्रमित न हो और समस्या के हल से पलायन न करें, हिंदु मुस्लिम समस्या का हल अंग्रेजों के जाने से पहले सोच लेना चाहिए अन्यथा गृहयुद्ध की खतरे की संभावना है&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;सरदार बल्लाव भाई पटेल :&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अब मै देखता हूँ की उन्ही युक्तियों को यहाँ फिर अपनाया जा रहा है जिसके कारण देश का बिभाजन हुआ था, मुसलमानो की अलग बस्तिया बसाई जा रही हैं मुस्लिम लीग के बक्ताओं के वाणी में विष की भरपूर मात्रा है मुसलमानो को अपनी प्रविर्ती में परिवर्तन करना चाहिए मुसलमानो को अपनी मनचाही वस्तु पकिस्तान उन्हें मिल गयी है वे ही पकिस्तान के लिए उत्तरदायी हैं क्योकि मुसलमान ही देश के बिभाजन के अगुआ थे न की हिंदुस्तान के वासी, जिन लोगों को मजहब के नाम पर विशेष सुबिधा चाहिए वे पकिस्तान चले जाएँ इसलिये उसका निर्माण हुआ है, वे मुसलमान लोग पुनः फूट के बीज बोना चाहते हैं, हम नहीं चाहते की देश का फिर से बिभाजन हो. २८/८/१९४७ को सम्बिधान सभा में दिए भाषण का सार&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2369261783286222853-7076428780990184422?l=yugkipukar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://yugkipukar.blogspot.com/feeds/7076428780990184422/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2369261783286222853&amp;postID=7076428780990184422' title='9 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2369261783286222853/posts/default/7076428780990184422'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2369261783286222853/posts/default/7076428780990184422'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://yugkipukar.blogspot.com/2007/10/blog-post_6425.html' title='इसलाम और कुरान पर महापुरुषों के द्वारा दिए वीचार'/><author><name>Gopal Kumar Azad</name><uri>http://www.blogger.com/profile/17026889315614855803</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='22' src='http://bp1.blogger.com/_htfHEBB3KMM/R1OnPgC2oEI/AAAAAAAAAJ8/47Cqwt9SLzI/S220/15flag.jpg'/></author><thr:total>9</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2369261783286222853.post-5545984529673477968</id><published>2007-10-30T04:04:00.000-07:00</published><updated>2007-10-30T05:08:44.931-07:00</updated><title type='text'>एक युद्ध जो आदि काल से चला आ रहा है</title><content type='html'>&lt;a href="http://bp3.blogger.com/_htfHEBB3KMM/RyceX4n73nI/AAAAAAAAAC8/j0rkKy8ooEg/s1600-h/88e7.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5127100096470310514" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; CURSOR: hand; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://bp3.blogger.com/_htfHEBB3KMM/RyceX4n73nI/AAAAAAAAAC8/j0rkKy8ooEg/s320/88e7.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;यह एक ऐसा युद्ध है जो हजारों वर्षो से निरंतर चला आ रहा है जो की ख़तम होने का नाम ही नहीं लेता है, कारण सिर्फ इतना है की हम हिन्दू कुछ ज्यादा ही शांत प्रवृति के होते हैं हम किसी को जल्द अपना दुश्मन नहीं मानते और सिर्फ अपने मै मस्त रहते हैं जिसके कारण हमने कभी आज़ादी की सांस ली ही नहीं कभी अफगानी लुटेरों के शिकार होते रहे और उनके मुग़ल साम्राज्य को स्थापित होने दिया परिणाम स्वरुप हमें हजारों साल तक युद्ध करते रहे और अनेको महान वीरों गुरु तेग बहादुर, गुरु गोबिंद सिंह, महाराणा प्रताप, महाराज रंजीत सिंह, वीर शिवाजी जैसे अशंख्य वीरों की कुर्वानी के बाद हम मुग़लों का तख्ता पलट करने में कामयाब हो सके और हमें मुगलों के जुल्म से आज़ादी मिली लेकिन हम अपनी आज़ादी को चंद दिन भी कायम नहीं रख सके और अंग्रेजों की गुलामी को स्वीकार कर लिया फिर एक लम्बा संघर्ष अंग्रेजो से छीर गया सन् १८५७ के ग़दर से लेकर १९४७ तक के आज़ादी संग्राम में फिर से हमने अपने लाखों वीरों को खोया, अभी हम ठीक से आज़ादी मिलने की ख़ुशी भी नहीं मना पाए थे की फिर कुछ लोगो के दिल में हिन्दुस्तान की आज़ादी खटक गयी और उन्होने एक अलग से मुस्लिम देश बना कर भारत माँ के दो टुकरे कर दिए और देश को एक भयंकर हिंसा की आग में झोंक दिया जिसमे बिगत है की पाकिस्तान से तीन ट्रेन को हिन्दुओ के लाशों से भरकर हिन्दुस्तान भेजा गया उसके बाद हिन्दुस्तान में भी हिंसा फैलना लाज़मी था और उस हिंसा में भी बहुत से लोग मारे गए लेकिन इतने लोगो के मारे जाने के बाबजूद नतीजा बिलकुल शून्य रहा मुसलमानो को उनकी मनचाही बस्तु पाकिस्तान मिल जाने के बाद भी मुस्लिमों ने भारत नहीं छोरा और भारत में रहकर तरह तरह से कुचक्र रचने लगे भारत के खिलाफ जिसका हजारो प्रमाण है बटवारे के तुरंत बाद पाकिस्तान का भारत पर आक्रमण बटवारे के बाद जो बचे मुस्लिम थे उनके द्वारा उनके द्वारा पाकिस्तान का समर्थन, कुचक्र रचकर किये गए दंगे, कश्मीर में आतंकवाद और ना जाने कितने ही हिन्दुस्तान और हिन्दू बिरोधी गतिबिधियों में शामिल भारतीय मुस्लिम, इसको हम एक शजिस नहीं तो क्या कहेंगे, हम हिन्दुस्तान को धर्म निरपेक्ष रास्त्र कहते हैं और खुद को सेकुलर लेकिन क्या गैर हिन्दू समुदाय भी हमारे जैसा सोचती है ? अगर सोचती है तो ये रास्त्र विरोधी सजिसें क्यों ?? हाँ हम मानते हैं की हाँ भारत एक धर्मनिरपेक्ष रास्त्र है लेकिन क्या सिर्फ हम हिन्दुओ लिए ही ये धर्मनिरपेक्षता लागू होता या फिर और किसी के लिए भी, दिन रात बढ़ रहे आतंकवादी बर्दातें अब तक के आकरो के मुताबिक ५४००० लोग इन ध्ट्नाओ के शिकार हो चुके हैं जो की मासूम थे जिनका किसी से कोई लेना देना नहीं था आतंकवादी वारदातों मै हिन्दुस्तान के बिभिन्न जगहों के मुसलमानों का शामिल होना, चाहे वो किसी छोटे जगह पर किया गया हमला हो या किसी मंदिर पर या फिर संसद पर हुआ हमले में DU के प्रोफेसर का साजिस मै शामिल होना, आखिर क्या साबित करता है, अगर किसी अनपढ़ ने गलती की तो उसे हम नहीं माने या उसे हम ये माने की एक अनपढ़ की वजह से पूरे कॉम को बदनाम नहीं किया जाना चाहिए लेकिन अगर मुस्लिम समुदाय के अनपढ़ से लेकर उच्च शिक्षित लोग तक इन सजिसों में शामिल पकरा जाए और फिर भी हम इसे एक साजिस नहीं माने इसे रस्त्रद्रोह नहीं माने तो हमसे बरा मूर्ख कोई नहीं होगा, जगह जगह पर सिमी के खुले आम पर्दर्शन, सिमी जो की एक प्रतिबंधित मुसलिम रास्त्र द्रोही संगठन हैं उसका खुले आम मुस्लिमों द्वारा समर्थन अगर इसे भी हम मुस्लिमों की हिन्दुस्तान बाटने की साजिस नहीं माने तो ये हमारी कायरता को पर्दर्षित करेगा हम करोरो हिन्दू खुद को सेकुलर होने का दावा करते हैं अपने देवी देवताओं की बेइज्जती को बर्दास्त करते हैं क्या कभी किसी मुसलिम को सेकुलर होने का दावा करते सुना है ? क्या किसी मुसलिम को अपने खुदा का अपमान करते देखा है? और अगर किसी ने भूलचुक से भी खुदा का अपमान किया हो तो उसे मुसलिम समुदाय द्वारा कठोर दंड दिया जाता है यहाँ तक की वहा पर दंगा तक कराया जाता है आखिर क्या है ये सब?? जहाँ भी मुसलिम बाहुल्य है वहा हिन्दुओ की निर्शंश हत्या हो रही है चाहे वो कश्मीर हो या केरला या फिर उत्तर पूरब भारत आखिर क्या है ये सब ???? क्या ये एक साजिस नहीं है जो की हिन्दुस्तान को फिर से टुकरे करने की क्या हमें ये सब देखते हुए भी चुप बैठे रहना चाहिए??? नहीं कभी नहीं अगर फिर भी हम चुप बैठे रहे तो हम कायर हैं बुजदिल हैं और मुझे नहीं लगता की हम इतने कायर हैं हमारा खून अब भी उबल रहा है मातृभूमि की रक्षा के लिए हम इनके किसी भी साजिस को नाकाम करने के लिए काफी हैं ये जो युद्ध आदिकाल में शुरू हुआ था उस युद्ध को हमें ख़तम करना होगा और हम इस युद्ध को ख़तम ख़तम करने में शक्षम हैं जरूरत है तो सिर्फ हमें एक होने की हमें हमारे ताक़त को बढाने की मन में रास्त्र प्रेम की भावना को जागृत करने की और जिस दिन हम जागेंगे उस दीन हर कुचक्र जो हमारे मातृभूमि के खिलाफ रचा जा रहा है को तोर कर एक नया हिन्दुस्तान बनायेंगे,&lt;br /&gt;जय हिंद जय भारत वंदेमातरम &lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2369261783286222853-5545984529673477968?l=yugkipukar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://yugkipukar.blogspot.com/feeds/5545984529673477968/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2369261783286222853&amp;postID=5545984529673477968' title='2 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2369261783286222853/posts/default/5545984529673477968'/><link rel='self' 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